प्राचीन काल से ही हमारे यहां पशुपालन की परंपरा रही है। कभी दूध, मांस, अंडे या रेशम प्राप्त करने के उद्देश्य से तो कभी शौक के लिए मनुष्य पशुपालन में संलिप्त रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पशु व पक्षियों में अनिष्ट तत्वों को पहचान कर उन्हें समाप्त करने की अद्भुत शक्तियां व क्षमता भी होती हैं। इस ब्रह्मांड में व्याप्त नकारात्मक शक्तियों को निष्क्रिय बनाने की ताकत इन पालतू प्राणियों में होती है। साथ ही साथ इनकी गतिविधियों से हम अपने साथ होने वाले शकुन-अपशकुनों को भी भांप सकते हैं।

पशु-पक्षियों से जुड़े शकुन-अपशकुन

बिलार (बिल्ली)-नौकरी आदि शुभ कार्य के लिए जाते समय यदि बिल्ली रास्ता काट जाए तो अपशकुन होता है। 

कुत्ता- शुभ कार्य के समय यदि कुत्ता मार्ग रोकता है तो विषमता तथा अनिश्चय प्रकट होता है।

हंस-हंस का दर्शन तथा पंखों का फड़फड़ाना कार्य सिद्धि का द्योतक माना जाता है।

खंजन-वर्ष के शुरू में यदि खंजन पक्षी के दर्शन हों, तो पहला दिन जैसा गुजरे वैसा ही सारा वर्ष रहेगा।

नीलकंठ नीलकंठ का सामने से मिलना, प्रकट होना कार्यसिद्धि तथा यश प्राप्ति का सूचक है। कौआ- आपके घर मेहमान के आनेकी सूचना कौआ देता है। इसके लिए वह सुबह आपकी छत पर आकर चिल्लाएगा।

गाय- अगर आपका कोई काम होने वाला है या आप किसी काम के लिए जा रहे हैं ,तब गाय रम्भा दे तो समझ लेना चाहिए आपका सोचा हुआ काम पूरा होगा।

अनिष्ट प्रभाव से ऐसे बचें

ग्रहों के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए हमारे यहां अनेक उपाय प्रचलित हैं, इनमें से पशु-पक्षियों की सेवा भी ऐसा ही एक उपाय है। हमारे देश में तो कई शुभ अवसरों पर व कहीं-कहीं तो रोज पशुओं को भोजन कराने की प्रथा भी देखने को मिलती है। यह सब ऐसे ही निरर्थक नहीं किया जाता, बल्कि इनकी सेवा से आप अपने अशुभ ग्रहों को शांत कर सकते हैं।

सूर्य- लाल गाय का सांड को गेहूं और गुड़ खिलाना, गौरेया को दाना चुगाना आदि सूर्य शांति के उपाय हैं।
चंद्रमा-सोमवार को गाय को गुलगुले खिलाना, खरगोश को दूब डालना, चींटियों को मीठा डालना आदि चंद्रमा शांति के उपाय हैं।

मंगल- बंदरों को चना खिलाना, लंगूरों को केले खिलाना मुर्गियों को दाना चुगाना आदि मंगल शांति के उपाय हैं।
बुध- गाय के घास, हरी सब्जी खिलाना, तोते को हरी मिर्च खिलाना या दाना चुगाना आदि बुध शांति के उपाय हैं।

शुक्र-कपिला गाय को आटा खिलाना, कबूतरों को दाना चुगाना, कुत्ते को मीठी रोटी खिलाना, मोर को दाना चुगाना आदि शुक्र शांति के उपाय हैं।
शनि- काली कुतिया या कुत्ते को पालना एवं नियमित भोजन देना शनि ग्रहों की शांति के लिए उपयुक्त है।

राहु-सांप की सेवा, कुत्तों को दूध पिलाना, कछुओं को आटे की गोली खिलाना, कौओं, को रोटी डालना आदि राहु शांति के उपाय हैं।
केतु- मछली को सतरींजा की गोली डालना, मछली को रामनाम की गोली डालना, अजगर सेवा, कौओं को चुग्गा डालना आदि केतु शांति के उपाय हैं।

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शुभ फल की प्राप्ति के उपाय

हमारी संस्कृति में पशु-पक्षियों का कितना महत्व है, यह इस बात से ही पता चल जाता है कि हमारे प्रत्येक आराध्य देवी-देवता के साथ किसी न किसी पशु या पक्षी की उपस्थिति अवश्य देखी जाती है।श्री कृष्ण का गौ प्रेम हमें उनकी सेवा करने को प्रेरित करता है। हमारे शास्त्रों में गाय के संबंध में अनेक बातें लिखी हुई हैं जैसे शुक्र की तुलना सुंदर स्त्री से की जाती है ,वैसे ही इसे गाय के साथ भी जोड़ते हैं।

1-अतः शुक्र के अनिष्ट से बचने के लिए गोदान का प्रावधान है। यदि वास्तु में उत्तर-पश्चिम में कोई विशेष दोष हो और वह दोष ऐसा हो जिसे ठीक न किया जा सकता हो, तो गौसेवा लाभ देती है।

2-जिस भू-भाग पर मकान बनाना हो वहां पर पंद्रह दिन तक गाय या बछड़ा बांधने से वह जगह पवित्र हो जाती है।
3-मछलियों को पालने व आटे की गोलियां खिलाने से अनेक दोष दूर होते हैं। जब घर में मछली रखें तो आठ सुनहरी और एक काली मछली ही रखें। मछली पालना वास्तु के इशान कोण के दोष को दूर करता है।

4-तोते का हरा रंग बुध ग्रह के साथ जोड़कर देखा जाता है। अतः घर में तोता पालने से बुध की कुदृष्टि का प्रभाव दूर होता है। यदि घर की उत्तर दिशा में दोष हो, तो भी तोता पालना लाभ देता है।
5-घोड़ा पालना भी शुभ है। सभी लोग घोड़ा नहीं पाल सकते। इसलिए काले घोड़े की नाल को घर में रखने से भी शनि के कोप से बचा जा सकता है।

6-शनि को प्रसन्न करना हो, तो कौवों को भोजन कराना चाहिए। तदनुसार काले कौवे को भोजन कराने से अनिष्ट व शत्रु का नाश होता है।
7-कुत्ता भी नकारात्मक शक्तियों को नियंत्रित कर सकता है। उसमें भी काला कुत्ता सबसे ज्यादा उपयोगी सिद्ध होता है। 
8-जिस पशु -पक्षी की सेवा की जाती है। वह अपने से संबंधित भाव का लाभ अवश्य देता है।

विभिन्न पवित्र माह, पवित्र तिथियों, ग्रह विशेष से संबंधित वार नक्षत्रों आदि में पशु-पक्षी की विशेष सेवा की जाए तो हालात एकदम बेहतर होते हैं और लाभ भी जल्दी मिलता है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि पशु-पक्षियों को चारा डालने से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है। इस बात का खास ध्यान रखें कि जो भी दान करें, वह शाकाहारी जानवरों को ही करें। मांसाहारी जानवरों की प्रवृत्ति हिंसक होती है। उन्हें कुछ खिलाने पर भी उनकी वृत्ति व प्रवृत्ति में कोई अंतर नहीं आता है जबकि शाकाहारी पशु तुरंत आपके मित्र बन जाते हैं।

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