भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्तगण बहुत सारे उपाय करते हैं, लेकिन देवों के देव महादेव को आसानी से खुश करने के लिए रुद्राभिषेक सबसे रामबाण उपाय है। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो उचित मुहूर्त और विधि से रुद्राभिषेक करके आप भगवान शिव से मनचाहा वरदान पा सकते हैं, तो आइए जानते हैं, रुद्राभिषेक करने का सबसे उचित समय क्या है और इसकी क्या महत्ता है-

रुद्राभिषेक की महिमा

शिवलिंग पर मंत्रों के साथ विशेष चीजें अर्पित करना ही रुद्राभिषेक कहलाता है। रुद्राभिषेक में शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों का पाठ किया जाता है। सावन में रुद्राभिषेक से भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं, जिससे सभी मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं। रुद्राभिषेक ग्रहों की पीड़ा को दूर करने का सबसे उत्तम उपाय है। सावन में रुद्राभिषेक कराने से व्यापार में नुकसान, कालसर्प योग, गृहकलेश, काम में आने वाली अड़चनों से छुटकारा मिलता है।

कहाँ करें रुद्राभिषेक?

अलग -अलग स्थानों पर रुद्राभिषेक करने का फल भी अलग होता है। वैसे तो रुद्राभिषेक घर पर ही किया जा सकता है, लेकिन यह ज्यादातर मंदिर में, नदी तट पर और सबसे ज्यादा पर्वतों पर फलदायी होता है। 

रुद्राभिषेक कब होता है सबसे उत्तम?

किसी भी तरह का धार्मिक कार्य करने में मुहूर्त का विशेष योगदान होता है। ठीक उसी तरह रुद्राभिषेक के लिए भी कुछ योग उत्तम माने जाते हैं, जिसके अंतर्गत रुद्राभिषेक करने के परिणाम जल्दी मिलते हैं कृष्णपक्ष की प्रतिपदा, चतुर्थी, पंचमी, अष्टमी, एकादशी, द्वादशी, अमावस्या तिथियां, शुक्लपक्ष की द्वितीया, पंचमी, षष्ठी, नवमी, द्वादशी, त्रयोदशी तिथियों में अभिषेक करने से फल शीघ्र प्राप्त होता है।

 

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