सनातन धर्म में गाय को विशेष महत्व दिया जाता है और गौसेवा बेहद कल्याणकारी मानी गई है। वैसे तो हर दिन गाय की सेवा की बात कही गई है, पर गौ पूजन के लिए कार्तिक मास की अष्टमी तिथि विशेष महत्व रखती है, जिसे गोपाष्टमी के रूप में जाना जाता है। जी हां, कार्तिक मास की अष्टमी को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाता है, जिस दिन गायों की विधि विधान से पूजा और सेवा की जाती है, मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को पुण्य मिलता है। इस बार ये 4 नवम्बर यानि कि इस सोमवार को को पड़ रहा है। तो चलिए आपको गोपाष्टमी के पौराणिक महत्व के बारे में बताते हैं और साथ ही ये भी बताएंगे कि आप कैसे इस त्यौहार का लाभ उठा सकते हैं।

क्या है पौराणिक महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से गौ चारण यानि कि गाय चराना शुरू किया था। कथा के अनुसार, जब कृष्ण छोटे थे तो माता यशोदा उन्हें गाय चराने नहीं भेजती थीं, ऐसे में जब एक दिन श्रीकृष्ण गाय चराने की जिद् करने लगें तो माता यशोदा ने ऋषि शांडिल्य से कहकर मुहूर्त निकलवाया और पूजन के बाद श्रीकृष्ण को गौ चारण के लिए भेजा। तभी से इस दिन गायों की सेवा और पूजन किया जाने लगा।

कैसे उठाएं गोपाष्टमी का लाभ 

इस दिन घर की गायों और बछड़े को अच्छे से नहला धुलाकर तैयार किया जाता है, फिर उनका श्रृंगार किया जाता हैं, जिसके लिए उनके पैरों और गले में घुंघरू के साथ ही दूसरे आभूषण पहनाएं जाते हैं। इसके बाद उनकी पूजा-अर्चना की जाती हैं। फिर उन गायों को चराने के लिए बाहर ले जाया जाता है। शाम को गायें जब वापस आती हैं, तो फिर उनकी पूजा कर उन्हे अच्छा खाना दिया जाता है। जिसमें खासतौर पर गाय को हरा चारा, हरा मटर एवं गुड़ खिलाया जाता हैं। वहीं जिनके घरों में गाय नहीं होती है वो गौ शाला जाकर गाय की पूजा कर सकते है। या फिर आप ग्वालों को भी दान-दक्षिणा दे सकते हैं।