रत्न धारण करने की परंपरा अत्यंत प्राचीन तो है हीं, लाभकारी भी है। इन रत्नों में मूंगा का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उत्साह और उन्नति का दूसरा नाम है मूंगा, साथ ही इसके कुछ चिकित्सीय लाभ भी हैं।

रत्न अपनी अन्य विशेषताओं के साथ-साथ अपने रंग के कारण भी हमारी जीवनशैली व हमें प्रभावित करते हैं जो कि एक प्रकार की चिकित्सा ही है। हमारी आभा में सातों रंग विद्यमान हैं।

मूंगे का रंग लाल या सिंदूरी, सफेद होता है। हमने मूंगा धारण किया हुआ हो तो हमारी दृष्टिï इस लाल रंग पर सदैव ही रहती है, जिससे हमें लाल रंग के अपेक्षित लाभ स्वत: ही प्राप्त होते रहते हैं। आइए जानें कि मूंगे का लाल रंग किस प्रकार हमें चिकित्सा भी प्रदान करता है-

  • लाल रंग पराक्रम का प्रतीक है क्योंकि हमारे रक्त का रंग भी लाल है, अत: हमारे पराक्रम में वृद्घि होती रहती है।
  • लाल रंग का मूंगा धारण करने से हमें पूरा दिन स्फूर्ति बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।
  • मूंगे का लाल रंग हमें ऊर्जावान बनाता है।
  • मूंगे की लाली हमारे ओज एवं तेज में वृद्घि करती है।
  • मूंगे का लाल रंग जहां हमारे पराक्रम को बढ़ाता है वहीं सामने वाले का पराक्रम क्षीण करता है।
  • मूंगे का लाल रंग हमारे स्वास्थ्य की रक्षा में भी सहायता प्रदान करता है।
  • मूंगे की लाली हमारे शरीर में चुस्ती, फुर्ती को बढ़ाती है।

मूंगा: उच्च इच्छाशक्ति, कर्म की प्रबलता और प्रखरता, जोश, रौब, क्रोध, रक्त विकार, पराक्रम का दाता है। यह रत्न व्यक्ति विशेष की उसी प्रकार रक्षा करने में सक्षम है जिस प्रकार एक सेनापति राज्य की आंतरिक और बाहरी दोनों शत्रुओं से रक्षा करता है। रोगों से रक्षा कर शरीर को स्वस्थ तो रखता ही है साथ ही बाहरी शत्रुओं, दुर्घटनाओं, छोटी-मोटी चोटों इत्यादि से भी बचाता है। अपने लाल रंग की लाली के समान मनुष्य को लालिमा भी प्रदान करता है।

रत्न धारण करते समय प्रथम अनुभूति यही होती है कि मैंने ग्रह दोष निवारण हेतु अमुक रत्न धारण कर लिया है, अत: अब मेरे कष्टों का निवारण प्रारंभ हो जाएगा। यही अनुभूति, आस्था और विश्वास है। जिससे किसी भी रत्न का संपूर्ण लाभ जातक को प्राप्त होता है। 

मूंगा धारण करने से प्राप्त होने वाले मनोवैज्ञानिक लाभ इस प्रकार हैं। ग्रह दोष के अतिरिक्त भी रत्न लाभ प्रदान करते हैं। 

चरित्र का निर्माण

मूंगा धारण करने से जातक चरित्रवान बनता है। उसके मन में अपने चरित्र के विषय में जागरुकता बढ़ जाती है जिसके परिणामस्वरूप उसके व्यवहार में शनै: शनै: प्रगाढ़ता बढ़ती चली जाती है।

आत्मबल में वृद्धि

मूंगा धारण करने वाले जातक को आत्मबल और मानसिक बल इतना अधिक हो जाता है कि वह अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए दृढ़ संकल्प होकर कार्य करता है और अंतत: सफलता अर्जित करता है।

व्यक्तित्व में आकर्षण की वृद्धि

मूंगा धारण करने से जातक के व्यक्तित्व में आकर्षण शक्ति स्वत: ही उत्पन्न होने लगती है जिसके परिणामस्वरूप उसके व्यवहार में आने वाले लोगों का पराक्रम उसके समक्ष आते ही शिथिल होना प्रारंभ कर देता है।

सेवा भावना में वृद्धि

मूंगा धारण करने से जातक में सहानुभूति, दया और समाज सेवा की भावना जाग्रत हो जाती है और वह परोपकारी कार्यों की ओर उन्मुख होने लगता है जिससे उसे मान-सम्मान के साथ-साथ उच्च पद और प्रतिष्ठा भी प्राप्त होती है।

दृढ़ निश्चयी बनाता है

मूंगा धारण करने वाले व्यक्ति दृढ़निश्चयी हो जाते हैं, इसीलिए वे अपने कार्यों को सफल बनाने के लिए अंतिम समय तक संघर्षरत रहते हैं। 

मनोबल में अपार वृद्धि

मूंगा धारण करने वाले लोग वाद-विवाद, शास्त्रार्थ में कभी नहीं हारते। उनका मनोबल बहुत ऊंचा हो जाता है।

भौतिक सुखों में वृद्धि

मूंगा धारण करने वाले जातक को धन, भूमि, संपत्ति, वाहन इत्यादि का लाभ भी मिलता है, जिसके परिणामस्वरूप उसके जीवन में भौतिक सुखों में वृद्धि होने लगती है।

दैवी कृपा की प्राप्ति

मूंगा धारण करने वाले जातक को दैवीय कृपा भी प्राप्त हो जाती है जिसके फलस्वरूप उसके शत्रुओं का स्वत: नाश हो जाता है। 

नेतृत्व क्षमता में वृद्धि

मूंगा धारण करने वाले जातकों में नेतृत्व करने की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होने लगती है, जिसके परिणामस्वरूप जातक राजनीति में सक्रिय भाग लेकर उच्च पद प्राप्त करता है। 

आध्यात्मिक अभिरुचि में वृद्धि

मूंगा धारण करने वाले जातक की आध्यात्मिक रुचि में वृद्धि होती है जिससे शनै: शनै: उसका भाग्योदय होने लगता है।

गुप्त विद्याओं की प्राप्ति

मूंगा धारण करने से जातक को गुप्त विद्याओं की प्राप्ति स्वत: ही होने लगती है और उसकी रुचि इस ओर बढ़ती जाती है, जिसके फलस्वरूप वह उच्च कोटि का साधक भी बन सकता है। 

महत्त्वाकांक्षा में वृद्धि

मूंगा धारण करने वाले जातक की महत्त्वाकांक्षाएं बढ़ जाती हैं जिनके फलस्वरूप वह जीवन में ऊंचे लक्ष्यों को प्राप्त करता है। विशेष: यदि जन्मपत्री में मंगल की स्थिति शुभ हो तो मंगल की शुभता बढ़ाने हेतु मूंगा धारण करने पर जातक को उपरोक्त लाभ संभावित है।

मूंगा द्वारा रोग चिकित्सा

  • वर्तमान समय में छोटी-सी चोट अथवा घाव होने पर तुरंत ही टिटनेस का टीका लगाया जाना आवश्यक माना गया है। प्राचीन काल में इस प्रकार की स्थिति में उस चोट अथवा घाव पर मूंगा को चार-पांच बार फेर देने मात्र से घाव सड़ता नहीं था और न ही टिटनेस होने का भय रहता था इसलिए शुद्घ मूंगा का ही प्रयोग किया जाता था।
  • किसी भी प्रकार के रक्त-विकार की स्थिति में मूंगा की भस्म का सेवन करने से आशातीत लाभ प्राप्त होता है। यह भस्म बाजार में आसानी से उपलब्ध होता है।
  • पीलिया एक घातक रोग है। इसके उपचार में मूंगा भस्म का प्रयोग लाभदायक होता है।
  • नपुंसकता की स्थिति में मूंगा का भस्म का सेवन अत्यंत चमत्कारी और रामबाण औषधि माना गया है।
  • स्मरणशक्ति कमजोर हो अथवा स्मरण शक्ति का विकास करना हो तो मूंगा के धोए जल का प्रात:काल खाली पेट नित्य सेवन करने से शीघ्र लाभ मिलता है।
  • अतिसार होने पर भी मूंगा का सेवन लाभकारी माना जाता है।
  • रोगग्रस्त व्यक्ति के सिरहाने मूंगा रखने से रोग के कीटाणुओं की रश्मियां नष्ट होने लगती हैं और रोगी को आराम मिलता है।
  • शरीरिक दुर्बलता की स्थिति में मूंगा का सेवन अत्यंत लाभदायक होता है।
  • हर्निया रोग में भी मूंगा लाभ देता है।
  • रक्त प्रवाह को सुचारू करने में भी मूंगा का सेवन उत्तम माना गया है।
  • लकवे की बीमारी में मूंगा की भस्म लाभकारी मानी गई है।
  • संग्रहणी में भी मूंगा का सेवन श्रेष्ठ माना गया है।
  • प्रात:काल सूर्य की रश्मियों को मूंगा में देखने से चेहरे की आभा में निखार आता है।

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