Summary : राजस्थान का वो जुरासिक पार्क
अरावली पर्वतमाला उस दौर की मूक गवाह है, जब धरती पर डायनासोर जैसे प्राचीन जीव विचरण करते थे।
Dinosaurs in Aravalli Rajasthan: जब हम राजस्थान का नाम लेते हैं तो दिमाग़ में रेगिस्तान, किले और ऊँट आ जाते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यही राजस्थान कभी घने जंगलों, नदियों और विशाल जीवों का घर था। अरावली पर्वतमाला उस दौर की मूक गवाह है, जब धरती पर डायनासोर जैसे प्राचीन जीव विचरण करते थे। करोड़ों साल पुरानी चट्टानों, जीवाश्मों और भूगर्भीय संरचनाओं में आज भी उस आदिम संसार की झलक छिपी हुई है।
धरती के सबसे पुराने पहाड़ों में से एक

अरावली पर्वतमाला दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रेणियों में गिनी जाती है। वैज्ञानिक मानते हैं कि इसकी उम्र लगभग 150 से 250 करोड़ वर्ष के बीच है। यह वह समय था जब धरती पर जीवन प्रारंभिक अवस्था में था और आगे चलकर डायनासोर जैसे विशाल जीव अस्तित्व में आए। अरावली उस दौर से आज तक खड़ी है, इसलिए इसे धरती का जीता-जागता इतिहास भी कहा जाता है और इसके संरक्षण पर गम्भीरता से ध्यान देने की बात उठती है।
डायनासोर युग और अरावली का संबंध
डायनासोर मुख्य रूप से मेसोज़ोइक युग (करीब 25 से 6.5 करोड़ वर्ष पहले) में पाए जाते थे। उस समय अरावली क्षेत्र आज जैसा सूखा नहीं था बल्कि यहाँ घने जंगल, झीलें और नदियाँ थीं। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि राजस्थान के कई हिस्सों में पाए गए जीवाश्म इस बात की ओर इशारा करते हैं कि यह इलाका बड़े सरीसृपों और प्राचीन जीवों के लिए अनुकूल था। जिसकी वजह से तरह तरह के क़यास लगाए जाते और शोध होते रहते हैं।
जीवाश्म और पत्थरों में छिपी कहानी

अरावली क्षेत्र में मिलने वाली चट्टानों में समुद्री जीवों, शैवाल और आदिम जीवन के अवशेष पाए गए हैं। हालाँकि डायनासोर के पूरे कंकाल कम मिले हैं लेकिन भूगर्भीय प्रमाण बताते हैं कि यह इलाका उनके समय में सक्रिय पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा था। पत्थरों की परतें, खनिज संरचनाएँ और जीवाश्म उस जुरासिक पार्क जैसी दुनिया की कहानी कहते हैं। इसलिए इस हिस्से को तरह तरह के उपमान दिए जाते हैं।
रेगिस्तान कैसे बना हरा-भरा इलाका
समय के साथ पृथ्वी की जलवायु बदली, नदियाँ सूखीं और जंगल रेगिस्तान में बदल गए। अरावली ने इस बदलाव को अपनी चट्टानों में दर्ज कर लिया। कभी जो इलाका जीवन से भरा था, वही आज शुष्क और कठोर दिखाई देता है। यही कारण है कि अरावली को समझना मतलब धरती के जलवायु परिवर्तन के इतिहास को समझना है। इस जगह पर हरियाली का होना कहीं ना कहीं राजस्थान की रेत को चुनौती देता जान पड़ता है।
संरक्षण और चेतावनी

आज अरावली केवल पहाड़ नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन की रीढ़ है। यह दिल्ली–एनसीआर और राजस्थान को रेगिस्तान बनने से बचाती है। लेकिन खनन और अंधाधुंध विकास इसे लगातार कमजोर कर रहे हैं। अगर अरावली खत्म हुई, तो यह केवल पहाड़ों का नुकसान नहीं होगा, बल्कि करोड़ों साल पुराने प्राकृतिक इतिहास का अंत होगा।
अरावली हमें याद दिलाती है कि धरती का हर पत्थर एक कहानी है। यह राजस्थान का वह जुरासिक पार्क है, जहाँ डायनासोर भले न दिखें, लेकिन उनके समय की साँसें आज भी इन चट्टानों में कैद हैं। यह आज भी अपने बीते समय की कहानी कहती हैं।
