16 दिसंबर 2012 की उस रात को हुए निर्भयाकांड ने देश को झकझोर के रख दिया। इस जघन्य अपराध के चारों दोषियों की फांसी की सजा सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी है। 5 मई को फैसला सुनाते समय कोर्ट ने कहा कि  “निर्भयाकांड सदमे की सुनामी है। जिस बर्बरता के साथ अपराध हुआ उसे माफ नहीं किया जा सकता।” इस फैसले के बाद कोर्ट रूम तालियों से गूंज उठा। 
 
आपको बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्ली में 6 आरोपियों ने चलती बस में निर्भया के साथ गैंगरेप किया था और सड़क पर फेंक कर मारने की भी कोशिश की थी। जिसमें इलाज के दौरान पीड़िता की मौत हो गई थी। पकड़े गए  6 आरोपियों में से एक ने जेल में खुदखुशी कर ली और एक नाबालिग आरोपी को तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेजा गया। लोअर कोर्ट ने 9 महीने में ही फैसला सुना दिया था। लेकिन चारों दोषियों ने फैसले के खिलाफ पहले दिल्ली हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी जिसे खारिज कर दिया गया।
 
 
कब क्या कैसे हुआ? 
 
 
 

 

कोर्ट ने कहा, “घटना को बर्बर और बेहद क्रूर तरीके से अंजाम दिया गया। फैसले में रहम की कोई गुंजाइश नहीं है।”
 
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर निर्भया की मां ने कहा है कि ”कोर्ट के फैसले से आज खुशी मिली है। ये फैसला सिर्फ हमारा नहीं पूरे समाज का आया है। ये हर बेटी को न्याय मिला है।”
 
निर्भया के पिता ने कहा है कि ” यह मेरे परिवार की जीत है, मैं फैसले से बहुत खुश हूं।”
 
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा: “ये देश की पूरी निर्भयाओं की जीत है। सुप्रीम कोर्ट ने सब निर्भयाओं को शक्ति प्रदान की है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला बताता है कि अगर किसी महिला के साथ गलत हुआ तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।”
 
 
 
 
 
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