रोज की तरह पापा बैठे थे, मैंने आंखें मीचे-मीचे पापा से कहा चप्पल दो ना, जब उन्होंने नहीं दी तब मैंने झुककर उनके पांवों से निकाल ली।
बाहर आंगन में आई तो देखा पापा वहां खड़े हैं, तब वह कौन था? सोच ही रही थी अंदर से भइया चीखता हुआ आंगन में आया और बोला ‘पागल हो गई है क्या, मेरे ऑफिस के एक बुजुर्गवार आए हैं, यह उन्हीं के पांवों से जबरदस्ती चप्पल निकाल लाई।Ó मुझे नींद में कुछ नहीं दिखा, मैंने इतनी बड़ी गलती कर दी। आज भी सोचती हूं, तो चेहरा शर्म से लाल हो जाता है।
2- वो शादी का पहला दिन
बात मेरी शादी के अगले सुबह की है। विदाई के बाद बारातियों के ठहरने होटल बुक किया गया था क्योंकि मेरी बारात मेरठ से आई थी और ट्रेन रात 9 बजे की थी। रात भर शादी की रस्मों और भारी भरकम लहंगे और ज्वैलरी के कारण मैं काफी थक चुकी थी। मैं जैसे ही होटल के कमरे में पहुंची वहां कई सारे लोग मौजूद थे। मैं उन्हें देखकर काफी शरमा रही थी। लेकिन सभी को पता था कि मैं और मेरे पति काफी थके हुए हैं इसलिए हमारी कंडीशन को समझते हुए कमरे से बाहर चले गए ताकि हम दोनों थोड़ी देर सो सकें। सबके जाते ही मेरे पति ने मुझसे कहा कि लहंगा चेंज कर के कोई हल्की साड़ी पहन लो। खैर उनके कहने से पहले मेरा भी यही मन कर रहा था। लेकिन दिक्कत इस बात की थी कि मैं बाथरूम में जाकर चेंज नहीं कर सकती थी और रूम में उनके सामने चेंज करने में मुझे शरम आ रही थी। खैर उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं आप बिना किसी दिक्कत के आराम से चेंज कर लो। लेकिन तभी मेरी चुंनरी में लगा पिन मुझसे खुल नहीं रहा था। मैं बार-बार कोशिश कर रही थी, लेकिन नहीं खुल रहा था मेरे पति बेड पर बैठ कर देख रहे थे। फिर वो मेरे पास आए और मेरी मदद करने लगे। जैसे ही उनका हाथ मेरे शरीर पर लगा मानों कोई बिजली सी मेरे शरीर में दौड़ गई। वो पहला मौका था जब मैं शरम से लाल हुई।
3- वो छोटी सी लव बाईट
बात  शादी के कुछ दिन बाद की है मैं सुबह तैयार होकर जब अपने कमरे से निकल कर किचन में खाना बनाने गई और जल्दी से सारे काम कर रही थी, तभी मेरी सासू मां ने मेरी गर्दन पर लव बाईट देख लिया। वो समझ नहीं पाईं ये क्या है और मुझसे पूछने लगीं कि अरे ये चोट कैसे लग गई या फिर शायद किसी कीड़े ने काट लिया। मेरी जेठानी भी वहीं खड़ी सासू मां की बात सुन रही थीं और उन्होंने हंसते हुए मुझसे बोला कि हां ये किसी बड़े कीड़े ने ही काटा है। उनकी ये बात सुन कर मैं अपनी हंसी रोक नहीं पाई और शर्म से लाल होकर तेजी से अपने कमरे में भाग गई।
शिखा तिवारी, लखनऊ
रोज की तरह पापा बैठे थे, मैंने आंखें मीचे-मीचे पापा से कहा चप्पल दो ना, जब उन्होंने नहीं दी तब मैंने झुककर उनके पांवों से निकाल ली।
बाहर आंगन में आई तो देखा पापा वहां खड़े हैं, तब वह कौन था? सोच ही रही थी अंदर से भइया चीखता हुआ आंगन में आया और बोला ‘पागल हो गई है क्या, मेरे ऑफिस के एक बुजुर्गवार आए हैं, यह उन्हीं के पांवों से जबरदस्ती चप्पल निकाल लाई।Ó मुझे नींद में कुछ नहीं दिखा, मैंने इतनी बड़ी गलती कर दी। आज भी सोचती हूं, तो चेहरा शर्म से लाल हो जाता है।