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आज की कामकाजी महिलाएं

 

सदियों से सेक्स कौतुक और दिलचस्पी का विषय रहा है, पर इस मामले में महिलाओं की बदलती अवधारणा ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है। पहले जहां शर्म, झिझक, संकोच और डर के कारण महिलाएं अपने ज़ज्बातों को दबा लेती थीं और अपनी शादीशुदा जिंदगी को एक कर्तव्य समझ कर निभाती रहती थीं, वहीं अब वह अपने ज़ज्बातों का बिना किसी की परवाह किए खुलकर प्रदर्शन करती हैं। सिर्फ इतना ही नहीं अपने अंतर्मन और यौनाकांक्षाओं के चलते दूसरे का सहारा लेने से भी पीछे नहीं हटती, बल्कि हाथ थामने के लिए आगे खड़ी रहती हैं। इस बारे में इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शीतल कहती हैं कि मेरे पास कई ऐसी औरतें आती हैं, जो अपने यौन जीवन को बेहतर बनाने के लिए चिकित्सकीय सहायता चाहती हैं, क्योंकि वो अपनी सेक्सुअल लाइफ से खुश नहीं होती हैं। कई तो खुलकर बताती हैं कि अगर वो अपने पति से संतुष्ट नहीं हो पाती तो उनको लगता है कि वो अपनी संतुष्टि कहीं और पूरी कर लें। ऐसी बातें सुनकर लगता है कि वाकई आज महिलाओं की तस्वीर बदल रही है। आज वो अपने चरम सुख की मांग उठाने लगी है, जो एक क्रांतिकारी बदलाव है।

सेक्स और भारतीय नारी
सेक्स के प्रति भारतीय महिलाओं का नजरिया तेजी से बदल रहा हैं। पुरानी वर्जनाएं तोड़ती हुई महिलाएं बेधड़क सेक्स के बारे में बात करती हैं। आज उनके लिए यौन संबंध केवल विवाह के बाद की क्रिया नहीं रह गई, बल्कि यौन संबंध उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हो गया है। आज वो शादी के बाद ही नहीं शादी के पहले भी इस सुख का आनंद लेना चाहती हैं। इस बारे में मनोचिकित्सक जितेंद्र नागपाल कहते हैं, ‘आज स्त्रियों के विचार बहुत बदल गए हैं। वे अपनी इच्छाओं का सामाजिक दबाव के कारण दमन नहीं करती बल्कि बिना किसी संकोच के सेक्स की पहल करती हैं। यह बात सही है कि बदलती जीवनशैली में नारी का जो उदय हो रहा है, वह बंधनों को जोडऩे वाला नहीं बल्कि तोडऩे वाला है, इसलिए यौन संबंधों का इस्तेमाल चाय की चुस्की की तरह सहज हो गया है। जिस देश में पूजनीय राम की पत्नी सीता को भी अग्नि परीक्षा देनी पड़ी थी, वहीं आज की स्त्री किसी भी परीक्षा में विश्वास
नहीं करती।

सेक्स फंतासियों में स्त्रियों की राय

  • वे यौन स्वभाव को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती हैं- 42 %
  • वे यौन स्वभाव को विकृत करती हैं- 18 %
  • इनमें से कोई भी नहीं- 35 %
  • बाकी को पता नहीं/कह नहीं सकते- 5 %

पहले जहां महिलाओं की अपने वैवाहिक जीवन को समाप्त करने की हिम्मत नहीं हुआ करती थी, वहीं आज महिलाएं कामसुख की तलाश में अपनों से ही किनारा करने लगी हैं। मतलब यौन संबंधों की भूख सामाजिक और परिवारिक रिश्तों की लक्ष्मण रेखा पर भारी पड़ रही है। इस बारे में मैरिज काउंसलर अनु गोयल कहती हैं, ‘आज के दौर में संबंधों के पहलू बदल गए हैं। कल तक जहां सिर्फ पुरुष को ही सेक्स में भरपूर आनंद उठाने व पराई नारी से संबंध बनाने का अधिकार था, वहीं आज की औरतें सेक्स की पूर्ति के लिए पर पुरुष के कंधे पर सर रखने में संकोच नहीं करती हैं।

आखिर क्यूँ बना दिल का मामला जिस्म का
सेक्स को लेकर आाखिर महिलाओं की सोच में बदलाव की वजह क्या है? इस बारे में समाजशास्त्री कहते हैं कि आज की नारी की सोच में काफी बदलाव आया है। आज की स्त्रियां आत्मनिर्भर हो गई हैं और वो अपने फैसले लेने और अपनी बात को कहने में पीछे नहीं है, फिर चाहे वो सेक्स ही क्यूँ ना हो। अपनी शारीरिक जरूरतों के प्रति बढ़ी जागरूकता और आसपास होने वाले सामाजिक बदलावों ने भी महिलाओं को सेक्स के बारे में खुलकर बात करने की हिम्मत बंधाई है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ सेक्स और आधुनिकता के चलते महिलाएं ऐसे रिश्ते बनाती हैं बल्कि इसके पीछे और भी कई कारण हैं। मनोचिकित्सक डॉक्टर जितेंद्र नागपाल कहते हैं कि जब पुरुष स्त्री की जरूरतों को नहीं समझता और उसे नजरअंदाज करता है तब महिलाएं कुछ ऐसा कदम उठाती हैं, जिसका भुगतान पूरे परिवार को करना पड़ता है। महिलाओं का सेक्स के प्रति सकारात्मक रुझान इतना प्रबल है कि उनको अगर लगता है कि उनकी जरूरतें पूर्ण नहीं हो पा रही हैं तो वह अपना हाथ दूसरे के हाथ में देने में जरा भी नहीं झिझकती। इन जरूरतों का मतलब सिर्फ सेक्स नहीं होता, बल्कि आर्थिक, मानसिक व भावनात्मक परिस्थितियां ऐसे संबंध बनाने के लिए विवश करती हैं। नागपाल कहते हैं कि कारण कोई एक नहीं बल्कि कई हैं, जिससे स्त्रियां दूसरे की तरफ आकर्षित होती हैं। जैसे आज की कामकाजी महिलाएं अब पहले से ज्यादा ट्रैवल करती हैं और देर रात तक ऑफिस में काम करती हैं, जिससे उनका पुरुषों से मिलना-जुलना ज्यादा होता है और जो कमी उन्हें अपने पार्टनर में नजर आती है वो उनको वहां पूरी होती देखती हैं। परिणाम यह होता है कि वह अपने कलीग के बहुत नजदीक चली जाती हैं।अपने वैवाहिक जीवन की बोरियत से निकलने की पहल आज स्त्री सबसे पहले करती है। अगर वो पूरी नहीं होती है तो वह ऐसे रिश्तों को आगे बढ़ाना जरूरी नहीं समझती।

सेक्स को बढ़ावा देता सोशल मीडिया
आनंद की प्राप्ति और स्वच्छंद रूप से जिंदगी जीने की चाह ने महिलाओं को इतना स्वतंत्र कर दिया है कि जन्म-जन्मांतर का साथ चंद सेकेंड में चकनाचूर हो जाता है। आज की स्त्री यौन सुख के पाश में इतने गहरे फंस चुकी है कि गलत सही सब उसको बराबर लगता है। महिलाओं की इस सोच को बढ़ावा देने में सोशल मीडिया का बहुत बड़ा हाथ है, क्योंकि इसमें सेक्स खुलेआम चलता है। हमारे प्राइम टाइम पर प्रसारित होने वाले ज्यादातर सीरियलों में भी संबंधों को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया जाता है। कई बार तो महिलाएं इसे खुले तौर पर स्वीकार भी करती हैं। समाजशास्त्री कहते हैं कि पश्चिम के बढ़ते असर और इंटरनेंट के बढ़ते प्रचलन ने महिलाओं को उकसाया है और मुखरता को बढ़ाया है। यह एक ऐसा आवेग बन गया है जो रुकने का नाम नहीं ले रहा। सोशल नेटवक साइट्स पर महिलाओं की दमदार उपस्थिति ने उनमें सजगता के साथ मुखरता को भी प्रोत्साहित किया है। इंटरनेट की ही बदौलत आज वह अपनी बात कहने के लिए किसी की मोहताज नहीं है। यहां तक कि सेक्स संबंधी जानकारी बढ़ाने के लिए उसे किसी असामायिक कहे जाने वाले साहित्य को छुपाकर पढऩे की भी जरूरत नहीं है। एन्डोलौजी ग्रुप के निदेशक डॉक्टर अनुप धीर कहते हैं, आजकल सोशल मीडिया लोगों के दिलोदिमाग में कुछ इस कदर बैठ गया है कि उनको दुनिया की खबर ही नहीं हैं। घर पर आने के बाद भी लोग फोन से चिपके रहते हैं, लोग ना चाहते हुए भी एक-दूसरे दूर होते जा रहे हैं। इसका असर आपसी रिश्तों पर नजर आता है, क्योंकि उनकी सेक्स लाइफ खोखली होती जा रही है।

स्त्रियों में सेक्स फैंटेसी

  • स्त्रियों की फैंटेसी में पुरुष की कामुक छवि से ज्यादा भावनाओं से जुड़ाव अधिक होता है।
  • अपनी सेक्सुअल फैंटेसी में स्त्रियां अपने साथी को उसकी भावनाओं की कद्र करते हुए उसे आलिंगन करते हुए महसूस करती है और इस तरह की कल्पना उसके शरीर को गुदगुदा जाती है।
  • स्त्री की फैंटेसी में अपने साथी के शरीर की खुशबू, उसकी शरारत भरी बातें, उसका चूमना ये सारी बातें उसे अधिक सुख पहुंचाती है।

बेशक, सोशल मीडिया बहुत ही उपयोगी है लेकिन जब यह फेसबुक स्टेटस, व्हाइटस ऐप डीपी और इन्स्टाग्राम फोटो अपलोड से दो कदम आगे बढ़कर आपके बेडरूम तक पहुंच जाए तो इसे रोकना बहुत जरूरी हो जाता है। सत्य है कि आज की व्यस्त जिंदगी में समाज और स्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में स्त्री का बदलना स्वाभाविक है। यह बदलाव का ही तो नतीजा है जो आजकल की महिलाएं सेक्स को लेकर जागरूक है और उन्होंने शर्म और झिझक का चोला उतार कर रख दिया है। महिलाएं समझ गई हैं कि सेक्स सिर्फ पुरुष की नहीं, बल्कि उनकी भी जरूरत है जिसे स्वीकारने में उन्हें कोई हिचकिचाहट नहीं है। संक्षेप में कहें तो आज की स्त्री किसी भी चीज से समझौता नहीं करना चाहती, बल्कि खुद को मिले हर अधिकार को भरपूर जीना चाहती है। इनमें से ही एक है सेक्स, जिसका वो भरपूर आनंद लेना चाहती है। यानी अब वो दिन अब लद गए जब पति अपनी इच्छा से के अनुसार उसे बुलाता और अपनी इच्छा पूरी करके सो जाता था।