आज की बीमारी का सबसे बड़ा कारण उनकी जीवनशैली और खान-पान है। आजकल शारीरिक गतिविधियां बहुत कम होती है। काम में व्यस्त होने के कारण हमारा खान-पान पर अधिक ध्यान नहीं रहता है। , वर्तमान के कई शोधों में यह बात सामने आई है कि फास्ट फूड एवं तैलीय भोजन तथा आरामपसंद जीवनशैली के कारण न सिर्फ लोगों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है बल्कि मोटापे से लोगों को कई प्रकार की बीमारियां भी हो रही है। वास्तव में हम जो खाना खाते हैं उससे ही हमारा स्वास्थ्य बनता और बिगड़ता है लेकिन असलियत में खानपान और मोटापे या इसके इलाज को लेकर लोगों में काफी भ्रम है। जेपी हॉस्पिटल के जी.आई. एवं हेपेटोपेंक्रिएटिको-पित्त सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कपूर ने मोटापा से जुड़े फैक्ट्स और मिथ के बारे में बताया।
मिथ: मोटा होना कोई समस्या की बात नहीं है।
फैक्ट्स:
मोटापा दुनिया भर में एक आम समस्या बनता जा रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। सबसे ज्यादा मोटे और ज्यादा वजन वाले लोगों की लिस्ट में भारत का नाम अमरीका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर आता है। मोटापे के कारण लोगों को कई तरह की बीमारियों हो रही हैं। दिल्ली के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में से एक तिहाई बच्चे या तो मोटे हैं या ओवरवेट हैं। ज्यादा वजन वाला बच्चा ज्यादातर ज्यादा वजन वाला वयस्क बनता है और इससे अनेक दूसरी समस्याओं जैसे- डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हर्ट अटैक, डिप्रेशन का जन्म होता है। महत्वपूर्ण यह है कि सही समय पर किसी विशेषज्ञ की सलाह ली जाए, ताकि ऐसी समस्याओं को प्राथमिक अवस्था में ही रोका जा सके और जीवन स्वस्थ हो सके।
मिथ: सिर्फ अपनी डाइट बदल देने से वजन कम हो जाएगा?
फैक्ट्स:
वजन कम करना कभी भी आसान नहीं होता। डाइट बदलने के साथ-साथ कसरत करना भी बेहद जरूरी होता है। इनमें से कोई भी एक काम करना अधिक प्रभावकारी नहीं होगा। व्यायाम करने का कोई शॉर्टकट नहीं होता।
वेट लॉस सर्जरी संबंधी मिथक और तथ्य
मोटापे के ईलाज के लिए अनेक तरह की मेडिकल और सर्जिकल ट्रीटमेंट्स उपलब्ध हैं। ऐसे में किसी को भी मोटापे की वजह से कष्ट सहने की जरूरत नहीं। लोगों के बीच वेट लॉस के सर्जिकल ट्रीटमेंट्स के बारे में भी अनेक गलत धारणाएं हैं। जेपी हॉस्पिटल के जी.आई. एवं हेपेटो-पेंक्रिएटिको-पित्त सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कपूर ने लोगों की इन्हीं भ्रान्तियों को दूर किया।
मिथ: बेरियाट्रिक सर्जरी लिपोसक्शन की तरह कॉस्मेटिक सर्जरी होती है।
फैक्ट्स
बेरियाट्रिक सर्जरी लिपोसक्शन की तरह बॉडी को खूबसूरत बनाने वाली कॉस्मेटिक सर्जरी नहीं बल्कि मेटाबॉलिक सर्जरी होती है। यह लेप्रोस्कोपिक विधि से की जाती है। इसमें या तो पेट या अमाशय को काट कर छोटा कर दिया जाता है या फिर भोजन का रास्ता बदल दिया जाता है। इससे 80 प्रतिशत तक वजन कम हो सकता है और डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, स्लीप एप्निया, जोड़ों का दर्द, हाई कोलेस्टेरॉल, जी.ई.आर.डी., बांझपन, फैटी लीवर जैसी वजन से जुड़ी ज्यादातर समस्याओं का ईलाज हो जाता है, साथ ही इससे हर्ट अटैक, स्ट्रोक जैसी समस्याओं और अनेक तरह के कैंसर से भी बचाव हो जाता है।
मिथ: वेट लॉस सर्जरी बेहद संवेदनशील मामलों में ही की जाती है।
फैक्ट्स
वेट लॉस सर्जरी की सलाह 37.5 से अधिक बी.एम.आई. वाले लोगों को दी जाती है। इसी तरह 32.5 बी.एम.आई. वाले जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी वजन संबंधी समस्या हो, उनके लिए भी इसकी सलाह दी जाती है। बेहतर यही होगा कि इसे तभी करा लिया जाए जब आपको अधिक वजन वाली दूसरी मेडिकल समस्याएं न हों। इसे समय पर कराने से आपको बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।
मिथ: बेरियाट्रिक सर्जरी खतरनाक है?
फैक्ट्स
जेपी हॉस्पिटल के डॉ. राजेश कपूर ने कहा कि बेरियाट्रिक सर्जरी काफी सरल है जैसे कि गॉलब्लैडर सर्जरी। इस सर्जरी से पहले पूरी जांच-परख की जाती है। आजकल तो इसे लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन) विधि से किया जाता है। इस विधि द्वारा रोगी को कम से कम चीरा लगाया जाता है जिससे ऑपरेशन के बाद उसे तेजी से राहत मिलती है और वह अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में जल्द वापस जा सकता है। मरीज सर्जरी के दो हफ्तों बाद ही काफी एक्टिव महसूस करता है और कसरत भी कर सकता है।
इन्हें भी पढ़ें-
जेपी हॉस्पिटल के चिकित्सक की सलाहः संयमित भोजन से स्वस्थ जीवन डॉ. राजेश कपूर, निदेशक, जी.आई. एवं हिपेटो-पेंक्रिएटिको-बिलयरी सर्जरी विभाग, जेपी हॉस्पिटल, नोएडागांवों में रहने वाले लोगों की अपेक्षा शहरी निवासी अधिक बीमार होते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण उनकी जीवनशैली और खान-पान है। आमतौर पर शहरी लोगों की दिनचर्या नियमित होती है। इनकी शारीरिक गतिविधियां बहुत कम होती है। काम में व्यस्त होने के कारण उनका खान-पान पर अधिक ध्यान नहीं रहता है। खाने में फास्ट फूड की अधिकता और शिथिलता भरा जीवन जीने से धीरे-धीरे शरीर कमजोर होने लगता है, और कमजोर शरीर कई प्रकार की बीमारियों को आमंत्रित करता है। वर्तमान के कई शोधों में यह बात सामने आई है कि फास्ट फूड एवं तैलीय भोजन तथा आरामपसंद जीवनशैली के कारण न सिर्फ लोगों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है बल्कि मोटापे से लोगों को कई प्रकार की बीमारियां भी हो रही है। वास्तव में हम जो खाना खाते हैं उससे ही हमारा स्वास्थ्य बनता और बिगड़ता है लेकिन असलियत में खानपान और मोटापे या इसके ईलाज को लेकर लोगों में काफी भ्रम है। विश्व मोटापा दिवस पर जेपी हॉस्पिटल के जी.आई. एवं हेपेटो-पेंक्रिएटिको-पित्त सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कपूर ने मोटापा, इससे जुड़ी बीमारियों एवं ईलाज के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण बातें लोगों को बताई।1.मोटापे को लेकर मिथक एवं तथ्य1.मिथक: मोटा होना कोई समस्या की बात नहीं है।तथ्य: मोटापा दुनिया भर में एक आम समस्या बनता जा रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। सबसे ज्यादा मोटे और ज्यादा वजन वाले लोगों की लिस्ट में भारत कानाम अमरीका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर आता है। मोटापे के कारण लोगों को कई तरह की बीमारियों हो रही हैं। दिल्ली के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में से एकतिहाई बच्चे या तो मोटे हैं या ओवरवेट हैं। ज्यादा वजन वाला बच्चा ज्यादातर ज्यादा वजन वाला वयस्क बनता है और इससे अनेक दूसरी समस्याओं जैसे- डायबिटीज,हाई ब्लड प्रेशर, हर्ट अटैक, डिप्रेशन का जन्म होता है। महत्वपूर्ण यह है कि सही समय पर किसी विशेषज्ञ की सलाह ली जाए, ताकि ऐसी समस्याओं को प्राथमिक अवस्था में ही रोका जा सके और जीवन स्वस्थ हो सके।2. मिथक: सिर्फ अपनी डाइट बदल देने से वजन कम हो जाएगा? तथ्य: वजन कम करना कभी भी आसान नहीं होता। डाइट बदलने के साथ–साथ कसरत करना भी बेहद जरूरी होता है। इनमें से कोई भी एक काम करना अधिक प्रभावकारी नहीं होगा। व्यायाम करने का कोई शॉर्टकट नहीं होता।वेट लॉस सर्जरी संबंधी मिथक और तथ्यमोटापे के ईलाज के लिए अनेक तरह की मेडिकल और सर्जिकल ट्रीटमेंट्स उपलब्ध हैं। ऐसे में किसी को भी मोटापे की वजह से कष्ट सहने की जरूरत नहीं। लोगों केबीच वेट लॉस के सर्जिकल ट्रीटमेंट्स के बारे में भी अनेक गलत धारणाएं हैं। जेपी हॉस्पिटल के जी.आई. एवं हेपेटो-पेंक्रिएटिको-पित्त सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कपूर ने लोगों की इन्हीं भ्रान्तियों को दूर किया। 1.मिथक: बेरियाट्रिक सर्जरी लिपोसक्शन की तरह कॉस्मेटिक सर्जरी होती है।
तथ्य: बेरियाट्रिक सर्जरी लिपोसक्शन की तरह बॉडी को खूबसूरत बनाने वाली कॉस्मेटिक सर्जरी नहीं बल्कि मेटाबॉलिक सर्जरी होती है। यह लेप्रोस्कोपिक विधि से कीजाती है। इसमें या तो पेट या अमाशय को काट कर छोटा कर दिया जाता है या फिर भोजन का रास्ता बदल दिया जाता है। इससे 80 प्रतिशत तक वजन कम होसकता है और डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, स्लीप एप्निया, जोड़ों का दर्द, हाई कोलेस्टेरॉल, जी.ई.आर.डी., बांझपन, फैटी लीवर जैसी वजन से जुड़ी ज्यादातर समस्याओं काईलाज हो जाता है, साथ ही इससे हर्ट अटैक, स्ट्रोक जैसी समस्याओं और अनेक तरह के कैंसर से भी बचाव हो जाता है।2.मिथक: वेट लॉस सर्जरी बेहद संवेदनशील मामलों में ही की जाती है।तथ्य: वेट लॉस सर्जरी की सलाह 37.5 से अधिक बी.एम.आई. वाले लोगों को दी जाती है। इसी तरह 32.5 बी.एम.आई. वाले जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसीवजन संबंधी समस्या हो, उनके लिए भी इसकी सलाह दी जाती है। बेहतर यही होगा कि इसे तभी करा लिया जाए जब आपको अधिक वजन वाली दूसरी मेडिकलसमस्याएं न हों। इसे समय पर कराने से आपको बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।3.मिथक: बेरियाट्रिक सर्जरी खतरनाक है?तथ्य: जेपी हॉस्पिटल के डॉ. राजेश कपूर ने कहा कि बेरियाट्रिक सर्जरी काफी सरल है जैसे कि गॉलब्लैडर सर्जरी। इस सर्जरी से पहले पूरी जांच-परख की जाती है। आजकल तो इसे लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन) विधि से किया जाता है। इस विधि द्वारा रोगी को कम से कम चीरा लगाया जाता है जिससे ऑपरेशन के बाद उसे तेजी से राहतमिलती है और वह अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में जल्द वापस जा सकता है। मरीज सर्जरी के दो हफ्तों बाद ही काफी एक्टिव महसूस करता है और कसरत भी करसकता है।4.मिथक: इससे कुछ ही समय के लिए वेट लॉस होता है।तथ्य: अध्ययन बताते हैं कि ज्यादातर लोग इस तरह से हुए वेट लॉस को बरकरार रखते