वैसे तो मक्के, चीज, नमक ,हर्बस, मसाले, चाय आदि में एल्मुनियम कुछ मात्रा में मौजूद होता है मगर साथ ही एंटीएसिड और एंटी परस्पिरेंट्स तत्व भी मौजूद होते हैं। इन सभी रूपों में एल्मुनियम का शरीर में प्रवेश पचाने वाला होता है लेकिन जब एलुमिनियम खाने के साथ मिलता है तो हमारा शरीर उसे डाइजेस्ट नहीं कर पाता। जिसकी वजह से सारा एलमुनियम हमारे शरीर के अंगों जैसे लीवर, किडनी, हड्डियों और मस्तिष्क में जमा होने लगता है। अगर एलुमिनियम की मात्रा 1 स्तर के बाद बढ़ती है, तो इससे हमारे शरीर के नर्वस सिस्टम पर बुरा इफ़ेक्ट पड़ता है। इसकी वजह से अल्जाइमर, मेमोरी लॉस, किडनी फेल, अस्थमा व पेट दर्द जैसी प्रॉब्लम्स हो जाती हैं। ऑडी यूनिसेफ के सीईओ कहते हैं जो एलुमिनियम  फॉयल में लपेटे हुए खाने के माध्यम से शरीर में जाता है ,उसकी मात्रा WHO द्वारा सेट की गई मात्रा से ज्यादा है इसलिए एलुमिनियम फ्वॉइल मानव शरीर के लिए नुकसानदायक हैं। 
 
नुकसानदायक क्यों है?
 
एल्युमीनियम एसिडिक फूड के साथ एक रिएक्शन करता है। यह बहुत ज्यादा रिएक्टिव है और भोजन के साथ मिल जाता है। एल्युमीनियम भारी धातु है और हमारा उत्सर्जन तंत्र इस को पचाने और शरीर से बहार निकलने में असमर्थ है। अगर हम इन बर्तनों में बना हुआ खाना कई सालो तक खाते रहते हैं तो ये धातु हमारे शरीर  में समा जाती है। ये अवस्था हमारे शरीर को कई गंभीर बीमारियों में ड़ाल देती है ,जिनके बारे में लोगो को पता नहीं चलता। यह मुख्य रूप से मस्तिष्क पर काम करता है और मानव मस्तिष्क की कोशिकाओं के विकास को रोक देता है। 
मुख्य लक्षण
 
जब आप पेट में दर्द महसूस करते है तो यह एल्यूमीनियम विषाक्तता के कारण हो सकता है।