‘वेलकम टू सज्जनपुर, ‘लव यू मि. कलाकार जैसी फिल्में करने वाली अमृता को दर्शकों और क्रिकेट दोनों से ही सराहना मिली, किंतु उनकी इमेज गर्ल नेक्स्ट डोर वाली ही रही। अपने नये सीरियल को लेकर अमृता बेहद उत्साहित हैं। इस सीरियल की शुरुआत की शूटिंग महाबलेश्वर के पास वाई गांव में हुई है। मराठी परिवेश का यह किरदार अमृता के लिए चुनौतीपूर्ण है। अमृता से हुई मुंबई ब्यूरो चीफ गरिमा चंद्रा की एक मुलाकात।
टेलीविजन पर आने का निर्णय कैसे लिया?
मैंने अपने कैरियर की शुरुआत विज्ञापन फिल्मों से की थी, फिर मुझे मेन स्ट्रीम फिल्मों में काम करने का मौका मिला। मुझे टीवी पर काम करने में कोई एतराज नहीं था, बस एक अच्छे किरदार का इंतजार था, जिसमें नयापन हो। आजकल
टेलीविजन की पहुंच फिल्मों से ज्यादा है। अब तो बड़े बजट, बड़ी स्टारकास्ट की फिल्में, टेलीविजन पर प्रमोशन्स के लिए आती हैं। मेरी भी कई फिल्में टीवी पर बहुत बार आती हैं। डेली सोप में आप रोज अपने दर्शकों के घर पहुंचते हैं।

टीवी डेब्यू के लिए यह शो क्यों चुना?
सबसे पहली बात कि यह एक डेफिनिट स्टोरी है यानी टीआरपी की वजह से कहानी में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। फिर एंड टीवी के क्रिएटिव हेड विकास गुप्ता का कान्सेप्ट है, जिसमें बेहद नयापन है। कुशल जावेरी जैसे निर्देशक हैं। टीवी इंडस्ट्री में निवेदिता वासु को कौन नहीं जानता, सभी फैक्टर्स एक साथ आ गए कि इस प्रोजेक्ट पर इंकार करने की गुंजाइश ही नहीं थी।
आपका किरदार किस तरह का है?
मेरा किरदार कल्याणी गायकवाड मराठा परिवार से है, जो क्लासिकल सिंगर हैं, बहुत सेन्सेटिव लेकिन स्ट्रांग करैक्टर है, बेहद टेलेन्टेड है, साथ ही इस किरदार का ग्राफ मल्टीडायमेन्शनल है, इसमें कल्याणी को सात साल की उम्र से सत्तर
साल तक का दिखाया है। यह सीरियल संगीत पर आधारित है,

आपको स्वयं संगीत से कितना लगाव है?
मुझे संगीत से बहुत लगाव है। खुशनसीब हूं किमैं थोड़ा बहुत गा सकती हूं। बचपन में संगीत सीखा था, 3 साल तक क्लासिकल संगीत की ट्रेनिंग ली थी, किंतु फिर एक्टिंग की वजह से म्यूजिक छूट गया। यह मेरे लिए एक सुनहरा
मौका है अपना शौक पूरा करने का। मैंने शूटिंग शुरू होने से पहले एक महीने की ट्रेनिंग ली, सितार सीखा, बचपन की यादें ताजा हो गईं।
क्या आप अपने अब तक के प्रोफेशनल ग्राफ से संतुष्ट हैं?
मैं एक नॉन फिल्मी बैकग्राउंड से हूं, उसके बावजूद मैंने इस फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई। मुझे दर्शकों ने गर्ल नेक्स्ट डोर की तरह अपनाया और एक ऐसी इमेज बनी कि मैं घरपरिवार के लिए ही फिल्में करूंगी। यहां जो भी इज्जत मिली है वह मैंने स्वयं कमाई है और यह मेरे लिए बेहद मूल्यवान है। इसलिए मैं कह सकती हूं कि मैं अपने काम से संतुष्ट हूं। राजश्री की ‘लव यू मि. कलाकार भले ही फ्लॉप फिल्म रही हो, लेकिन मैं उसे अपना कैरियर की वन ऑफ द बेस्ट परफार्मेंस मानती हूं।
आपको स्वयं किस तरह की फिल्में पसंद हैं?
मेरे ख्याल से 1970 का जो समय था वह बॉलीवुड का अब तक का बेस्ट ईरा था, उस समय का ड्रेसिंग स्टाइल, हेयर स्टाइल, उस समय का म्यूजिक, गाने और उस समय के कलाकार सभी एवरग्रीन और क्लासिक हैं।
आपके ख्याल से सेलिब्रिटी होने के फायदे हैं या नुकसान?
देखिए, सेलिब्रिटी होना तो कॉम्पलीमेंट है। दर्शक आपको पसंद करें, आपसे मिलें, फोटो खिंचाएं, यह तो सभी को अच्छा लगता है, लेकिन आजकल सेलिब्रिटी होना एकदम कमर्शियल हो गया है। आपसे कई तरह की उम्मीदें की जाती हैं, अवार्ड फंक्शन में जाना जरूरी है, डिजाइनर कपड़े पहने ज्वैलरी पहनो, आपको ऊपर से नीचे तक परखा जाता है, आपका हेयर स्टाइल, मेकअप सब परफेक्ट होना चाहिए। कलाकार एक तरह का एडेड प्रेशर है। वॉट इज नेक्स्ट? वॉट इज क्यू? यह हम सबको धीरे-धीरे खा जाएगा, जिंदगी को वीडियो गेम की तरह नहीं जीना है। अपनी पर्सनल प्रोग्रेस को देखना चाहिए, सेलिब्रिटी भी नार्मल इंसान होते हैं।
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