प्रीति जिंटा ने फिल्मी परिवार की ना होते हुए भी अपनी पहली फिल्म दिल से सुपर स्टार शाहरुख खान के साथ की। प्रीति ने सोल्जर,क्या कहना, संघर्ष, वीर जारा और सलाम नमस्ते जैसी फिल्मों में अपनी एक्टिंग की एक अलग छाप छोड़ी है।

नच बलिये शो के लिए जज बनने का फैसला किस तरह किया?
काफी सालों से मेरे पास ऐसे ऑफर्स आ रहे थे लेकिन कभी समय की कमी थी तो कभी शो नहीं पसंद आया।

नच बलिये एक गुड फन डांस शो है जिसमें रियल लाइफ कपल्स हैं, उनकी स्टोरी, उनकी कैमिस्ट्री, इमोशन, रिलेशनशिप, फस्ट्रेशन सब देखने को मिलता है और सबसे बड़ी बात मेरी डेट्स मैच कर गई क्योंकि यह आईपीएल के बीच में शूट हो रहा है।

फिल्म इंडस्ट्री में अनुभव कैसा रहा?
तब और आज की फिल्म इंडस्ट्री में बहुत अंतर है। मैं नॉन फिल्मी बैकग्राउंड से थी, क्रिमिनल सायकोलॉजी पढ़ रही थी और एक्टिंग के बारे में कुछ नहीं जानती थी। मैंने कराटे और जिमनास्टिक किया था किंतु डांस खासकर बालीवुड डांस नहीं आता था।

किसी डांसर या कपल को क्रिटिसाइज करना कैसा लगता है?
किसी को भी क्रिटिसाइज करना बहुत आसान होता है लेकिन मैं किसी को भी नेशनल टीवी पर अपमानित नहीं कर सकती। इंसान को हमेशा अपने आपको दूसरे के जूते में डालकर देखना चाहिए। इंडस्ट्री में एनकरेजमेंट ने ही मुझे आगे बढ़ाया, केवल क्रिटिसाइज करने से कोई आगे नहीं बढ़ सकता, उसे साथ में एनकरेज भी करना पड़ता है। सिर्फ क्रिटिसिज्म से इंसान में निगेटिविटी आ जाती है। खास कर मेरे साथ तो यह होता है कि सिर्फ डांट पड़े तो मैं अपने आपको एक शेल में बंद कर लेती हूं।

आप सही को सही और गलत को गलत बोलने से डरती नहीं हैं? यह हिम्मत आपमें कहां से आई?
आप जैसे बचपन में होते हैं वही जिंदगी भर रहते हैं। मेरे डैड आर्मी में थे और मेरा भाई आर्मी में है। डैड ने हमेशा सिखाया कि अपनी लड़ाई खुद लड़ो। बचपन से ही जिम्मेदारियों का अहसास कराया गया। अगर मेरे साथ कुछ गलत होता है तो मैं उसके खिलाफ आवाज उठाऊंगी। मैं खुद के लिए भी बोलती हूं और दूसरों के लिए भी। मुझसे अन्याय सहन नहीं होता।

किस चीज से एकदम बोर हो चुकी हैं?
ट्रैवलिंग मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है। मेरे पांव में चक्कर है, 11 साल की उम्र से दुनिया घूम रही हूं, शायद पायलट और एयर होस्टेस के बाद मैं ही हूं, जिसने इतना ट्रेवल किया है।

आजकल की रिलेशनशिप के बारे में आप क्या कहेंगी? क्या आप किसी नए रिश्ते में बंधने वाली हैं?
जहां तक रिलेशनशिप की बात है तो कोई भी परफेक्ट नहीं होता है।

सलाम नमस्ते फिल्म में एक डायलॉग था कि अम्बर, ना तुम परफेक्ट हो ना मैं लेकिन इक हम परफेक्ट हैं। मैं अपनी निजी जिंदगी के बारे में बात नहीं करना चाहती।

गृहलक्ष्मी के पाठकों के लिए मैसेज?
सबसे पहले तो कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाएं। लड़की पैदा होने पर खुशी मनाएं, लड़की ही आगे किसी लड़के को जन्म देगी। अपने बेटे और बेटी दोनों को

गुड टच और बैड टच के बारे में बताएं। बेटी और बेटा दोनों को अच्छी बातें सिखाएं। जब बेटी को सिखाते हैं कि गलत लड़कों से बचो तो बेटे को भी गलत काम ना करने की सलाह दें।