स्पोर्ट्स लवर्स के साथ-साथ आज हिन्दी मूवी के दर्शक भी गीता फोगाट के नाम से अनजान नहीं हैं। 
 
टीवी में आने का निर्णय कैसे लिया ?
 मेरे लिए यह एक मौक़ा है जिसे मैं खुद को किसी अलग फ़ील्ड में प्रूफ़ करने के लिए यूज़ कर रही हूं।  मैं “ख़तरों के खिलाड़ी “में भाग लेने जा रही हूं, अभी तक ये बात मैंने किसी को बताई नहीं थी। परिवार के अलावा मैंने किसी से भी इस बारे में डिस्कस नहीं किया है । मुझे लगा यह एक मौक़ा है जानने का कि क्या मुझे किसी चीज़ से डर लगता है ?
 
आपको सबसे स्ट्रॉन्ग कंटेस्टेन्ट माना जा रहा है ?
हां, सबको यही लग रहा है। वैसे मुझे भी लग रहा है क्योंकि मैं तो एक स्पोर्ट्स वाली लड़की हूं । मेरी ट्रेनिंग अलग क़िस्म की हुई है। अब देखना है कि स्पेन में क्या होता है ।
 
टीवी और ग्लैमर की दुनिया कैसी लग रही है ?
सच पूछिए तो यह ग्लैमर और मनोरंजन की दुनिया मेरे लिए नहीं है। मीडिया से मिलना , बार-बार इंटर्व्यू करना, एक ही जैसे सवाल का जवाब देना, फिर शूट के समय रीटेक होना,  फ़ोटो शूट करना, यह सब मुझे थका देता है । मैं बिलकुल कम्फर्टेबल फ़ील नहीं करती लेकिन करना पड़ रहा है। वैसे मेरी कुश्ती की दुनिया बहुत अच्छी है, तीन-चार घंटे जमकर कुश्ती करो और फिर बढ़िया खाना खाओ और सो जाओ ।
 
आपको ज़िंदगी में कभी किसी चीज़ से डर लगा ?
जैसा कि मैंने कहा मुझे कभी भी किसी बात से डर नहीं लगता। मेरे पापा ने डर क्या है ये कभी नहीं बताया । आज भी जब मैं अकेले ट्रैवल करती हूं या रात को देर से आना होता है, तो परिवार और ससुराल के लोग कहते है कि वही रुक जाओ। रात को अगर चार-पाँच आदमी एक साथ आ गए तो तुम क्या करोगी, तो मैं कहती हूं कि भगवान ने अगर अनहोनी लिख ही दी होगी तो क्या कर सकते है। मुझे लगता है कि डर कर जीने से कुछ नहीं होगा। 
 
 
 
 
 

 

आप आज की लड़कियों को क्या टिप्स देना चाहेंगी ?

सबसे पहले तो हर लड़की को मेंटली स्ट्रोंग होना चाहिए, यह सबसे ज़्यादा जरूरी है। इसके बाद लड़कियां खुद को फ़िज़िक्ली स्ट्रोंग बनाएं। इसके लिए ट्रेनिंग लेना चाहिए। लड़कियों को जूडो-कराटे जरूर सीखना चाहिए । अपने अंदर की ताक़त को पहचाना चाहिए । कुछ बातें हमें अपने माता पिता से भी मिलती है। हमारे पैरेन्ट्स ने तो हमें कभी किसी से कम नहीं समझा । हमेशा स्ट्रोंग बनाने की ही सलाह दी। कमज़ोर पड़ने पर डांट भी पड़ती थी ।
 
अपने घरवाले के लिए स्पेन से क्या गिफ़्ट लाना चाहेंगी ?
मेरे घर वाले तो सिर्फ़ इसी गिफ़्ट से ख़ुश होंगे जब मैं ख़तरों के खिलाड़ी का टाइटल जीत कर आऊं ।
 
आप आज की लड़कियों के लिए रोल मॉडल बन गई है ? क्या कहेंगी ?
यह सुन कर अच्छा लगता है। मेरे संघर्ष और जीत के साथ ही मेरे माता पिता को भी फ़िल्म “दंगल” में इतने अच्छे से दिखाया है कि सभी को उससे इन्स्परेशन मिल रहा है । हरियाणा में अब लड़की होने पर कोई अफ़सोस नहीं करता ।वहाँ की लड़कियाँ स्कूल जाने लगी है ।अपने एजुकेशन पर ध्यान दे रही है ।हरियाणा की लड़कियाँ बहुत स्ट्रॉन्ग भी होती है तो अब रेस्लिंग को अपना कारियर बना रही है ।
 
फ़िल्मों में मौक़ा मिले तो ऐक्टिंग करेगी ?
(हंसकर ) आज मुझे बहुत कॉम्प्लिमेंटस मिल रहे है पहले पता होता कि मैं ऐक्टिंग कर सकती हूँ तो फ़िल्मे ही करती । अभी तो मेरा पूरा ध्यान सिर्फ 2020 के ओलम्पिकस   में मेडल जीतने पर है। यही मेरे परिवार का सपना और इच्छा है और उसे पूरी करना मैं अपनी ज़िम्मेदारी समझती हूं ।
 
रेस्लिंग की दुनिया में मशहूर गीता ने 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्ज़ में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीत कर भारत का नाम रोशन किया था । आमिर खान की फ़िल्म “दंगल” में उनके संघर्ष को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है । यह फ़िल्म सुपर हिट रही थी और गीता व बबीता फोगाट को हर घर में एक नई पहचान मिली। गीता के पिता श्री महावीर जी ने तो पहले ही कहा था कि “हमारी छोरी छोरों से कम है के ” और आज गीता ने ये प्रूव भी कर दिया कि अगर आप कुछ करने की ठान ले तो उसे कोई नहीं रोक सकता ।
 
 
 
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