Short Hindi Kahani: होलियों का अपना ही रंग होता है, पर उस दिन जो रंग मेरे चेहरे पर चढ़ा, वह गुलाल का नहीं, शर्म का था। सुबह से ही मोहल्ले में ढोलक की थाप, हँसी-ठिठोली और रंगों की बौछार शुरू हो चुकी थी। मैं बालकनी से झाँककर सब देख रही थी—मन में उत्साह भी था […]
