lakshy kee praapti
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Heart Touching Story: प्रचलित कथा के अनुसार दुर्योधन ने सभी पांडवों को मारने के लिए लाक्षागृह की रचना की थी। इस षडयंत्र से पांडव बच गए और वेश बदल कर वन में रहने लगे थे। उस समय राजा द्रुपद ने द्रौपदी का का स्वयंवर आयोजित किया। इस आयोजन में पांडव भी भेष बदलकर पहुंचे थे। दरबार में श्रीकृष्ण भी उपस्थित थे और वे ब्राह्मण रुप में सभी पांडवों को पहचान गए थे। स्वयंवर में यौद्धा को भूमि पर रखे पानी में देखकर छत पर घूम रही मछली की आंख पर निशाना लगानाथा। इस शर्त को पूरी करने वाले यौद्धा से द्रौपदी का विवाह होना था। जब अर्जुन इस प्रतियोगिता में शामिल होने पहुंचे तो श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि कैसे मछली की आंख में निशाना लगाना है। ये सुनकर अर्जुन ने कहा कि अगर सब मुझे करना है तो आपकी क्या आवश्यकता है। तब श्रीकृष्ण ने कहा कि तुम वो करो जो तुम्हारे वश में है और मैं वह करुंगा जो तुम्हारे वश में नही है। यानि मैं हिलते हुए पानी को स्थिर करुंगा ताकि तुम्हें निशाना लगाने में परेशानी ना हो। तुम सिर्फ बेहतर से बेहतर करने की कोशिश करो।

महाभारत के अन्य प्रसंग में अर्जुन को जयद्रथ का वध करना था और सूर्यास्त होने ही वाला था, तब सूर्यग्रहण करके सूर्यास्त का भ्रम पैदा कर श्रीकृष ने जयद्रथ को बाहर आने पर मजबूर कर दिया। जैसे ही ग्रहण हटा अर्जुन ने जयद्रथ का वध कर दिया। यहां भी अर्जुन ने सिर्फ अपना काम किया और श्रीकृष्ण ने अपना काम किया जो उनके हाथ में था।

इन प्रसंगों की सीख यह है कि हमें सिर्फ बेहतर से बेहतर कोशिश करनी चाहिए क्योंकि लक्ष्य पूरा होगा या नहीं ये तो भगवान के हाथ में ही है। अगर हम धर्म के रास्ते पर ईमानदारी से कोशिश करेंगे तो भगवान की कृपा से हमें सफलता जरुर मिलेगी।

ये कहानी ‘दिल को छू लेने वाली कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंDil Ko Chhoo Lene Wali Kahaniyan (दिल को छू लेने वाली कहानियाँ)