Nautapa 2025 Date: नौतपा या नवतपा ऐसा समय होता है, जब सूर्य देव जबरदस्त आग उगलते हैं और धरती तपने लगती है। नौतपा के 9 दिन इतने भयंकर गर्मी पड़ती है कि लोगों को घर-बाहर कहीं चैन नहीं आता। इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है। बाहर गर्म हवाओं की लू चलती है। लोगों के साथ ही पशु-पक्षी और पेड़-पौधे सभी के लिए यह समय बहुत कष्टकारी हो जाता है। नौतपा की तपती गर्मी को ही ‘हीट वेव’ कहा जाता है, जब बहुत जरूरत न होने पर दोपहर के समय घर से बाहर निकलने की मनाही होती है। नौतपा के इन नौ दिनों का ज्योतिष और धर्म से भी खास संबंध होता है। आइये जानते हैं इसके बारे में।
क्या है नौतपा

ज्योतिषीय दृष्टि से जब ग्रहों के राजा सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब नौतपा की शुरुआत होती है। वैसे तो सूर्य 15 दिन तक रोहिणी नक्षत्र में रहते हैं और फिर मृगशिरा नक्षत्र में चले जाते हैं। जब तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहते हैं तब तक भीषण गर्मी पड़ती है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने के शुरुआती 9 दिन ऐसे होते हैं, जिसे नौतपा कहा जाता है। जानकार बताते हैं कि नौतपा के नौ दिनों की भयंकर गर्मी के दौरान धरती सूर्य की ऊष्मा को अवशोशित कर बारिश के लिए अनुकूल वातावरण को तैयार करती है। इसलिए कहा जाता है कि नौतपा के नौ दिनों में धरती जितनी तपती है, वर्षा भी उतनी अच्छी होती है।
इस दिन से शुरू हो जाएगा नौतपा

ज्येष्ठ माह में 25 मई 2025 को सूर्य तड़के सुबह 03 बजकर 27 मिनट पर कृत्तिका नक्षत्र से निकलकर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे और 8 जून को मगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ऐसे में इन 15 दिनों में काफी गर्मी पड़ेगी। खासकर शुरुआत के नौ दिन यानी 25 मई से 3 जून तपने वाले होंगे, जिसे नौतपा कहा जाता है।
नौतपा का ज्योतिषीय संबंध
ज्योतिष के अनुसार रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही सूर्य की सक्रियता बढ़ जाती है और तेज गर्मी पड़ने लगती है। रोहिणी नक्षत्र के स्वामी शुक्र ग्रह है, जिसे सूर्य का शत्रु माना जाता है। ऐसे में जब सूर्य शुक्र के नक्षत्र में आ जाते हैं तो अधिक गर्मी पड़ती है। साथ ही सूर्य के इस नक्षत्र में आते ही चंद्रमा की शीतलता भी कम हो जाता। सूर्य पृथ्वी के करीब आ जाता है और सूर्य की किरणे सीधे धरती पर पड़ती है। इसलिए नौतपा के दौरान सूर्य देव की पूजा का महत्व बताया गया है। साथ ही सूर्य ग्रह से संबंधित चीजों का दान करना भी इस समय पुण्यकारी होता है।
नौतपा में करें ये काम

- नौतपा के नौ दिनों में प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। सूर्य देव को जल चढ़ाएं और आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें। ऐसा करने से भगवान सूर्य की कृपा प्राप्त होती है।
- नौतपा में किया गया दान बहुत फलदायी होता है। इस समय आप मौसमी फल, छाता, मटका, सूती वस्त्र, सत्तू, पंखा आदि का दान कर सकते हैं। इससे कुंडली में सूर्य ग्रह से शुभ फल मिलते हैं। नौतपा या ज्येष्ठ माह में किए ये दान महादान के समान माने जाते हैं।
- नौतपा के दिनों में दोपहर के भोजन के बाद कुछ समय विश्राम करना चाहिए। साथ ही अधिक तली-भुनी चीजों से परहेज करना चाहिए। इस समय लहसुस, बैंगन और मासांहार भोजन का त्याग करें।
