fifty shades of grey novel in Hindi
fifty shades of grey novel in Hindi

fifty shades of grey novel in Hindi: लंबी और लाल बालों वाली डॉ. ग्रीनी अपने नीले सूट में गजब की लग रही हैं। मुझे क्रिस्टियन के ऑफिस में काम करने वाली महिलाओं की याद आ गई। वह भी मानो उन्हीं की प्रतिलिपि हैं। उनके लंबे बाल एक सुंदर जूड़े में बंधे हैं। शायद चालीस से कम की ही होंगी।

“मि. ग्रे!” उन्होंने क्रिस्टियन से हाथ मिलाया।

“इतने कम समय में आने के लिए मेहरबानी।” उसने कहा।

“इस मुलाकात को संभव बनाने के लिए शुक्रिया! मि. ग्रे और मिस स्टील!” वे मुस्कुराईं।

हमने हाथ मिलाए और मैं जान गई कि वे उन औरतों में से हैं, जो किसी भी तरह की बेवकूफ़ी आसानी से बरदाश्त नहीं करतीं। जैसे कि केट! मुझे वे झट से पसंद आ गईं। उन्होंने क्रिस्टियन को तीखी नज़रों से देखा और ज़रा सी अटपटी ख़ामोशी के बाद उसे बात समझ आ गई।

“मैं नीचे मिलूंगा।” वह बोला और हम दोनों को बेडरूम में छोड़कर चला गया।

“खैर मिस स्टील! मुझे इस मुलाकात के लिए मि. ग्रे काफी बड़ी रकम देने जा रहे हैं। मैं आपके लिए क्या कर सकती हूं?”

सारी जांच-पड़ताल और लंबी बहस के बाद हमने तय किया कि मैं गर्भनिरोधक के तौर पर मिनी पिल इस्तेमाल करूंगी। उन्होंने मुझे एक नाम लिख दिया और अगले दिन से शुरू करने का निर्देश दिया। मुझे उनका यह संभला हुआ रवैया पसंद आया। उन्होंने मुझे इतनी देर तक सही समय पर दवा लेने के बारे में लेक्चर दिया, जब तक उनका अपना मुंह सूट के रंग की तरह नीला नहीं पड़ गया। मैं यह भी बता सकती हूं कि वे मेरे और क्रिस्टियन के बीच के रिश्ते को जानने के लिए मरी जा रही थीं पर मैंने जरा सा भी सुराग नहीं दिया। वैसे मैं सोच रही थी कि अगर वह कहीं क्रिस्टियन का पीड़ादायी लाल कमरा देख लेतीं तो क्या तब भी इतनी सहज और संभली हुई रहती? जब हम उस बंद दरवाजे के पास से निकले तो मैं घबरा गई और फिर हम क्रिस्टियन की आर्ट गैलरी यानी बड़े कमरे में पहुंचे।

वह अपने काउच पर बैठा कुछ पढ़ रहा था। और बड़ा ही मीठा संगीत बज रहा था। पूरे कमरे में उस धीमे संगीत के सुर गूंज रहे थे। वह अचानक मुड़ा और हमें देखकर पूरी गर्मजोशी से मुस्कान दी।

“हो गया?” मानो उसे बड़ी दिलचस्पी हो। उसने संगीत के स्वर धीमे कर दिए। फिर वह हमारी ओर आ गया।

“हां! मि. ग्रे, इनका ध्यान रखिएगा। ये बहुत प्यारी, सुंदर और होशियार नवयुवती है।”

क्रिस्टियन के साथ-साथ मैं भी सकते में आ गई। भला एक डॉक्टर को यह सब कहने की क्या पड़ी है? क्या वह किसी तरह से क्रिस्टियन को चेतावनी देना चाह रही है? क्रिस्टियन ने खुद को संभाला।

“मैं पूरा ध्यान रखूंगा।” वह कौतुक से बोला।

मैंने उसे घूरते हुए शर्मिंदगी के साथ कंधे झटके।

“मैं आपको बिल भेज दूंगी।” डॉ. ने कहा और हाथ मिलाया।

“गुड डे और गुड लक एना!” वे मुस्कुराईं और हमने हाथ मिलाए। मैं उनकी आंखों के आसपास आ गई झुर्रियां देख सकती थी।

पता नहीं कहां से अचानक टेलर उन्हें बाहर ले जाने के लिए आ गया। वह ऐसा कैसे कर लेता है? वह कहां छिपा खड़ा रहता है?

“कैसा रहा?” क्रिस्टियन ने पूछा।

“बढ़िया, धन्यवाद।” डॉ. ने कहा है कि मैं अगले चार सप्ताह तक किसी भी तरह के शारीरिक संबंध नहीं बना सकती।” क्रिस्टियन का मुंह यह सुनकर खुला का खुला रह गया और मैं ज्यादा देर तक चुप नहीं रह सकी। मेरी हंसी फूट ही पड़ी।

“देखा कैसा बनाया?”

उसने अपनी आंखें सिकोड़ीं और मेरी हंसी वहीं थम गई। वह तो डरावना लग रहा था। हाय! लगता है मैंने इसे गुस्सा दिला दिया। मेरे चेहरे का खून सूख गया और भीतर बैठी लड़की कोने में सिकुड़ गई। मैं कल्पना कर रही थी कि दोबारा उसके हाथों की फटकार सहनी होगी।

“देखा कैसा बनाया!” उसने कहा और हंस दिया। उसने मुझे कलाई से पकड़ा और अपने पास खींच लिया।

“मिस स्टील! तुम्हें सुधारना बहुत मुश्किल है।” उसने मेरी आंखों में देखते हुए गहरा चुंबन दिया और मैं उसकी बलिष्ठ बांहों में झूल गई।

“मैं तुम्हें पाने के लिए तड़प रहा हूं पर उससे पहले हम दोनों को ही कुछ खाना होगा। मैं नहीं चाहता कि तुम बाद में मुझे ताना दो।”

“क्या तुम मुझसे इस शरीर के सिवा कुछ नहीं चाहते?” मैं हौले से बोली।

“हां! वह और तुम्हारा बड़बोलापन।”

उसने मुझे गहरे आवेग से चूमा और फिर अचानक मेरा हाथ थाम कर रसोई में ले गया। मैं हैरान हूं…एक ही पल में हम मज़ाक करते हैं और अगले ही पल……मैंने अपने तपे हुए चेहरे को हवा दी। अभी तो वह कौन-सी दुनिया में था और अब वह खाने की बात कर रहा है। अभी भी हल्का संगीत गूंज रहा है

“किसका गाना है?”

“ये विला लोबोस है, अच्छा है न?”

“हां!” मैंने हामी दी।

नाश्ते की मेज दो के लिए लगी है। क्रिस्टियन ने फ्रिज से सलाद का डोंगा निकाला।

“कैसर सलाद चलेगा?”

“शुक्र है! ये तो हल्का है। मैं खा लूंगी।”

“हां, ठीक है। धन्यवाद “

मैंने उसे बड़ी ही शालीनता से अपनी रसोई में यहां से वहां जाते देखा। वह अपने शरीर के साथ एक स्तर पर कितना आरामदेह है और दूसरी ओर नहीं चाहता कि उसे कोई छुए.. हो सकता है कि वह अंदर से ऐसा न हो। कोई भी इंसान अकेला द्वीप नहीं होता पर मुझे लगता है कि क्रिस्टियन ग्रे ऐसा ही है।

“तुम क्या सोच रही हो?” वह मुझे मेरी सोच के घेरे से बाहर खींच लाया।

“मैं तो बस तुम्हें चलते देख रही थी।”

उसने चकित होकर एक भौं उठाई।

“और?”

मैं थोड़ा खिसिया गई।

“तुम बहुत शालीन और गरिमामयी हो।”

“अच्छा! थैंक्स मि. स्टील! थोड़ी चाब्लिस चलेगी?”

“हां! धन्यवाद।”

“साथ-साथ सलाद खाओ और मुझे बताओ कि तुमने क्या तरीका चुना?”

मैं एक पल के लिए तो सकते में ही आ गई। फिर समझ आया कि वह डॉक्टर की बात पूछ रहा था?

“मिनी पिल “

उसने त्योरी चढ़ाई।

“और क्या तुम इसे रोज़ लेना याद रख सकोगी ……सही वक्त पर हर रोज़……?”

“हे भगवान……… बेशक मैं याद रखूंगी। ये कैसे जानता है? मैं इस सोच से ही शरमागई। शायद उसकी पंद्रह गुलामों में से कोई इन्हें लेती होगी।

“मुझे पक्का यकीन है कि तुम याद दिला दोगे।” मैंने कहा उसने मुझे हैरानी और कौतुक से देखा।

“ठीक है, मैं अपने कैलेंडर पर एक अलार्म लगा दूंगा। चलो तुम खाओ।”

चिकन कैसर सलाद काफी मज़ेदार है। हैरानी की बात यह भी है कि मुझे ज़ोर की भूख लगी है और शायद पहली बार हो रहा है कि उसके साथ होने के बावजूद मैंने उससे पहले अपना हिस्सा खा लिया है। वाइन भी स्वादिष्ट और फलों के रस जैसे स्वाद वाली है।

“मिस स्टील! हमेशा की तरह अधीर……।” वह मेरी खाली प्लेट देखकर बोला

मैंने उसे कनखियों से देखकर कहा- “हां।”

उसकी सांस जैसे अटक गई। जैसे ही उसने मुझे घूरना शुरू किया। हमारे बीच का माहौल बदलने लगा…धीरे-धीरे उसमें एक नया ही रंग आने लगा। वह खड़ा हुआ और मुझे अपनी बांहों में खींच लिया।

“क्या तुम यह करना चाहती हो?” उसने मुझे गहरी नज़रों से देखकर पूछा।

“मैंने अभी तक कहीं हस्ताक्षर नहीं किए हैं।”

“पता है पर मैं आजकल सारे नियम तोड़ रहा हूं।”

“क्या तुम मुझ पर हाथ उठाने जा रहे हो?”

“हां, पर यह तुम्हें चोट पहुंचाने के लिए नहीं होगा। मैं तुम्हें अभी कोई सज़ा नहीं देना चाहता। अगर कहीं कल शाम मिलतीं तो बेशक आज की कहानी कुछ और होती।”

ओह……वह मुझे चोट पहुंचाना चाहता है। मैं इन चीज़ों से कैसे निपटूंगी?

मैं अपने चेहरे पर पसर आया भय छिपा नहीं सकती।

“एनेस्टेसिया! किसी दूसरे की सोच को अपने पर हावी मत होने दो। मुझ जैसे लोग यह सब करना इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि हम दर्द लेना या देना पसंद करते हैं। ये बड़ी सीधी बात है। तुम ऐसा नहीं करतीं और मैंने कल इस बारे में सोचते हुए काफी समय बिताया।”

मैं उसके शरीर में हो रहे बदलाव महसूस कर सकती थी। मुझे भाग जाना चाहिए पर मैं भाग नहीं सकतीं मैं किसी गहरे स्तर पर उसकी ओर खिंचती जा रही हूं, जिसे मैं अभी समझ नहीं सकती।

“क्या तुम किसी नतीजे पर पहुंचे?”

“नहीं और अभी मैं केवल इतना चाहता हूं कि तुम्हें बांधकर तुम्हारे साथ संबंध बनाऊं। क्या तुम इसके लिए तैयार हो?”

“हां।” मैंने एक सांस ली और पूरे शरीर में जैसे एक अजीब-सी ऐंठन आ गईं।

“बढ़िया। आओ।” उसने मेरा हाथ थामा और हम नाश्ते के झूठे बर्तन वहीं छोड़कर सीढ़ियों से ऊपर चल दिए।

मेरा दिल तेजी से धड़क रहा है। तो ये बात है, मैं सचमुच ऐसा करने जा रही हूं। मेरे भीतर बैठी लड़की तो मानो विश्वस्तरीय बैलेरीना बनी बैठी है और एक के बाद एक घुमेर खा रही है। उसने अपने लाल कमरे का दरवाजा खोला और मैं एक बार फिर से पीड़ादायी लाल कमरे में हूं।

वही चमड़े, खट्टी-सी गंध वाली पॉलिश और गहरे रंग की लकड़ी की गंध, कुल मिलाकर सब कुछ कामोत्तेजक है। देह में खून उछालें मार रहा है। चाह और वासना के मारे एड्रेनालिन का स्तर बढ़ गया है। बड़ा ही सिर घुमा देने वाला कॉकटेल है। क्रिस्टियन की नज़रें पूरी तरह से बदल गई हैं। उसने मुझे गहरे सम्मोहन से भरी वासनात्मक निगाहों से देखा।

“जब तुम यहां हो……तुम पूरी तरह से मेरी हो।”

मैंने हामी दी, मुंह सूख गया और ऐसा लगा कि कलेजा उछलकर बाहर आ जाएगा।

“अपने जूते उतारो।”

मैंने अपना थूक निगला। हाथ-पैर जैसे बस में नहीं हैं। जूते उतारे तो उसने उन्हें दरवाजे के पास आराम से रख दिया।

“गुड! जब मैं कुछ करने को कहूं तो तुम्हें हिचकने की ज़रूरत नहीं है। अब मैं तुम्हें इस पोशाक से बाहर निकालने जा रहा हूं। मैं कुछ दिन से यही करना चाह रहा था। एनेस्टेसिया! मैं चाहता हूं कि तुम अपनी देह के साथ सहज महसूस करो। तुम्हारा शरीर सुंदर है और मैं इसे देखना चाहता हूं। ये भी एक आनंद है। दरअसल मैं तो इस तरह पूरा दिन तुम्हें देख सकता हूं और तुम्हें इसके लिए कोई शर्मिंदगी या कुंठा नहीं होनी चाहिए। क्या तुम समझी?”

“हां “

“हां, क्या?”

“जी हां, सर “

“क्या तुम सचमुच इसका मतलब समझती हो?”

“जी सर “

“बहुत अच्छे!”

“अब अपने बाजू सिर के ऊपर ले जाओ।”

मैंने वही किया, जो कहा गया था। उसने धीरे-धीरे मेरी पोशाक उतार दी। फिर वह मुझे एकटक निहारने लगा। उसने पोशाक को वहीं कोने में रख दिया। उसने मेरा चिबुक थामकर कहा, “तुम अपना होंठ काट रही हो और तुम जानती हो कि ऐसा देखकर मुझ पर क्या असर होता है। पीछे मुड़ो।”

मैं बेहिचक मुड़ गई। उसने मेरे ऊपरी वस्त्र उतार दिए और गले से कानों तक मीठे चुंबन देने लगा।

“एनेस्टेसिया! तुम्हारे शरीर से हमेशा की तरह बड़ी प्यारी और दैवीय गंध आ रही है।”

मैंने हल्की कराह भरी तो वह बोला, “हिलो मत! कोई आवाज़ मत निकालो।” उसने मेरे बाल पीछे किए और अचानक पूरी दक्षता के साथ उनकी चोटी गूंथने लगा।

उसने उन्हें बालों की एक लट से ही बांध दिया और उसे खींच कर मेरी गर्दन पीछे की।

“मैं चाहता हूं कि तुम यहां आओ तो तुम्हारे बाल चोटी में बंधे हों।”

“हम्म…… क्यों?

उसने मेरे बाल छोड़ दिए।

“मुड़ो।”

मेरी सांसें उखड़ी हुई हैं। एक अजीब-सा नशा हावी है।

“जब मैं यहां बुलाऊं तो तुम्हें इस पोशाक में आना होगा। तुम केवल निचले वस्त्र में रहोगी। समझीं?”

“हां “

“हां, क्या?”

“जी हां, सर “

उसके होठों के कोनों पर एक मुस्कान तिर आई।

“गुड गर्ल। जब तुम यहां आओ तो मैं चाहूंगा कि तुम वहां घुटने मोड़कर बैठ जाओ।” उसने दरवाजे के पास इशारा किया। जाओ बैठो।

मैंने शब्दों को समझने की कोशिश में पलकें झपकाईं और फिर लड़खड़ाते हुए उसी ओर बढ़ गई।

“तुम अपनी एड़ियों के बल बैठ सकती हो।”

“अपने हाथ जांघों पर रखो। अब अपने घुटने खोलो और फर्श की ओर देखो।”

वह मेरे पास आ गया और मैं नीची नज़रों के साथ उसके पैर देख सकती थी।

उसने फिर से मेरी चोटी पकड़ी तो मुझे ऊपर देखना पड़ा। इस तरह कोई दर्द नहीं हो रहा।” एनेस्टेसिया! क्या यह मुद्रा याद रहेगी?”

“जी सर।”

“गुड! यहीं रहना। हिलो मत।” वह कमरे से निकल गया।

मैं अपने घुटनों के बल बैठी इंतज़ार कर रही हूं। वह कहां गया? वह मेरे साथ क्या करने जा रहा है? समय बढ़ता गया। मुझे कुछ अंदाज़ा नहीं कि वह कितनी देर तक बाहर रहा…पांच मिनट, दस मिनट। मैं अंदर ही अंदर कौतूहल से अधमरी हुई जा रही हूं।

और अचानक वह लौट आया। मैं अचानक एक ही सांस में शांत और उत्तेजित हो गई। क्या मैं इससे अधिक उत्तेजित हो सकती हूं? मैं उसके पैर देख सकती हूं। वह जींस बदल आया है। अब उसने पुरानी, फटेहाल और मुलायम जींस पहन रखी है। ओह! ये तो बड़ी ज़बरदस्त लगती हैं। उसने दरवाजा बंद किया और वहां कुछ टांग दिया।

“एनेस्टेसिया! चलो खड़ी हो जाओ।”

मैं खड़ी हो गई पर अपना मुंह नीचे ही रखा।

“तुम मुझे देख सकती हो।”

मैंने उसे देखा और उसने बड़ी गहराई से झांका। उसकी नज़रों में कोमलता है। उसने अपनी शर्ट उतार दी। मैं उसे छूना चाहती हूं…।” एनेस्टेसिया! मैं तुम्हें बांधने जा रहा हूं। मुझे अपना दायां हाथ दो।” मैंने अपना हाथ आगे कर दिया। उसने हथेली सीधी की और अचानक ही एक चाबुक से मेरे हाथ पर मारा। पहले मुझे चाबुक नहीं दिखा था। शायद वह उसके दूसरे हाथ में था जिस पर मेरा ध्यान नहीं गया था। यह सब इतनी जल्दी हुआ कि दर्द का कोई एहसास होने की बजाए हैरानी ज्यादा थी। खैर हल्की-सी चुभन थी और कुछ नहीं।

“कैसा लगता है?” उसने पूछा।

मैंने उसे देखकर उलझन में पलकें झपकाईं।

“जवाब दो।”

“ठीक है।”

“त्योरी मत चढ़ाओ।”

मैंने सहज दिखने का प्रयास किया और मैं सफल रही।

“क्या इससे चोट लगती है।”

“नहीं “

“इससे चोट नहीं लगती और कोई दर्द नहीं होगा। समझीं?”

“जी।” मैंने अनिश्चित स्वर में कहा। क्या सचमुच इससे तकलीफ नहीं होगी?

“मैं सच कह रहा हूं।” उसने कहा

ओह! मेरी सांसें उखड़ रही हैं। क्या वह जानता है कि मैं क्या सोच रही हूं? उसने मुझे वह चाबुक दिखाया वह भूरे चमड़े में गुंथा है। मेरी आंखों में उसे देखते ही एक भय और कौतुक का साया लहरा गया।

“मिस स्टील! आनंद देना ही हमारा लक्ष्य है।” वह बोला

वह मुझे कोहनी से थामकर ग्रिड के नीचे ले गया। वहां से उसने बांधने के लिए बेड़ियां लीं, साथ ही काले चमड़े की हथकड़ियां भी थीं।

“ये ग्रिड इस तरह बना है कि बेड़ियां ग्रिड के आसपास भी घूम सकें।”

मैंने झांका। ओह ये तो किसी सब-वे के नक्शे जैसा लग रहा है।

“हम यहीं से सब शुरू करेंगे।” फिर उसने दीवार पर टंगे लकड़ी के क्रास की तरफ संकेत किया

“अपने हाथ सिर के ऊपर ले जाओ।”

ऐसा लगा कि मैंने अपने शरीर को वहां घट रही घटनाओं के हवाले कर दिया हो। ये सब तो मेरी फैंटेसी से भी कहीं परे है। मैंने आज तक इतना डरावना और उत्तेजक काम कभी नहीं किया। मैंने खुद को एक ऐसे खूबसूरत इंसान के हवाले कर दिया है जो उसके शब्दों में कड़वी हकीकतों के पचासों रंग देख चुका है। मैंने भीतर से उठ रही भय की लहर को दबा दिया। केट और इलियट, वे जानते हैं कि मैं यहां हूं।

वह हथकड़ियां बांधते हुए बहुत पास आ गया। मैं उसकी छाती को देख रही हूं। उसका साथ स्वर्गीय जान पड़ता है। उसके शरीर में से बॉडी वाश और क्रिस्टियन की प्यारी-सी महक आ रही है। मैं उसकी छाती के बालों को महसूस करना चाहती हूं। काश! मैं थोड़ा-सा झुक सकती…।

उसने पीछे हटकर मुझे घूरा और मैं हाथ बांधे बेबस होकर उसके प्यारे से चेहरे को देख रही हूं।

“मिस स्टील! तुम यहां अच्छी लग रही हो और इस तरह तुम थोड़ी देर चुप भी रहोगी।”

फिर उसने अपना चाबुक हाथ में लिया और मेरी नाभि के आसपास घुमाते हुए सनसनाहट-सी पैदा करने लगा। मैं चमड़े की छुअन से सिहर गई। अचानक ही उसने उसे फटकारा और मुझे उससे मारा। मैं हैरानी से चिल्ला उठी। हथकड़ियां खींचने की कोशिश की पर कोई लाभ नहीं हुआ

“चुप रहो।” उसने कहा और मेरा शरीर उस मीठे वार के लिए तड़प रहा है।

उसने इस बार शरीर के दूसरे अंगों को उसका एहसास दिलाया।

“क्या पसंद आया?”

“हां “

उसने फिर से एक और वार किया। इस बार हल्की चुभन हुई।

“हां, क्या?”

“जी सर!” मैंने कहा।

वह रुक गया पर मैं अब उसे देख नहीं सकती क्योंकि मैंने आंखें बंद कर ली हैं।

“आंखें खोलो और मुझे इसका स्वाद बताओ। बेबी।”

मैंने आंखें खोलीं और उसने उसे मेरे मुंह में डाल दिया। मैंने सपने में भी तो ऐसा ही देखा था। चमड़े की गंध मेरे नथुनों में जा घुसी। उसकी आंखें गहराई से चमक रही हैं।

फिर उसने चाबुक निकाला और मुझे अपने पास खींचते हुए चुंबन दिया। उसने मुझे अपने पास खींचा तो मैं उसकी छाती के पास आ गई पर चाहकर भी छू नहीं सकती थी। मेरे हाथ बंधे थे और मैं तरस रही थी।

“ओह एनेस्टेसिया! तुम कमाल हो।”

चाबुक का एक और वार हुआ और कुछ ही देर में मैं सारी दुनिया भुलाकर उसके इस खेल का हिस्सा बन गई। बेशक उसने सही कहा था कि यह सब पीड़ा के लिए नहीं आनंद देने के लिए था। फिर वह धीरे-धीरे अपनी मनमानी करने लगा। जी भरने के बाद उसने मेरी हथकड़ियां खोल दीं और हम वहीं फर्श पर लेट गए। उसने मुझे गोद में खींचकर दुलारा और मैंने अपना सिर उसकी छाती पर टिका दिया। काश! मुझमें उसे छूने की ताकत होती पर नहीं मैं तो बेजान हुई पड़ी हूं।

“बहुत अच्छे बेबी! क्या तुम्हें कोई दर्द हुआ?” उसने हौले से पूछा।

नहीं। मुझसे तो आंखें भी नहीं खोली जा रहीं। मैं इतना थक क्यों गई?

“क्या तुमने इसकी उम्मीद की थी?” उसने मेरी बिखरी लट संवारी।

“हां “

“देखा एनेस्टेसिया! यह डर तुम्हारे मन की उपज है। क्या तुम इसे दोबारा करना चाहोगी?”

मैंने दिमाग पर हावी होती थकान को परे धकेलकर एक पल के लिए सोचा।

“दोबारा?”

फिर मैंने हौले से कहा- “हां “

उसने मुझे कस कर गले से लगा लिया।

“बहुत अच्छे! मैं भी करना चाहूंगा।” उसने मुझे अपने से लिपटाकर सिर चूम लिया। और अभी ये कहानी खत्म नहीं हुई।

अभी खत्म नहीं हुई? मैं तो कुछ भी नहीं कर सकती। मैं पूरी तरह से पस्त हूं और नींद लेने के लिए मरी जा रही हूं। मैं उसकी छाती पर झुकी हूं और सोना चाहती हूं। उसके शरीर से लिपटकर बहुत आरामदायक और सुरक्षित महसूस कर रही हूं। क्या वह मुझे सोने देगा? मैंने जैसे ही अपना मुंह उसकी छाती के पास ले जाकर उसकी गंध लेनी चाही। उसका पूरा शरीर बचाव में ऐंठ गया। वह मुझे घूर रहा है।

“ऐसा मत करो।”

मैंने उसकी छाती को बड़े ही लगाव से देखा। मैं उन बालों में अंगुलियां फिराना चाहती हूं।

उन्हें चूमना चाहती हूं।” मत करो।” उसने चेतावनी दी। मैंने ध्यान दिया कि उसकी छाती पर छोटे-छोटे निशान हैं। चिकन पॉक्स? मीजल्स? किस चीज़ के हो सकते हैं?

किस चीज़ के हो सकते हैं?

“दरवाजे के पास घुटनों के बल बैठ जाओ।” उसने हुक्म दिया और मुझे पैरों पर खड़ा कर दिया। अब उसके सुर में पहले जैसी गरमहाट नहीं रही।

मैं लड़खड़ाते हुए उठी और वैसा ही किया। किसने सोचा था कि इस कमरे में मैं यह सब करूंगी। कोई सोच सकता है कि यह सब कितना थका देने वाला हो सकता है। मेरे अंग शिथिल हो रहे हैं। अंदर बैठी लड़की ने बोर्ड टांग रखा है- कृपया मुझे तंग न करें।

क्रिस्टियन आसपास घूम रहा है और मेरी आंखें नींद से भारी हैं।

“मिस स्टील! मैं बोर कर रहा हूं?”

मैं झटके से जगी। वह मेरे पास आ गया और घूरने लगा। हाय! कहीं उसने मुझे झपकी लेते देख तो नहीं लिया

“उठो।” उसने कहा

“तुम थक रही हो। है न?”

मैंने शरमाते हुए हामी भरी।

“मिस स्टील! तभी तो कहा था कि हिम्मत चाहिए। तुम अपने हाथ जोड़ो।”

अच्छा ताकि कह सकूं कि मेरे साथ सख्ती से पेश मत आना।

उसने एक तार मेरी कलाईयों पर लपेट दी। ओह! मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं।

ये तो जानी-पहचानी हैं?

क्लेटन वाला माल? अचानक ही पूरा शरीर जाग गया। अब मैं फिर से खेल का हिस्सा बन गई हूं। मैंने कलाईयों को खींचना चाहा पर तार हाथों में चुभती है। वैसे वे इतनी टाइट भी नहीं कि चमड़ी को काटें।

“आओ।” वह मुझे पलंग के पास ले गया।

“मैं और भी चाहता हूं पर यह सब बहुत जल्द होगा क्योंकि मैं जानता हूं कि तुम थकी हुई हो।

हम एक बार फिर से वासना और चाहत की गलियों में चल दिए। जहां जाने के बाद एना अपनी थकान और नींद भूल गयी और क्रिस्टियन की हल्की सरगोशियों के बीच यह खेल पूरा हुआ।

जब सुध आई तो हम दोनों फर्श पर लेटे थे। मैं उसके ऊपर पीठ के बल लेटी छत और वहां लटके सामान को देख रही थी। सब कुछ रंगीन और गुलाबी दिख रहा था।

क्रिस्टियन हौले से बोला, “अपने हाथ ऊंचे करो।”

मुझे लगा कि मेरे बाजू धातुओं से बंधे हैं पर मैंने उन्हें उठा ही लिया। उसने कैंची ली और प्लास्टिक काटकर बोला।

“मैं इस एना को मुक्त घोषित करता हूं।”

मैं अपनी कलाईयां मलते हुए खिलखिलाने लगी।

“कितनी प्यारी आवाज़ है।” उसने कहा।

वह अचानक उठ बैठा और इस तरह मैं उसकी गोद में आ गई।

“ये तो मेरी ही गलती है।” वह मेरी कलाईयां मलने लगा।

“क्या?”

“मैं कुछ समझी नहीं।”

“कि तुम अकसर इस तरह नहीं खिलखिलातीं।”

“मैं वैसे भी कोई बहुत ज्यादा खिलखिलाने वालों में से नहीं हूं।”

“ओह! पर मिस स्टील जब ऐसा होता है तो यह आवाज़ सुनने का भी आनंद आ जाता है।”

“मि. ग्रे! बड़े रोमानी हो रहे हैं।”

उसकी आंखें मुलायम हो आई और वह मुस्कुराया।

“मैं कहना चाहूंगा कि अब तुम्हें गहरी नींद चाहिए।”

“सारे रोमांस का हो गया कबाड़ा।” मैंने मुंह बनाया।

उसे देखकर ऐसा लगा कि काश मैं सारी जिंदगी इस खूबरसूरती को निहार सकती। उसने किसी कमांडो की तरह झट से जींस चढ़ा ली।

“मैं टेलर या मिसेज जोंस को डराना नहीं चाहता।”

हम्म……वे तो जानते ही होंगे कि ये कैसा झक्की और सनकी आदमी है।

उसने मुझे पैरों पर खड़े होने में मदद की और इस तरह भूरा चोगा पहनाया मानो किसी बच्चे को तैयार कर रहा हो। जब मेरा शरीर ढंक गया तो उसने मुझे झुककर चूमा और मुस्कुराया।

“पलंग पर चलें।”

अरे… नहीं…।

“सोने के लिए।” उसने मुझे तसल्ली दी।

अचानक ही उसने मुझे गोद में उठाकर छाती से लगा लिया और मेरे कमरे की ओर चल दिया। मुझे याद नहीं कि आज से पहले मैंने कभी इतनी थकान महसूस की होगी। उसने मुझे कंबल ओढ़ाकर लिटाया और अचानक ही मेरे पीछे आकर लेट गया। उसने मेरे बालो में नाक देते हुए हौले से कहा।

“सो जाओ! खूबसूरत लड़की।” फिर उसने मेरे बाल चूम लिए।

और इससे पहले कि मैं कोई जवाब दे पाती। मैं गहरी नींद में खो चुकी थी।