अक्सर मांओं को यह कहते हुए सुना जाता है कि उनका बच्चा बहुत शर्मीला है। बाहरी व्यक्ति के सामने बात नहीं करता, बोलता नहीं। स्कूल में है तो टीचर द्वारा पूछे जाने वाले सवाल का जवाब आते हुए भी हाथ नहीं खड़ा करता। अक्सर मां-बाप यह सोचते हैं कि बच्चे के व्यवहार में आई इस तरह की गड़बड़ी के लिए काफी हद तक वे ही जिम्मेदार हैं। उनमें आत्मग्लानि आ जाती है।
मनोवैज्ञानिक काउंसलर प्रांजलि मल्होत्रा कहती हैं कि हर महिला और पुरुष अलग-अलग स्वभाव के होते हैं, मसलन कोई कम बोलने वाला तो कोई ज्यादा। कोई अंतर्मुखी तो कोई बहिर्मुख। कुछ लोग एक मिनट में ही किसी से दोस्ती कर लेते हैं तो किसी को दोस्ती करने में बहुत समय लगता है। इसी तरह से हर बच्चा भी अलग-अलग स्वभाव का होता है। ऐसा नहीं है कि शर्मीले बच्चे स्कूल में नंबर कम लाते हैं। ये बच्चे अच्छे श्रोता होते हैं और अच्छे स्टूडेंट भी, लेकिन अपने शर्मीले स्वभाव के कारण टीचर द्वारा कुछ पूछने पर हाथ नहीं उठाते। समझ में न आने पर भी कुछ पूछते नहीं।
मनोवैज्ञानिक प्रांजलि कहती हैं कि आज के दौर में यह भी सच है कि अच्छे स्कूल में एडमिशन के समय ग्रुप एक्टिविटीज, स्टेज परफॉर्मंस आदि के लिए बच्चे का शर्मीलापन दूर होना भी जरूरी है। बच्चों के शर्मीलेपन को कैसे दूर करें, इससे पहले बच्चों में शर्मीलापन होने के मुख्य कारणों को जानना बहुत जरूरी है।

शर्मीलापन होने के कारण
1. आनुवंशिक
यदि घर में मां या पिता में से कोई बहुत कम बोलता है या वे बाहरी व्यक्ति से बातचीत करने में झिझकते हैं तो उसका आनुवंशिक प्रभाव बच्चे पर भी पड़ता है।
2. घर का वातावरण
यदि घर का वातावरण एकदम शांत है, बच्चा किसी बाहरी व्यक्ति को घर में देखता नहीं तो भी इसका प्रभाव बच्चे पर पड़ता है।
3. अंगूठा चूसना
यह भी शर्मीलेपन का एक लक्षण है। छोटे बच्चों में अंगूठा चूसने की समस्या एक आम बात है। समस्या तब आती है, जब बच्चा दो-तीन साल बाद भी अंगूठा मुंह से नहीं निकालता। बच्चे ऐसा असुरक्षा की भावना के तहत करते हैं।
4. बच्चे में डर पैदा करना
बहुत ही छोटेपन से बच्चों को डरा-धमका कर रखा जाए, जैसे दूध नहीं पिओगे या खाना नहीं खाओगे तो बाबा आ जाएगा, पुलिस आ जाएगी, बिल्ली आ जाएगी, आदि से बच्चे में डर की भावना उत्पन्न हो जाती है और इस कारण बच्चा शर्मीला हो जाता है।
5. बहुत सुरक्षित वातावरण
बच्चे को बहुत ही ज़्यादा सुरक्षित वातावरण देना भी एक कारण है। जैसे आजकल मां- बाप बच्चे को बैड टच और गुड टच की बात डेढ़-दो साल से ही बताना शुरू कर देते हैं। ऐसे में भी बच्चा डरने लगता है और शर्मीला हो जाता है।
6. बिस्तर गीला करना
यदि बच्चा पांच साल की उम्र के बाद भी बिस्तर गीला करता है तो यह शर्मीलेपन का साइड इफेक्ट हो सकता है। इसका मुख्य कारण माता-पिता के बीच झगड़े होना, घर बदलना, स्कूल बदलना आदि हो सकता है। यह बच्चे में असुरक्षा की भावना विकसित करता है।

कैसे करें टैकल
- बच्चों के दोस्त बनें। उनके स्तर पर उतर कर उनसे बात करें। यदि कामकाजी हैं तो भी उन्हें टाइम दें।
- शाम को पार्क में घुमाने ले जाएं। बच्चे के हमउम्र बच्चों से उसकी दोस्ती कराएं। इस तरह बच्चे में टीम भावना विकसित होती है।
- आजकल अधिकांशत: एकल परिवार होते हैं। अत: बच्चों को रिश्तेदारों के यहां होने वाले फंक्शन में अवश्य ले जाएं।
- मां-बाप को चाहिए कि अपने नन्हे को दादी, नानी, बुआ, मौसी, चाचा आदि से फोन पर अवश्य बात करवाएं।
- स्कूल में एडमिशन के लिए घर में ही संभावित प्रश्नों के जवाब कई बार बुलवाकर याद कराएं। बच्चे को बोलने के लिए प्रोत्साहित करें। द्य शर्मीले बच्चों को ग्रुप परफॉर्मंस के लिए प्रोत्साहित करें।
- अपने आस-पास के थिएटर ग्रुप, ड्राइंग, डांसिंग अथवा स्कूल की एक्टिविटीज में नाम लिखवाएं, ताकि बच्चा अपने हमउम्र बच्चों के साथ बातचीत करे।
- कभी अपने बच्चे को डांटें नहीं और दूसरों से तुलना भी न करें।
- माता-पिता, बच्चों के सामने झगड़े नहीं। कलहपूर्ण माहौल में बच्चे भावनात्मक रूप से बहुत असुरक्षित महसूस करते हैं।
- माता-पिता ही बच्चे को बिहेवियर पैटर्न सिखाते हैं। अत: बच्चे का रोल मॉडल बनने के लिए स्वयं को सुधारें।
- आजकल सिंगल चाइल्ड होने के कारण बच्चे अपना डर किसी से बांट नहीं पाते। माता-पिता बच्चे के साथ इतनी निकटता बनाएं, जिससे उसका शर्मीलापन छूमंतर हो जाए और आगे चलकर उनकी तरक्की के रास्ते की बाधा न बन जाए।
यह भी पढ़ें –बेबी टॉयज़ को सिर्फ खिलौना न समझें
