‘अरे बच्चों के बीच में उम्र का इतना अंतर…ये तो सही नहीं है। उम्र के इतने अंतर में परवरिश की बहुत परेशानी होगी।’ अगर बच्चों के बीच उम्र का ज्यादा अंतर हो तो अक्सर ऐसी ही बातें सुनने को मिल जाती हैं। लेकिन पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति कई दफा आपको ऐसा करने को मजबूर कर देती है कि बच्चों के बीच अंतर हो ही जाता है। अब जब आप इस स्थिति में हैं हीं तो क्यों न बच्चों की परवरिश को लेकर कुछ खास कदम उठाए जाएं ताकि ये उम्र का अंतर बच्चों की परवरिश पर कोई असर ना डाले। कौन-कौन से टिप्स आएंगे आपके काम, जान लीजिए-

बड़ा वाला भी बच्चा है– 

अक्सर उम्र के बड़े अंतर वाले बच्चों के बीच बड़े वाले को छोटे का ख्याल रखने की ज़िम्मेदारी दे दी जाती है। हम ये भूल जाते हैं कि बड़ा वाला छोटे से बड़ा है लेकिन है एक बच्चा ही। उसे भी खुद का ख्याल रखा जाना अच्छा लगता है। उसे छोटे बच्चे की ‘मेड’ वाला रोल निभाना शुरू में भले ही अच्छा लगे लेकिन बाद में वो सिर्फ आपके दबाव में ऐसा करता है। इन सब चीजों का दबाव ऐसा भी हो सकता है कि वो आपसे ही दूर हो जाए। उसे आपसे मां वाला प्यार मिलना ही बंद हो जाए अरु इस वजह से वो आपसे दूरी महसूस करने लगे। इसलिए कभी-कभी की बात दूसरी है लेकिन नियम से रोज बड़े बच्चे को छोटे का ख्याल रखने की ज़िम्मेदारी देना सही नहीं है। 

 

दोनों को समय चाहिए

नन्हें बच्चों के साथ ऐसा होता है कि मां को करीब-करीब 24 घंटे उसके साथ रहना ही होता है। लेकिन इस दौरान बे बच्चे को मां का साथ नहीं मिल पाता है। वो खुद को अकेला समझने लगता है। इसलिए जरूरी है कि आप उसके साथ दिनभर में 1 घंटा ही सही लेकिन समय जरूर बिताएं। इसके लिए वो समय चुनिए जब छोटा बच्चा सो रहा हो। वो जब भी सोए आप बड़े बच्चे के पास पहुंचे और दिनभर की बातें जरूर करें। ये बात भी सही है कि जब छोटा बच्चा सोता है तब आप घर के दूसरे काम करने की सोचती होंगी। लेकिन बड़े बच्चे के साथ समय बिताना और घर के काम, एक साथ किए जा सकते हैं। इसके लिए परेशान न हों बल्कि बच्चे को काम की जगह ही बुला लें। उन्हें समझा दें, कि थोड़ा एड्ज्सटमेंट करना ही होगा। क्योंकि आप उनकी चिंता करती हैं इसलिए आपने ये तरीका निकाला है उनके साथ समय बिताने का। वो इसमें आपकी मदद करेंगे तो काफी चीजें आसान हो जाएंगी। 

 

छोटे के साथ खेलिए तो बड़े के साथ भी

क्योंकि दोनों बच्चों की उम्र में बड़ा अंतर होता है इसलिए वो दोनों में नहीं खेल पाते हैं। इस वक्त आप छोटे वाले को अपने साथ खिलना शूरू करती हैं। आपको लगता है बड़े बच्चे और उसके दोस्तों के साथ छोटा खेलेगा नहीं तो आप उसके साथ खेलना शूरू कर देती हैं। लेकिन इस बीच ऐसा तो नहीं कि बड़ा अकेला महसूस कर रहा हो। इस बात का निर्णय भी आपको खुद करना होगा। आपको देखना होगा कि छोटे के साथ समय बिताते-बिताते आप बड़े के साथ फन एक्टिविटी करना भूल ही जाएं। 

खेल भी हों आसान

बड़े बच्चे के साथ खेल खेलने के लिए आपको कहीं बाहर जानें या खिलौने तलाशने की जरूरत भी नहीं है। बस वही खेल चुन लीजिए जो आप बचपन में खेल करती थीं। इस तरह वो आपके बचपन से भी रूबरू होगा और उसे पारंपरिक खेल भी पता चलेंगे जैसे चिड़िया उड़ या हाइड एंड सीक। इन खेलों के साथ आप बच्चे के साथ बातें भी करती रहेंगी तो आपका उसके साथ कनैक्शन भी बनेगा। बच्चा आपको कुछ और बेहतर जानेगा। इस दौरान आप उससे उसकी शिकायतों के बारे में भी पूछ सकती हैं। वो आपसे खेल-खेल में ही अपने दिल की बात भी कह देगा। जैसे वो अफेन छोटे भाई या बहन के आने से खुश है लेकिन अकेला महसूस करने लगा है। या फिर उसको अच्छा लगता है कि उसका भी कोई भाई या बहन है। इस तरह की बातें आप दोनों के बीच रिश्ता और मजबूत ही करेंगी। 

जबजब वो करे मदद

जब-जब आपको छोटे बच्चे की देखभाल के लिए किसी की जरूरत हो और बच्चा आपकी मदद करे तो उसकी तारीफ जरूर करें। उसे बताएं कि वो आपके लिए कितना जरूरी काम कर रहा है। बच्चे को इस तरह से अपनी अहमियत समझ आएगी और परिवार का मिलजुल कर रहना भी। बच्चा समझेगा कि पूरे परिवार को एक साथ रहना चाहिए और एक दूसरे की मदद भी करनी चाहिए। इसी तरह परिवार एकजुट रह पाता है। यकीन मानिए इस एक तारीफ का बच्चे पर बहुत बेहतर असर पड़ेगा। वो आगे भी हर जरूरत पर छोटे भाई या बहन ही नहीं बल्कि बाकी लोगों की मदद को भी हमेशा आगे आता रहेगा। 

 

पेरेंटिंगसंबंधी यह लेख आपको कैसा लगा?अपनी प्रतिक्रियाएं जरूर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही स्वास्थ्य से जुड़े सुझाव व लेख भी हमें ईमेल करें editor@grehlakshmi.com

 

ये भी पढ़ें-

बच्चे को फ्रेंडली बनाने के11आसान टिप्स