पेरेंट्स बनना आसान काम नहीं है। यह आपको तब समझ में आया है, जब आप स्वयं पैरेंट्स बने हैं। माता- पिता की भूमिका के अलावा भी आपके पास दस काम होते हैं। जाहिर सी बात है कि कई दफा गुस्सा भी आता है और आप बच्चे पर चिल्ला उठती हैं। कहीं और का गुस्सा अपने लाडले पर निकाल बैठती हैं। लेकिन ऐसा करने से पहले क्या आपने कभी सोचा है कि आपका इस तरह से गुस्सा करना, उसे बातें सुनाना आपके बच्चे पर किस तरह का प्रभाव डाल सकता है।

तुम हमेशा गलत काम करते हो

वह छोटा बच्चा है, जाहिर है किसी भी काम को परफेक्शन की हद तक नहीं कर सकता। आप भी नहीं कर सकते। कोई नहीं कर सकता। इस बात को समझिए। सभी को गलती करने की इजाजत है। आपको यह समझने की जरूरत है कि अभी उसके सीखने की उम्र है। संभव है कि उसे आपने ऐसा काम करने को दिया हो, जिसे करने में उसकी रुचि न हो। उसे वह विषय पढ़ने के लिए कहा गया हो, जिसे पढ़ने में उसे अच्छा न लगता हो। बतौर अभिभावक, आपका काम है कि आप उसके मार्गदर्शक बनें, न कि अपनी राय उस पर थोपें।

तुम्हें खुद पर शर्म आनी चाहिए

यह बहुत ही गलत वाक्य है। इस तरह की बात करना बच्चों पर नकारात्मक असर डालता है। कई बच्चे होते हैं, जो दूसरों की अनदेखी करके अपने काम करते जाते हैं। शैतानियां करने से पीछे नहीं हटते। लेकिन इस तरह के शब्द कहने से बेहतर है कि आप उसे बैठकर शांति से उसकी गलती का अहसास दिलाएं। उसे बताएं कि अच्छे और बुरे में क्या अंतर है।

तुम्हारी उम्र में मैं ज्यादा जिम्मेदार थी

अपने बच्चे की हर समय तुलना करना किसी भी लिहाज से अच्छा नहीं है। खासकर अपने बचपन का उदाहरण देना तो वह बड़ी और पहली गलती है, जो माता- पिता करते हैं। आपके अंदर यह चिड़चिड़ापन उस उम्मीद से पैदा होती है, जो आपने अपने बच्चे से लगा रखी है।

तुम अपने भाई/ बहन की तरह क्यों नहीं हो

इस तरह की तुलना भी ठीक नहीं है। अपने ही बच्चों में तुलना करके आप उनह्ें एक- दूसरे के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं। इस तरह से उनके बीच मनमुटाव पैदा होगा और उनके बीच दूरी आएगी। आप स्वयं नहीं चाहते कि आपके बच्चे आपके लिएन कारात्मक सोचें या अपने भाई- बहन के लिए, इसलिए इस तरह के शब्द बोलने से खुद को रोकें।

मुझे अकेला छोड़ दो

बड़ों के ऊपर ही जिम्मेदारी होती है कि वे अपने से छोटों की देखभाल करें, उनका ध्यान रखें। हां, यह सच है कि कई बार हमें भी लगता है कि हम अकेले रहें। लेकिन बच्चे इतने नाजुक और कोमल दिल वाले होते हैं कि उन्हें यह समझ ही नहीं आता कि उनके मम्मी- पापा अकेले क्यों रहना चाहते हैं। इस तरह के वाक्य बच्चों को तनाव में डाल देते हैं, उन्हें लगता है कि उनके मम्मी- पापा को उनकी जरूरत नहीं है। इसलिए आपको धैर्य रखने की जरूरत है, उसे कुछ भी बुरा कहने से बचिए।

तुम मुझे हमेशा दुखी करते हो

कई बार ऐसा होता है कि बच्चे कुछ ऐसा कर जाते हैं, जो उनके मम्मी- पापा को अच्छा नहीं लगता। उनके खिलाफ काम कर जाते हैं। ऐसा बच्चे जानकर नहीं करते हैं, हां कुछ बच्चे होते हैं जो जानकर भी ऐसा करते हैं। लेकिन इस तरह के वाक्य कहने से आपके बच्चे को अपने निर्णय पर खराब महसूस होगा। संभव है कि वह आपको खुश करने के लिए आपकी मांगों को पूरा करे लेकिन इस तरह से आप उसके खुश रहने के हक को उससे ही छीन रहे होते हैं। अपने बच्चों को स्वयं निर्णय लेने दें।

अच्छा होता कि तुम नहीं होते

इस तरह के वाक्य अमूमन माता- पिता भावनाओं में बहकर कह देते हैं और बाद में पछताते हैं। आप तो मन ही मन में पछता कर चुप रह जाते हैं लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आपके इस वाक्य का आपके लाडले पर क्या असर हुआ है। वह अंदर से दुखी हो जाता है और उसे अपने जन्म लेने पर अफसोस होने लगता है। यह सबसे दुखी बात है, जो आप अपने बच्चे से कह बैठते हैं। चाहे कितनी ही बुरी स्थिति क्यों न हो, इस तरह के वाक्य कभी भी न कहें, जिससे आपको जीवन पर पछताना पड़े।

अपने खराब दोस्तों का साथ छोड़ो

क्या हम बड़े दोस्त बनाने से पहले सोचते हैं? नहीं। तो भला बच्चे कैसे सोच सकते हैं? अंतर यह हैकि हम बड़ों को पता है कि हमें बुरे लोगों से कैसे दूर रहना है और बच्चों को इस बारे में नहीं पता रहता। उनके दोस्त उनके लिए सब कुछ होते हैं। इसलिए आप उन्हें अचानक उन दोस्तों को छोड़ने के लिए नहीं कह सकते हैं। इसके लिए लगातार कोशिश आपको ही करनी होगी, उनकी बुराइयों को धीरे- धीरे दिखाकर।

तुम बिल्कुल अपने पापा की तरह हो

सभी पति- पत्नी अपने रिश्ते में सौ फीसद खुश नहीं होते हैं। शिकायतें तो हर रिश्ते में होती हैं। फिर उन शिकायतों और गुस्से को बच्चों पर क्यों निकालना? एक- दूसरे के बारे में बुरी बातें बोलकर बच्चों पर थोप देना कहां की भलाई है। इसलिए, जैसे ही आप अपने जीवनसाथी की बुराई अपने बच्चों से करने लगते हैं, वह प्यार, इज्जत और सम्मान देने से भागने लगता है। आज वह आपके जीवनसाथी की इज्जत करना छोड़ेगा, कल आपकी छोड़ देगा।

तुम परफेक्ट नहीं हो

आप उसे परफेक्ट बनाना चाहते हैं लेकिन आपको यह समझना होगा कि परफेक्शन जैसी कोई चीज नहीं होती है। अपने बचपन को याद कीजिए, अपनी गलतियों को याद कीजिए, आप अपने माता- पिता को किस तरह से परेशान किया था। इस रिश्ते में आप बड़े हैं तो आपको ही समझने की जरूरत है।

 

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