ये हौसला… ये कारवां…
हम किसी से कम नहीं
जब महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलना भी मुश्किल था उस वक्त कैप्टन इंद्राणी ने आसमान में जगह बना ली और बन गईं एशिया की पहली महिला पायलट। अब उनका सफर समाज की तरफ चल पड़ा है।
संघर्ष से सफलता तक : परिवार में कोई महिला काम नहीं करती थी। इसलिए उन्हें अपने सपने को पूरा करने का बीड़ा खुद ही उठाना पड़ा। अनेक परेशानियों का सामना करते हुए अपनी पहचान बनाना ही है इंद्राणी का जज्बा।
लिट्रेसी इंडिया का कारवां : अब उन्हें समाज के लिए भी कुछ करना था। ये था लिट्रेसी इंडिया के तहत गांव की महिलाओं और बच्चों के विकास के लिए आगे आने का प्रण। पांच बच्चों से शुरू हुआ लिट्रेसी इंडिया का सफर आज 50,000 लोगों के साथ आगे बढ़ रहा है जिसमें महिलाएं और युवा शामिल हैं।
विमेन इंटरप्राईज : महिलाओं के समग्र विकास के लिए इंद्राणी ने विमेन इंटरप्राइजेज में महिलाओं को क्राफ्ट से जोड़ा। दूर दराज गांव की महिलाओं की कारीगरी कॉरपोरेट सेक्टर तक पहुंचाना, साथ ही देश विदेश में उनके हुनर का प्रचार-प्रसार करना इंद्राणी की बड़ी उपलब्धि है। टेक्नोलॉजी एजुकेशन पर बल : लिट्रेसी इंडिया के साथ इंद्राणी ने टेक्नोलॉजी इन एजूकेशन पर भी ध्यान दिया। इसके तहत सड़कों पर भीख मांगते गरीब बच्चे के लिए ‘ज्ञानतंत्र डिजिटल दोस्त नामक 275 घंटे का कोर्स शुरू करवाया गया, जिसमें साइबर कैफे में बच्चों को बैठाकर उन्हें क ख ग से लेकर पांचवी तक का सेलेबस कवर करवाया जाता है। इसके अलावा चाइल्ड एब्यूज के बारे में लड़कियों को अवगत कराया जाता है।
सफलता के मंत्र
1. साहस को बनाएं हथियार
2. दृढ रहकर स्वीकारें चुनौतियां
3. हमेशा दूसरों के बारे में सोचें
कैप्टन इंद्राणी सिंह
सीनियर एयर इंडिया पाइलट, लिट्रेसी इंडिया एंड इंधा क्राफ्ट, फाउंडर और
