मैसूर पैलेस भारत के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शुमार है
मैसूर पैलेस ताज महल के बाद भारत के सबसे आकर्षित पर्यटक स्थलों में शामिल हैं और यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या प्रतिवर्ष 6 मिलियन से भी अधिक हैं।
Mysore Palace Tour: कर्नाटक के मैसूर शहर में स्थित मैसूर पैलेस भारत के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। यह एक बहुत ही ख़ूबसूरत ऐतिहासिक ईमारत है जिसे देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक आते हैं। मैसूर पैलेस को अंबा विलास पैलेस के नाम से भी जाना जाता है जोकि शाही परिवार का महल रहा है और आज भी इस पर उन्हीं का अधिकार है। आमतौर पर मैसूर को ‘महलों के शहर’ के नाम से जाना जाता हैं। एक भव्य किले सहित सात महल इस शहर की शोभा बढ़ा रहे हैं। मैसूर पैलेस ताज महल के बाद भारत के सबसे आकर्षित पर्यटक स्थलों में शामिल हैं और यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या प्रतिवर्ष 6 मिलियन से भी अधिक हैं। अगर आप मैसूर पैलेस और इसके नजदीकी पर्यटक स्थलों के बारे में जानना चाहते हैं तो हमारे इस लेख को पूरा पढ़े।
मैसूर पैलेस का इतिहास

मैसूर किले का इतिहास बहुत पुराना हैं। यह कई शासको के शासन को देख चुका है। ऐसा बताया जाता है कि 14वीं शताब्दी दौरान यदुराया ने किले के अंदर पहला महल बनबाया था। इस महल को कई बार तोडा गया था। पुराने पैलेस को जला दिया गया था। वर्तमान की संरचना जिसे हम मैसूर अथवा अम्बा पैलेस के नाम से जानते हैं, इसका निर्माण 1897 और 1912 के समय के मध्य किया गया था। टीपू सुल्तान के देहांत के बाद 1799 महाराजा कृष्णराज वाडियार तृतीय ने मैसूर को अपनी राजधानी बनाया था।
मैसूर पैलेस की संरचना

मैसूर पैलेस की सबसे ख़ास बातों में इसकी संरचना है। इस महल में गुंबदों की स्थापत्य शैली बहुत ही बेमिशाल है। इस को हिंदू, राजपूत, मुगल और गोथिक शैलियों के मिश्रण के साथ इंडो-सरैसेनिक के रूप में तैयार किया गया है। मैसूर किले की यह तीन मंजिला ईमारत है जिसमें संगमरमर की गुम्बद बनाया गया है। यह पूरा किला एक ख़ूबसूरत बगीचे से घिरा हुआ है। इस महल में तीन प्रवेश द्वार कई महत्वपूर्ण सुरंगे बनी हुई हैं। इसके अलावा इस महल में धन, समृधि और भाग्य की देवी लक्ष्मी की मूर्ती भी स्थित है।
मैसूर पैलेस के आसपास के पर्यटन स्थल
मैसूर का किला एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है। यह इतना ख़ूबसूरत और लोकप्रिय है कि इस जगह पर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों कि लाइन लगी रहती है। लेकिन मैसूर प्लेस के अलावा भी मैसूर सिटी में कई पर्यटक स्थल हैं जहां पर आप घूम सकते हैं।
चामुंडेश्वरी मंदिर

चामुंडेश्वरी मंदिर मैसूर पैलेस के कुछ ही किमी की दूरी पर स्थित है। जिस पहाड़ी की चोटी पर यह मंदिर बनाया गया है उसे चामुंडी चोटी के नाम से जाना जाता है। 51 शक्ति पीठो में से एक होने के नाते इस मंदिर की मान्यता बहुत ही ज़्यादा है और इसके दर्शन के लिए दूर दूर से लोग आते हैं। मुख्य शहर से 13 किमी दूर स्थित इस मंदिर पर आपको भी जाना चाहिए।
रंगनाथस्वामी मंदिर

श्रीरंगपटना का रंगनाथस्वामी मंदिर हिंदू भी मैसूर किले के पास ही स्थित है। कावेरी नदी के किनारे पर स्थित यह दर्शनीय मंदिर पूरी तरह से भगवान रंगनाथ को समर्पित है और राज्य के 5 सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थानों में से एक है। कावेरी नदी के द्वारा बनाए गए दीप पर स्थित यह मंदिर सबसे ऊंचे टॉवर के रूप में जाना जाता है। इस जगह पर पहुँचकर बहुत ही ज़्यादा सकून मिलता है।
ललिता महल

मैसूर पैलेस के नजदीक घूमने वाली जगह की बात की जाए तो एक नाम ललिता महल का भी आता है। यह मैसूर का दूसरा सबसे बड़ा और भव्य महल है। हालाँकि वर्तमान में एक होटल में तब्दील कर दिया गया है और भारत के सबसे भव्य होटलों में शुमार हैं। ललिता महल चामुंडी पहाड़ियों के पास ही स्थित है। चामुंडेश्वरी मंदिर जाते वक़्त भी इस जगह पर जाया जा सकता है।
जय लक्ष्मी विलास हवेली

जयलक्ष्मी विलास हवेली मैसूर विश्वविद्यालय के अंदर स्थित है। यह मैसूर पैलेस के आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। जयलक्ष्मी विलास हवेली में कलाकृतियों का एक अनमोल संग्रहालय है। इस स्थान पर आकर इस जगह से जुड़े अनेक वस्तुओं और कलाकृतियों को देखा जा सकता है। इस जगह पर पर्यटक देश के कोने कोने से आते हैं आपको भी इस जगह पर आना चाहिए।
जगनमोहन पैलेस

मैसूर पैलेस के नियरेस्ट टूरिस्ट प्लेस में एक नाम जगनमोहन पैलेस का भी आता है। यह मैसूर सिटी का एक बहुत ही प्रमुख महल हैं। इस महल को अब हालाँकि एक आर्ट गैलरी और समारोह हॉल में बदल दिया गया हैं। यह महल मैसूर सिटी के 7 महलो में से एक है। जिसकी वजह से इस जगह पर सैलानियों की भीड़ रहती है। इस जगह पर आकर यहाँ की आर्ट गैलरी को ज़रूर देखना चाहिए।
खुलने बंद होने का समय

मैसूर पैलेस खुलने का समय प्रति दिन सुबह 10 बजे का रहता है, जबकि किले के बंद होने का समय शाम को 5:30 बजे का रहता है। कुछ लोग इस जगह पर समय से पहले ही पहुंच जाते हैं ताकि भीड़ से बचे रहें।
मैसूर पैलेस का प्रवेश शुल्क
मैसूर किले को घूमने से पहले टिकट लेना होता है जोकि यहां कि एंट्री के लिए अतिआवश्यक है। मैसूर किले के प्रवेश शुल्क की बात करें तो वयस्कों के लिए 40 और बच्चों के लिए 20 रूपये का टिकट लगता है। स्कूल के छात्रों के लिए यह शुल्क मात्र 10 रूपये है। विदेशी पर्यटकों के लिए 200 रूपये है।
सबसे अच्छा समय

मैसूर पैलेस घूमने के लिए अक्टूबर से फरवरी तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है। इस समय मौसम काफ़ी ठंडा रहता है जोकि पर्यटकों के घूमने के लिए अनुकूल होता हैं। हाँ, इस मौसम में सर्द रहती है इसलिए कपड़े आदि की पैकिंग उसी हिसाब से करें।
मैसूर शहर में कहां रुके
मैसूर किला और इसके प्रमुख पर्यटक स्थल घूमने के बाद यदि आप यहां ठहरना चाहते हैं तो मैसूर सिटी में आपको लो-बजट से लेकर हाई-बजट तक के आवास आपको मिल जाएंगे। आप अपने बजट और अपनी सुविधानुसार जगहों का चुनाव कर सकते हैं।
मैसूर कैसे पहुंचे

मैसूर पैलेस की यात्रा पर जाने के लिए आप हवाई मार्ग, ट्रेन और बस में से किसी का भी चुनाव कर सकते हैं। मैसूर पर्यटन स्थल सभी तरह के यातायात साधनो से संपन्न हैं। मैसूर का सबसे निकटतम हवाई अड्डा नया बैंगलोर है, जोकि मैसूर शहर से लगभग 170 किलोमीटर की दूरी पर है। बेंगलुरु एअरपोर्ट से मैसूर जाने के लिए आप बस, ट्रेन और टैक्सी के माध्यम से जा सकते हैं। मैसूर रेलवे स्टेशन शहर के केंद्र से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। मैसूर पैलेस सड़क मार्ग के बहुत अच्छी तरह जुड़ा है।
