वास्तु में जल स्थान एवं दिशा का भी महत्त्वपूर्ण स्थान है। भूखण्ड को क्रय करने के पहले ये जानकारी जरूर लें कि इस भूखण्ड को क्रय करने के बाद भवन निर्माण करने के पहले कूप, बोरिंग या अण्डरग्राउण्ड टैंक का निर्माण करवा लेना चाहिए। उसी जल से निर्माण कार्य करें। मूलत: दिशाएं चार होती हैं, उपदिशाएं भी चार होती हैं, उपदिशाओं की दो-दो उपदिशाएं होती हैं। भूखण्ड पर कूप या बोरिंग बनाते समय 26 उपदिशाओं का ध्यान रखकर बनाना चाहिए। निम्नलिखित दिशाओं के अनुसार कूप बनाने का अलग-अलग गुण एवं अवगुणों का वर्णन कुछ इस प्रकार है-
