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स्वयं का दीया बनो – ओशो

अंधेरे में जो अकेले चलने का साहस करता है, बिना प्रकाश के उसके भीतर साहस का प्रकाश पैदा होना शुरू हो जाता है और जो सहारा खोजता है, वह निरंतर कमजोर होता चला जाता है। भगवान को आप सहारा न समझें, और जो लोग भगवान को सहारा समझते हैं, वे गलती में हैं। उन्हें भगवान का सहारा नहीं उपलब्ध हो सकेगा।

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विश्वास की जड़ें उखाड़ फेको – ओशो

इस देश का मन-मानस, प्रतिभा-पूरे अतीत के इतिहास में, विचार पर नहीं विश्वास पर आधारित रही है। और जो देश, जो मन, जो चेतना विश्वास पर आधारित होती है, वह अनिवार्यरूपेण अंधी हो जाती है, उसके पास सोच-विचार की क्षमता क्षीण हो जाती है।

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