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आखिर क्यों करना पड़ता है एक पिता को अपने कलेजे के टुकड़े का कन्यादान

हिंदू धर्म में शादी में होने वाली हर रस्म और रीति रिवाज का काफी महत्व होता है। शादी में होने वाली रस्मों का कहीं न कहीं भावात्मक जुड़ाव होता है। शादी में जहां दो अलग-अलग परिवार एक एक बंधन में बंधते हैं। वहीं दो आत्माओं का भी मिलन होता है। लेकिन शादी की रस्मों के दौरान एक ऐसी रस्म है जो बेहद ही खास और इमोश्नल होती है और ये रस्म है कन्यादान। ये एक पिता और पुत्री के बीच के भावात्मक रिश्ते को दर्शाता है। इस रस्म को निभाना न सिर्फ पिता बल्कि एक पुत्री के लिए भी काफी कष्टकारी होता है। क्योंकि एक पिता अपने कलेजे के टुकड़े यानी अपनी बेटी को किसी ताउम्र किसी और को सौंपता है। अपने शरीर के हिस्से को किसी को और सौंपना आसान नहीं होता है। आइए जानते हैं कन्‍यादान का महत्‍व और कैसे निभाई जाती है यह रस्‍म…

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