माया को उसके सास-ससुर बात-बात पर ताने मारते। उसका पति तो उसे अधिक दहेज न लाने के कारण रोज तानों के साथ-साथ थप्पड़-मुक्के भी मारने लगा। माया की सुबह गलियों से शुरू होती और शाम लात-घूसे लेकर आती। ये सब सहना तो माया की अब नियति बन गया था। रोज-रोज की दरिंदगी को सहते-सहते माया के आंसू सूख चुके थे…
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असहाय – गृहलक्ष्मी कहानियां
घर में पानी भरपूर आता था। हमेशा पानी से हौज भरा रहता था। घर में रहने वाले चार लोग, उसमें भी दो बच्चे और सास बहू। सुबह-सुबह मां जी की आंख खुली तो नित्य कर्म से निवृत्त हो सोचा नहा लूं, तब तक पानी भी आ जाएगा और जितना पानी नहाने में खर्च होगा, फिर […]
