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सॉफ्ट लैंडिंग

निर्मल के सिर से पिता का साया बचपन में ही उठ गया था। पिता के असमय गुजर जाने के बाद उसके परवरिश की पूरी जिम्मेदारी उसकी मां निरूपा जी के कंधों पर आ गई। दुख के इस भंवर में अचानक घिर आई उनकी जीवन नौका बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गई थी, परंतु निर्मल के उज्जवल भविष्य को देखते हुए अपनी इस टूटी हुई नौका को फिर से जोडऩे में वे पूरे प्राणपन से लग गईं।

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