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गृहलक्ष्मी आॅफ द डे- सुषमा के के

शादी के बाद पति के खाने के शौक ने सुष्मा जी का कुकिंग की ओर रुझान ऐसा बढ़ाया की वो इसे एंजॉय करने लगीं। शुरूआत की सोनी टी.वी. के ‘रसोई शो’ से जहां उन्होंने प्रथम पुरस्कार जीता और यही जीत उनकी जिन्दगी का टर्निग पॉइन्ट साबित हुआ। उन्होंने देश की सभी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं , दूरदर्शन चैनलों, निजी कम्पनियों द्वारा आयोजित पाक कला प्रतियोगिताओं में जून 2016 तक 97 पुरस्कार जीतकर एक रिकार्ड बनाया और इस वर्ष 2016 में तीसरी बार लिम्का बुक ऑफ रिकार्डस् में अपना नाम दर्ज करवाया। आज पाककला पर उनकी तीन पुस्तकें हिन्दी व अंग्रेजी में बाजार में उपलब्ध हैं।

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“गृहलक्ष्मी आॅफ द डे”- कामिनी श्रीवास्तव

कामिनी के पिता रेलवे में ड्राइवर थे। रामनवमी के दिन एक आकस्मिक दुर्घटना में कामिनी शूटिंग कर रहे इंजन के नीचे आ गयी। इस दुर्घटना में उनके दोनों हाथ एवं बाएं पैर की पाॅंचों उंगलियां कट गयी। छः वर्ष की हुई तो माता-पिता ने उन्हें पैरों से लिखना सिखाया, लेकिन जब कामिनी ने अपने पिता को 26 जनवरी के दिन 18 मिनट तक पतले तार पर चलकर लोगों को दिखाते देखा तो वो समझ गई कि इन्सान के अन्दर इच्छा शक्ति हो तो वह कुछ भी कर सकता है। आज कामिनी जॉब करती हैं और उनकी एक कविता संग्रह भी प्रकाशित हो चुकी है।

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