पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात!सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात!! धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार!दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार!! ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर!कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर!! प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप!बस दो-तीन गिलास है, हर […]
Category: कविता-शायरी
मेरे सपने
बाल कहानी नन्ही सी आंखों में मेरे, नन्हे नन्हे सेहैं सपनेकुछ औरों के लिए हैं लेकिन कुछनितांत ही मेरे अपने।सपने देखे हैं, मैं बनकर मदर टेरेसाकुछ कर जाऊंमिटा गरीबी भुखमरी, मैं इस समाजके काम तो आऊंनन्हा सा एक सपना मेरा, कल्पनाचावला बन जाऊं।अंतरिक्ष में घूम-घूम कर, नित नयाइतिहास बनाऊंसपना है मेरी आंखों में, नारी का […]
नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब
यदि आपके सवाल को अनाड़ीजी देते हैं पत्रिका में पहला, दूसरा व तीसरा स्थान तो आप पा सकते हैं प्रोफेसर अशोक चक्रधर की हस्ताक्षरित पुस्तकें। आप अपने सवाल यहां पोस्ट कर सकते हैं या anadi@dpb.in पर भेज सकते हैं। कृपया अपने सवाल के साथ अपना पता अवश्य लिखें।
एक बेटी ने बताई अपनी कहानी इस कविता की जुबानी..
कोख में आई जब मैं माँ के .. कोख में आई जब मैं माँ के ..दादी ने दुआ दी पोते के लिए,बुआ ने मन्नत मांगी भतीजे के लिए पापा ने कहा मेरा लाल आ रहा हैं,मेरे वंश का चिराग आ रहा हैं …… तब माँ ने मुझसे हौले से कहाडर मत मेरी रानी […]
हास्य और व्यंग से भरपूर है ये कविता, जरूर पढ़ें
इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैंजिधर देखता हूं, गधे ही गधे हैं गधे हँस रहे, आदमी रो रहा हैहिन्दोस्तां में ये क्या हो रहा है जवानी का आलम गधों के लिये हैये रसिया, ये बालम गधों के लिये है ये दिल्ली, ये पालम […]
शहीद जवान के बच्चे की ये कविता पढ़कर आपके भी छलक पड़ेंगे आंसू
ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये हैं?_________ ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये हैं? माँ मेरा मन बात ये समझ ना पाये है, ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये हैं? पहले पापा मुन्ना मुन्ना कहते आते थे, टॉफियाँ खिलोने साथ में भी लाते थे। गोदी में उठा के खूब खिलखिलाते […]
तेजाब खोखला नहीं कर पाया मेरे हौसलों को
लड़कियों के चेहरे पर तेजाब डालने वालों के लिए ये कविता एक करारा जवाब है।जो लोग ऐसी कुत्सित मानसिकता रखते हैं ,उन्हें ये पता होना चाहिए कि वो किसी की बाहरी सुंदरता को नुकसान पहुंचा सकते हैं लेकिन आंतरिक सुंदरता को नहीं ।
काश! कि एक गृहणी की भी सरकार ने तनख्वाह तय की होती..
(एक अनुत्तरित सवाल) काश! कि एक गृहणी की भी सरकार ने तनख्वाह तय की होती.._________________ तुम दिन भर करती क्या हो …?हाँ , मैं सचमुच दिन भर करती भी क्या हूँ?मैं एक सामान्य सी गृहणी सुबह से शाम तक जो बिना किसी शुल्क के बनाये रखती है संतुलन सारे परिवार का मैं भला […]
माँग की सिंदूर रेखा
डॉ. कुमार विश्वास हिन्दी के एक अग्रणी कवि तथा सामाजिक-राजनैतिक कार्यकर्ता हैं। कविता के क्षेत्र में शृंगार रस के गीत इनकी विशेषता है। पढ़िए उनकी कविता ‘माँग की सिंदूर रेखा’ ….
नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब
नारी अनाड़ी मूर्ख दिवस के दिन किसी का जन्मदिन हो तो उसे बधाई देने का क्या तरीका होगा, कृपया बताएं? शालिनी कालड़ा करनाल (हरियाणा) मूर्ख दिवस यानी एक अप्रैल की तिथि तो गई, अब तो आ गया महीना मई।ग्यारह महीने पहले क्यों बताएं बधाई देने का तरीका,अगले वर्ष मार्च में पूछना यही होगा सही सलीका। आपके सुंदर हस्ताक्षर पर न्यौछावर […]
