औरत हो या मर्द यहाँ तक बच्चे भी “ये करो ” , जैसे आदेश सुनना पसंद नहीं करते .मसलन “तौलिया यहाँ क्यों रखा है,अपनी जगह रखो” या “जूता ऐसे नहीं पॉलिश करके पहनो”….

अच्छा भला कोई इंसान रिलेक़्स मूड में बैठा हो या कोई काम कर रहा हो और सामने से कोई अन्य व्यक्ति उसके पास पहुँचकर उसे वॉशिंग मशीन ,या डिश्वॉशर भरने के लिए कहे तो आप समझ सकते हैं. उस व्यक्ति की क्या प्रतिक्रिया होगी? या तो ,बेवजह का झगड़ा शुरू हो जाएगा या वो व्यक्ति कुढ़ना शुरू कर देगा. क़ई बार तो ऐसी बातों पर हर रोज़ की गयी तकरार आपसी तनाव व घ्रणा की वजह बन जाती है . रिश्ते टूट जाते ,परिवार बिखर जाते है. क्योंकि कोई इंसान किसी से इस तरह की बात की उम्मीद नहीं करता और न ही बर्दाश्त करता है. इसके अतिरिक्त कुछ अन्य कारण भी हैं जिनके कारण लोग “ये करो “जैसी बातें सुनना पसंद नहीं करते

इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि हर कोई अपनी स्वत्रंता चाहता है और रोक-टोक एक सीमा तक ही अच्छी बात है. अधिकांश लड़के अपनी पार्टनर के ड्रेसेस को लेकर टोकते रहते हैं जो उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं आता. अगर आपकी आदत भी यही आदत है कि अपनी गर्लफ्रेंड को हर बात में चोकने की तो उसे सुधार लें.

1-अपना काम अपने तरीक़े से करने  की आदत हर इंसान में शुरू से ही होती है. बच्चों को सिखाया भी यह जाता है कि “अपना काम ख़ुद करो”जब ये बात जड़ में पनप चुकी हो तो उसे उखाड़कर फेंकना इतना आसान नहीं होता.

2-हमें लगता है सामने वाला हमें नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा है.हमारी सही बात भी उसे ग़लत लग रही है.

3-जब कोई हमें ‘ये ‘करने को कहता है,तो हमें लगता है या तो जो हम कर रहे हैं वो करना तुरंत बंद कर दें,या वो करना शुरू कर दें जो हम नहीं करना चाहते.

4-हमें लगता है कि हम एक छोटाबच्चा हैं या एक कठपुतली ,जिसकी डोर,सलाह देने वाले ने अपने हाथों में मज़बूती से थाम रखी है.

5-थोड़े समय तक तो हम चुपचाप बात मान भी लेते हैं,लेकिन फिर घुटन सी होने लगती है यह सोचकर कि हम कब तक एक पिंजरे में क़ैद रहेंगे . एक महिला बताती हैं “पहले कहा गया घर में रहो फिर मास्क पहन कर निकलो” आगे क्या होगा कोई नहीं जानता. डर शुरुआत में इतना नहीं लगता, जितना बाद में लगता है.

6-मनोबल टूटता हुआ सा नज़र आता है.

सुझाव-

4-यदि आपका क़रीबी आपकी कोई बात या आदत पसंद नहीं करता तो ,उस प्यार से समझाएँ कि उतावले होकर अपना ज्ञान या “अपनी केअर” दिखाकर लगातार समझाईश करने के बजाय ,धैर्य से समझाकर आपकी आदतों में बदलाव लाने का प्रयास करें .धैर्य से समझाने के बाद वो आपको इसे, व्यवहार में उतरने के लिए भी समय दें.

३- यदि वो ,आपको कुछ करने की सलाह देने की चाहत रखता हैं तो अपना दिल भी बड़ा रखें. हो सकता है,आप भी उसे सलाह देना चाह रहे हो.क्योंकि कोई भी व्यक्ति “पर्फ़ेक्ट ” नहीं होता.

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