सास को यूं ही सास और ससुराल को यूं ही ससुराल नहीं कहते

राकेश …. ओ…राकेश …..कहां है रे तू…..जब देखो तब काम करता रहता है कभी अपनी मां के पास भी बैठ लिया कर…… हा मां क्या हुआ…… बेटा अब मेरी उम्र हो गई है अब मुझसे घर के कामकाज नहीं संभाले जाते……अरे मां बस इतनी सी बात रुको मैं कुछ इंतजाम करता हूं….. मां कल से घर में महाराज और एक नौकरानी काम पर आएंगे…… अरे बुद्धू….. तू तो कुछ समझता ही नहीं है मुझे नौकरानी की नहीं, घर में एक बहू की जरूरत है …….. क्या मां अभी मेरी उम्र ही क्या है…….. सुन मुझे कुछ नहीं सुनना है। मैंने तेरे  लिए एक एक लड़की ढूंढ ली है। तो एक बार उसे देख फिर बता कि तुझे क्या करना है…. पर मां….पर बर कुछ नहीं..।।… 

अच्छा ठीक है, मां तुम कहती हो तो देख लेता हूं…। राकेश जब श्रद्धा से मिलने जाता है तो उसे श्रद्धा पसंद आती है… कुछ ही महीनों बाद श्रद्धा और राकेश की शादी हो जाती है।

पुराने जमाने की सास

शादी के कुछ दिन बाद राकेश मां से बोलता है कि मां अब तुम सिर्फ आराम करो, सारी जिम्मेदारियां अब अपनी बहू को दे दो। राकेश की इस बात पर मां भड़क जाते हैं जुम्मा 4 दिन आए हुए नहीं! यह लड़की अभी से घर संभाल लेगी यहां पूरी जिंदगी लग गई।। राकेश को कोई जवाब नहीं सूझा। एक दिन मां ने कहा मंदिर में पंडित को रुपए दान करने हैं। राकेश की मां बहुत धार्मिक भी थी। वजह बताते हुए बोली ……..बेटा तुम्हारी तरक्की के लिए मंदिर में पूजा करने को बोला है पंडित जी ने…….तभी श्रद्धा बोल पड़ी ये पूजा पाठ सब आजकल के ढोंग है ये पंडित लोग हमलोगो की आस्था को फायदा उठाते हैं …….सास ने बात काटते हुए बोला …… रहने दे बेटा तेरी बीबी मेरी पूजा पाठ को ढोंग का नाम दे रही है…. वैसे भी सारे घर की मालकिन ये ही मैं तो सिर्फ घर की एक आम सदस्य हूं …..इतना कह कर चली जाती हैं और राकेश फैसला नहीं कर पाता कि किस का साथ दूं ……

नये जमाने की सास

शादी के कुछ दिन बाद राकेश मां से बोलता है कि मां अब तुमको आराम करना चाहिए। सारी जिम्मेदारियां अब अपनी बहू को सौंप दो। राकेश की मां इस बात पर हंसते हुए “हम ही भर्ती है….. एक बार टालने की कोशिश करती है लेकिन राकेश कहता है मैं कब तक तुम जिम्मेदारियां संभालती रहोगी अब बहू आ गई है तो उसे को संभालने दो….. राकेश की मां बिना मन के सारी चाबियांं, श्रद्धा को सौंप देती है…..सास सोचती है कि बहू को आए अभी कुछ ही दिन हुए हैं लेकिन अब जिम्मेदारियां नहींं सीखेंगी तो कब समझेगी? वैसे भी श्रद्धा एक पढ़ी-लिखी और मॉडर्न जमाने की बहू है। जिसको पुराने रीति-रिवाजों के तौर तरीके नहीं मालूम। 1 दिन श्रद्धा अपनी सास से मंदिर में कुछ दान करने के लिए कहती हैंं। इस पर वह अपनी बहू से बोलतीं हैं देख बेटा दान देने को कुछ भी दे दो लेकिन यह सब अंधविश्वास है ,व्यापार में तरक्की मेहनत करने से आती है ना कि पूजा पाठ करने से। तू कहां इन पुराने ढकोसला में पढ रही है। चल आज शॉपिंग के लिए चलते हैं।

यह है नए जमाने की सास लेकिन सास तो सास ही है।

अब आते हैं मुद्दे पर

सास को यूं ही सास और ससुराल को यूं ही ससुराल नहीं कहते। सास अपने घर की हाकिम होती है और ज्यादातर वह बहू को अपने मातहत ही पसंद करती है। साधारण शब्दों में समझें तो सास और बहू के बीच वरियता, तवज्जो या यूं कहें वट की मूक लड़ाई होती है। जिसके चलते उनके बीच एक अलग ही तरह की हलचल रहती है। जिसमें कई बार सास इनसिक्योर होती है और घर में अपनी पदवी या जगह बनाए रखने के लिए वह कुछ भी कर सकती है। 

इनसिक्योर सास और उसकी बहू के बीच एक ऐसा रिश्ता बन कर तैयार होता है जिसमें चालें, तकरारें, गुस्सा, छींटाकशी सरीखी तमाम बातें होती हैं और सास का बहू के साथ यह बर्ताव रिश्तें में खटास और कड़वाहट घोल देता है। इस प्रवृति की सासों को जब कभी बहू से खुद के लिए खतरा महसूस होने लग जाता है तो उसके माथे पर बल आने लग जाते हैं और वह खुद की स्थिति को बरकरार रखने के लिए साम,दाम, दंड, भेद सभी नुस्खों को अपनाना शुरू कर देती है। इसके लिए वह बहू से बोलबंद कर सकती है, गुस्सा हो सकती है, उस पर उंगली उठा सकती है या फिर कूटनीतिक बिसात भी बिछा सकती है। ऐसे में बहू खुद को ऐसे भंवर में पाती है जिसमें फंसने का कई बार उसको अंदाजा भी नहीं हो पाता। 

यह है उपाय 

चाहे घर हो या बाहर जहां कहीं भी इनसिक्योरिटी का भाव होगा वहां विवाद, मतभेद, खुद को बेहतर और दूसरे को कमतर साबित करना सरीखे काम होंगे ही। लिहाजा, इनसिक्योरड सास की बहू को ऐसी परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। ऐसे में सबसे पहला गुरू मंत्र है शांति और धैर्य। आपका यह गुण आपको छोटी-मोटी समस्याओं से पार पाने में मददगार होगा। ध्यान दीजिए अगर आप के व्यवहार की वजह से सास इनसिक्योड फील करती हैं तो बेहतर होगा कि आप अपने बर्ताव में थोड़ा परिवर्तन लाएं। सास को पूरी तवज्जों दें।  समय-समय पर उनको स्पेशल फील कराएं। ताकि उन्हें आप से कोई खतरा महसूस न हो। ऐसा करने पर भी यदि स्थिति बेहतर होती नहीं दिखती तो आपको अपनी आंखें, कान खुले रखने होंगे। यानी आपको घर में चल रही गतिविधियों पर थोड़ा ध्यान रखना होगा ताकि आप अपने खिलाफ बुने जा रहे षड्यंत्रों को न सिर्फ भांप सकें बल्कि खुद की उससे हिफाजत भी कर सकें। इतने पर ही बस नहीं होता आपको घर बाकि लोगों का विश्वास भी जीतना होगा ताकि मौका पडऩे पर आप अपनी बात को न सिर्फ सबके सामने रख पाएं बल्कि खुद को साबित भी कर सकें।

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