शादी का रिश्ता वैसे तो अटूट रिश्ता माना जाता है और कहा जाता है कि ये एक ऐसा बंधन है जो स्वर्ग से ही तय होकर आता है। लेकिन कई बार आपसी सूझबूझ और सामंजस्य की कमी से ये रिश्ता ज़्यादा दिनों तक टिक नहीं पाता। छोटी-छोटी लड़ाइयां बड़े झगड़ों का रूप ले लेती हैं और एक दूसरे के साथ एक पल भी गुज़ारना दूभर हो जाता है। ऐसे में महिलाओं के ऊपर एक दबाव बन जाता है जिसकी वजह से न चाहकर भी वो शादी के रिश्ते को निभाती हैं। आज हम बात कर रहे हैं ऐसे ही कुछ कारणों के बारे में जिनकी वजह से महिलाऐं ये रिश्ता न चाहकर भी निभाती हैं। 
 
समाज का डर 
शादी के समय महिलाओं को ये पाठ पढ़ाया जाता है कि वो अब माइके की दहलीज़ को छोड़कर ससुराल में प्रवेश कर रही हैं। इसलिए अब दोनों परिवारों की ज़िम्मेदारी उनके ऊपर है। यही सोचकर महिलाएं शादी के बंधन से अपने आपको अलग नहीं करती हैं कि लोग क्या कहेंगे और यदि माइके में कोई छोटा भाई या बहन है तो उसकी शादी में भी इस बात को लेकर परेशानियां आएंगी।   
कन्फ़्यूजन की  स्थिति 
पति से अपने आपको काम समझना, काम पढ़ा लिखा होना या काम पैसे कमाना वजह कुछ भी हो लेकिन कई बार मानसिक और शारीरिक प्रतारणा झेलने के बाद भी महिलाऐं इस बात को लेकर कन्फ़्यूजन में रहती हैं कि शायद ग़लती उनकी ही है और धीरे -धीरे अपना आत्मा सम्मान खोकर महिलाऐं स्वयं को निरर्थक समझने लगती हैं। 
 
 
पति के सुधरने की उम्मीद
बहुत बार महिलाऐं इस उम्मीद में शादी के बंधन को नहीं तोड़ती हैं की शायद उनका पति एक दिन शायद सुधर जाए और उनके रिश्तों में नया मोड़ आ जाए। ऐसा सिर्फ काम पढ़ी लिखे या घरेलू महिलाऐं ही नहीं करती हैं बल्कि कामकाजी महिलाऐं भी इस उम्मीद में रहती हैं  कि शायद परिस्थितियां कभी सुधर जाएं और रिश्ते में नया मोड़ आ जाए। 
 
बच्चों के भविष्य का ख्याल 
महिलाओं को सबसे ज़्यादा चिंता अपने बच्चों के भविष्य की होती है। उन्हें ऐसा लगता है कि रिश्ते को तोडना मतलब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना। और बच्चों के भविष्य की चिंता में वो अपना ही भविष्य अंधकारमय बना लेती हैं। 
 
 
परिवार का दबाव
 
इस रिश्ते को बनाए रखने में परिवार वालों का दबाव भी शामिल है। परिवार के लोग उन्हें रिश्ता न तोड़ने की सलाह देते हैं। कभी परिवार तो कभी समाज के बारे में सोच कर ही महिलाऐं शादी के बंधन में बंधी रहती हैं। 
 
 
आर्थिक स्थिति 
महिलाऐं आर्थिक रूप से अपने आप को कमज़ोर समझती हैं क्योंकि बहुत से खर्चे उनके पति ही पूरे करते हैं। इसलिए भी  घुटन भरे रिश्ते को निभाती हैं।
 
 
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