अपना मम्मी को मानती हैं रोल मॉडल
श्रेया कहती हैं कि उन्होंने मात्र 13 साल की उम्र में ही अपने पापा को खो दिया था। उनकी मम्मी, जो की पढ़ी-लिखी थी, ने मेहनत करके बिना किसी से मदद लिए बच्चों को पाला और अपने सभी बच्चों को आत्मनिर्भर बनाया। 
 
खुशी मेरी नज़र में
मेरी नज़र में खुशी सिर्फ मन की एक स्थिति है। पहले मैं जल्दी लोगों से चिढ़ जाती थी, लेकिन जब से मैंने प्राणिक हीलिंग शुरू किया है तब से मैं महसूस करती हूं कि लोगों के प्रति मेरा नज़रिया बदला है, मैं सकारात्मक महसूस करती हूं और ज्यादा खुश महसूस करती हूं। 
 
ये होगी मेरी असली सफलता
बेशक मैं आज टेक्सटाइल डिज़ाइनिंग कर रही हूं और इसी क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की कोशिश में जुटी हूं, लेकिन मैं समझती हूं कि मेरी असली सफलता तभी होगी जब मैं अपने बच्चों को अच्छी परवरिश दे सकूंगी और उन्हें अच्छा इंसान बना सकूंगी। 
 
मुझे लगता है कि महिलाएं अपनी फैमिली, पति, बच्चों को खुश रखने के क्रम में अपने आप को खो देती हैं। घर पर उनका हर चीज़ का रुटीन बना है जिसमें कभी बच्चे, तो कभी पति के हिसाब से काम होते हैं। इस रुटीन में ही महिलाओं को अपने बारे में सोचने का समय निकालना जरूरी है। 
 

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