हर मां चाहती है कि उसका बच्चा विनर बने, लेकिन ऐसा अक्सर होता नहीं है। बच्चे के विनर बनने की राह में बहुत सी अड़चनें आती हैं। इसी तरह से आपको भी सुपरमॉम बनने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है। यूं ही हर कोई सुपरमॉम नहीं बन जाता या सुपरमॉम नहीं कहलाता। हालांकि ज्यादातर बच्चों को अपनी मम्मी सुपरमॉम ही लगती है, क्योंकि एक वही तो है जो हर पल उसका पूरापूरा ख्याल रखती है, उसके उठने बैठने, सोने-जगने से लेकर उसकी छोटी-छोटी फरमाइश तक का ख्याल। लेकिन सुपरमॉम बनने के लिए सिर्फ यही जरूरी नहीं है, बल्कि कई बार सुपरमॉम बनने के लिए आपको अपने बच्चे की इच्छा के खिलाफ भी बहुत कुछ करना पड़ता है, हो सकता है कि इस राह में आपको अपने ही दिल को पत्थर का बनाना पड़े। तभी तो आप बन पाएंगी सुपरमॉम और आपका बच्चा बनेगा विनर, सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, जिंदगी की हर जंग में…
 

 

1. बच्चे से खुलकर बातचीत करें
बच्चे के साथ जब आपकी बातचीत हो, तब आप भूल जाएं कि आप उसकी मां हैं। सिर्फ तभी आप उससे दोस्ताना रिश्ता बना सकती हैं, जो आपके बच्चे की पर्सनालिटी के लिए बेहद जरूरी है। सिर्फ तभी आप उसकी जिंदगी की हर खुशी, हर गम में साझीदार बन सकती हैं और उसकी जिंदगी में घटने वाले अच्छे और बुरे का फर्क उसे समझा सकती हैं। 2. हर बात स्पष्ट और साफ शब्दों में बताएं बच्चे से बात करने के तरीके को बहुत स्पष्ट रखें। उसे जो कहना हो, साफ शब्दों में कहें, बात को घुमा फिरा कर न कहें। कोई बहाना बनाकर, दूसरे बच्चों का उदाहरण देकर या ताना मारकर कोई बात न कहें। इससे बच्चे को बुरा लग सकता है या फिर उसका व्यवहार भी इसी तरह का हो सकता है।
 
3. बच्चे के लिए रोल मॉडल बनें

 

मां और पिता हर बच्चे के लिए रोल मॉडल होते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि बच्चे के पैदा होने के बाद से ही आप अपने व्यवहार को बच्चे के अनुसार ढालें। आज के बच्चे बहुत जल्दी दूसरों की बातों को एडॉप्ट करते हैं। अगर आप ज्यादा गुस्सा करती हैं तो बच्चे के सामने खास ध्यान रखें कि तेज गुस्सा न करें, नहीं तो कुछ ही समय में बच्चा आपसे सीखकर आपके साथ भी वैसा ही व्यवहार करने लगेगा और तब आप कछ नहीं कर सकेंगी।
 

4. उत्सुकता का सही जवाब दें

बच्चा जितने सवाल पूछता है, उतना ही बुद्धिमान होता है। इसलिए अगर आपका बच्चा आपसे हर समय सवाल पूछता है तो चिढ़कर उसे झिड़कने की जगह उसके सवाल का सहीसही जवाब दें। यदि आपको जवाब पता नहीं है तो उससे कुछ समय ले लें, यानी कहें कि यह बात पता करके कल उसे बताएंगी।

5. सेक्स जिज्ञासा का समाधान जरूरी 

सवाल यदि सेक्स को लेकर होता है तो अक्सर महिलाएं बच्चे को सही दिशा देने के स्थान पर बात को घुमा देती हैं, लेकिन आज का जमाना वह नहीं है। आज बहुत छोटे बच्चों को सेक्स का ज्ञान हो जाता है, लेकिन वह ज्ञान गलत तरीकों और गलत तरह से मिलता है। ऐसे में तो आपकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि आपके बच्चे या बच्ची को सही बात पता हो ताकि उसे कोई गुमराह न कर सके। उसे बचपन से ही अच्छे और बुरे टच में फर्क करना भी सिखाएं।

6. समस्या का सामना करना सिखाएं

अगर आपका बच्चा किसी समस्या में आपसे मदद चाहता है तो बच्चे को उसका हल स्वयं निकालने को कहें। इससे उसकी रिजनिंग क्षमता बढ़ेगी। इसके अलावा अलग-अलग परिस्थिति का सामना कैसे करना है, इस बारे में भी उससे सवाल पूछते रहें। वे हर समस्या का मुकाबला कैसे करेंगे, यह जानकर आपको आश्चर्य होगा और बच्चे में भी जिम्मेदारी की भावना आएगी।

 

7. उसे टाइम मैनेजमेंट सिखाना जरूरी

जिंदगी की जंग जीतने के लिए हर व्यक्ति को टाइम मैनेजमेंट की बहुत जरूरत होती है। जिंदगी में हर कदम पर समय की कमी पड़ती है जिसे मैनेज करना बेहद जरूरी है। ऐसे में यदि बच्चे को कम समय को कैसे इस्तेमाल किया जाए, यह सिखा दिया जाए तो वह आगे चलकर उसे कामयाबी की राह दिखा सकता है।

8. बच्चे के साथ स्वयं भी मेहनत करें

पढ़ाई हो या कोई एक्टिविटी, किशोर होने तक बच्चे के साथ स्वयं भी मेहनत करें। यदि बच्चा पढ़ रहा है तो उसके साथ बैठें, यदि बच्चा पेंटिंग कर रहा है या कोई म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट बजा रहा है तो भी उसके साथ बैठकर उत्साहवर्धन करें।

9. कम नंबर आने पर झिड़कें नहीं

छोटी उम्र से ही यदि बच्चा स्कूल की परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाता, उसके नंबर कम आते हैं या वह फेल भी हो जाए तो उसे डांटें या झिड़कें नहीं, न ही उसे बात-बात पर ताने दें। बच्चा कम नंबर आने की वजह से पहले से ही हतोत्साहित और दुखी होता है, घर आने पर भी उसे डांट खानी पड़े तो उसका क्या हाल होगा। यह सोचें कि आपकी प्राथमिकता उसकी खुशी है या उसके नंबर। उसे उत्साहित करते हुए कहें कि कोई बात नहीं, अगली बार अच्छे नंबर लाना।

10. दूसरी एक्टिविटीज में उत्साह बढ़ाएं

किसी का संपूर्ण व्यक्तित्व सिर्फ पढ़ाई से ही नहीं मिलता। बच्चे के ओवरऑल डेवलपमेंट के लिए उसका खेल-कूद और सांस्कृतिक रुचि भी जरूरी है। बच्चों की रुचि के अनुसार उसे अन्य एक्टिविटीज सिखाएं और प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करें।

11. दोस्तों के साथ मिलना जरूरी

आपका बच्चा स्कूल में अपने साथियों के साथ घुल मिल रहा है, या नहीं यह जानना बेहद जरूरी है। इसके लिए उसके स्कूल में टीचर्स से समय-समय पर मिलते रहें और उनसे बच्चे के माक्र्स ही नहीं, बल्कि व्यवहार के बारे में भी जरूर पूछताछ करें। कहीं ऐसा न हो कि बच्चा किसी कमी की वजह से किसी हीन भावना यानी कॉम्प्लेक्स का शिकार हो रहा हो और आपको पता भी न चले। ऐसे में उसकी पर्सनालिटी उभर नहीं पाएगी।

12. स्कूल और घर के नियम समझाएं

बचपन से ही बच्चे को यह समझा देना चाहिए कि उसे घर पर कैसा व्यवहार करना है और स्कूल में कैसा। कहां कौन से नियम फॉलो करने और अनुशासन के अनुसार चलना है। इसके अलावा उसे अच्छी और गंदी आदतों में फर्क करना भी सिखाएं। 

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