आम महिला हो या फिर अभिनेत्री, शादी और बच्चे हो जाने के बाद उनके जीवन में जिम्मेदारियां बढ़ जाती है। बच्चों के परवरिश के खातिर उनको भी करियर से ब्रेक लेना ही पड़ता है। ऐसी ही एक एक्ट्रेस हैं जेनिलिया डिसूजा, जो अपनी खूबसूरत मुस्कान और चुलबुले अंदाज से आज भी सभी के दिल में राज़ कर रही हैं। दो बच्चों की परवरिश में जेनिलिया किन बातों का ध्यान रखती हैं। आइये जरा जानें-
पहली बार मातृत्व सुख से बहुत डर गई थी
मां बनना एक सुंदर एहसास तो हैं ही साथ ही यह एक नए जीवन को इस दुनिया में लाने की भावना भी होती हैं। लेकिन इसके साथ ही नई मां के लिए जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं। लेकिन मुझे जब पहली बार मां बनने की बात पता चली तो उस समय मैं बहुत डर गई थीं । मैं सोच रही थी कि क्या मैं अभी एक अच्छी मां बन सकूंगी? क्या मैं मानसिक रूप से पूरी तरह से तैयार हूं? मेरे लिए एक तरह से पूरी दुनिया बदल गई थी। फिर 9 महीने इसी सोच में बीत गए कि मैं एक अच्छी मां बनूं और बच्चे की सही परवरिश कर सकूं।
बच्चे की परवरिश में माता-पिता दोनों का साथ जरुरी
मेरा मानना है कि जब बच्चा होता है तो बच्चे की जिम्मेदारी सिर्फ मां को ही नहीं निभानी चाहिए पिता को भी पूरा सहयोग देना चाहिए। जब मेरा बेटा हुआ तो मेरे पति रितेश देशमुख बहुत खुश हुए। वे बच्चे से जुड़ी जिम्मेदारियां बहुत अच्छी तरह निभाते हैं जैसे- डायपर बदलना, दूध पिलाना, कपड़े बदलना, नहलाना आदि वो सब बहुत अच्छी तरह से करते हैं। बच्चे को संभालने जब मातापिता दोनों ही जिम्मेदारी निभाते हैं तभी बच्चा खुशी महसूस करता है, उसका विकास अच्छा होता है और वह मानसिक रूप से भी मजबूत रहता है। रितेश पूरी प्रेगनेंसी के दौरान साथ रहे। जब मेरा बच्चा हुआ, तो 20 दिनों तक उन्होंने काम नहीं किया। उनका मुझे बहुत सहयोग मिला।

बच्चों के अनुसार ही करती हूं काम
मुझे लगता है कि हर मां में बच्चे की परवरिश करने की क्षमता होती है। उसे गोद में लेते ही आप समझ जाते हैं कि क्या करना है। बच्चे के हर काम का अपना समय होता है। हम अगर बच्चे के नियम के साथ चलते हैं तो समय की कमी नहीं होती और आप अपना काम भी कर सकते हैं।
सामान्य तरीके से करती हूं परवरिश
बच्चों की परवरिश को लेकर मैं ज्यादा अधिक चिंता नहीं करती। मैं उन्हें नॉर्मल तरीके से बढ़ते हुए देखना चाहती हूं। इसके अलावा मैं बच्चों की हाइजीन का भी बहुत ध्यान रखती हूं, क्योंकि इससे बच्चे में इम्यूनिटी बढ़ती है और बच्चा कभी भी बीमार नहीं पड़ता है।
मैंने ब्रेक लिया था
मैं सुबह से शाम तक बच्चों के साथ होती हूं, लेकिन 12 से 4 बजे तक जब वह सोते हैं तो उस समय मैं जो कुछ करना चाहती हूं, करती हूं। बच्चे के साथ दिन कैसे बीतता है पता ही नहीं चलता। मैं खुश हूं कि सही समय पर मैंने सही निर्णय लिया। बहुत सी माएं शादी करने व बच्चे पैदा करने के बाद अपना कैरियर छोड़ देती हैं लेकिन बच्चे पैदा करने का करियर से कोई संबंध नहीं है। आप दोनों काम साथ-साथ कर सकती हैं। मैंने कभी नहीं सोचा कि मैंने करियर छोड़ा है ? हां ब्रेक जरूर लिया था।
