भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि को कर्मफल दाता कहा गया है। शनि का नैसर्गिक गुण न्याय करने का है। शनि ग्रह की इसी प्रवर्ति की कारण शनि को न्यायधीश भी कहा जाता है। जिस साल भी शनि गोचर में अपनी राशि बदलते हैं वो साल लोगो के जीवन में कई बड़े बदलाव लेकर आता है। साल 2020 में शनि का गोचर धनु राशि से बदल कर मकर राशि पर हो जायेगा इस के साथ ही वृश्चिक राशि वालो पर से शनि की साढ़े साती का प्रभाव उतर जायेगा साथ ही साथ वृष और कन्या राशि वालो पर से शनि की ढैया का अशुभ प्रभाव भी समाप्त हो जायेगा इस के साथ कुम्भ राशि पर शनि की साढ़े साती और मिथुन और तुला राशि वाले शनि की अशुभ ढैया के प्रभाव में आ जायेंगे। उपरोक्त राशिओं पर साढ़े साती और ढैया का प्रभाव 17 जनवरी 2023 तक बना रहेगा उसके बाद शनि मकर राशि से निकल कर अपनी ही दूसरी राशि कुम्भ में गोचर करेंगे।
मेष राशि
मेष राशि वालो के लिए शनि व्यवसाय में उन्नति लेकर आ रहे हैं , लेकिन घर और वाहन पर खर्च बढ़ सकता है। सुख में कमी रहने की सम्भावना है जीवन साथी की सेहत का विशेष ध्यान रखे एवं संतान की और से चिंता बनी रह सकती है।
वृषभ राशि
वृषभ राशि वालो के भाग्य में उन्नति शनि के प्रभाव से होगी। धन प्राप्ति के भी नए नए रस्ते खुलेंगे। पुराने मित्र व सहयोगी मददगार साबित होंगे। परन्तु शत्रुओ से सावधान रहना अच्छा है। क़र्ज़ का लेन देन न करें।
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातको के लिए अष्टम ढैया का कष्टकरी समय आरम्भ हो रहा है। स्वस्थ का ध्यान रखना अतिआवश्यक है। परिवार में मतभेद हो सकते हैं। धन प्राप्ति में रुकावट के संकेत हैं। सभी कामो में विघ्न एवं बाधाएं आने की संभावना है।
कर्क राशि
कर्क राशि वालो के लिए परिवार में खुशाहाली आने के योग है। योग्य जातको के विवाह के योग भी बनेगे. परन्तु माता पिता का स्वस्थ चिंता का कारण बन सकता है। अधिक क्रोध और मानसिक तनाव से दूर रहना हितकारी होगा।
सिंह राशि के जातको के लिए परिस्तिथिया थोड़ी परेशानी वाली हो सकती हैं। मित्र व सहकर्मिओ से सम्बन्ध ख़राब हो सकते है। जीवन साथी के साथ अनबन हो सकती है। आय काम और व्यय अधिक रहेगा। कार्य क्षेत्र में बदलाव के भी आसार हैं। शत्रु और रोग परेशान कर सकते हैं। किसी प्रतियोगी परीक्षा में सफल होने के योग बन रहे हैं ।
कन्या राशि
कन्या राशि वाले जातको के लिए शनि का गोचर बेहद लाभदायक है। मान सम्मान बढ़ेगा। खेलकूद और एक्सरसाइज करने में मन लगेगा। धार्मिक कार्यों में रूचि बढ़ेगी। संतान सम्बन्धी शुभ सूचनाये मिलेंगी। प्रेमीजनो का साथ जीवन में नई ऊर्जा का संचार कर देगा।
तुला राशि
तुला राशि पर शनि की चतुर्थ ढैया का प्रभाव रहेगा। इस प्रभाव से मैं में गुप्त चिंताए रहेंगी। कामकाज के हालत थोड़े ख़राब होंगे। घर में परिवारजनों का स्वस्थ चिंता का कारण बन सकता है। लेकिन भूमि और वाहन सम्बन्धी कार्यो में सफलता मिलेगी। मन में गुप्त चिंता बानी रहेगी।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि वाले शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव से बाहर आ रहे हैं। रुके हुए काम बनेगे. नई ऊर्जा का संचार होगा। पुरुषार्थ बढ़ेगा। घर में मंगलकार्य होंगे। पुराने मित्र पुनः जीवन में आएंगे। लेखन कार्य में विशेष लाभ मिलेगा। संचार माध्यमों से जीवन में उन्नति का मार्ग प्रशस्त्र होगा।
धनु राशि
धनु राशि के जातकों के लिए शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। भूमि और वाहन सम्बन्धी कार्यो में विशेष सफलता मिलेगी। धन प्राप्ति के नए नए रास्ते बनेंगे। मित्र एवं सहयोगी मददगार साबित होंगे। लेकिन स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना अति आवशयक है।
मकर राशि
मकर राशि पर स्वगृही शनि का गोचर विशेष फलदायी है। कार्यो में सफलता मिलेगी। व्यवसाय के नए अवसर मिलेंगे। आप मेहनत कर के सफलता प्राप्त करोगे. लेकिन शनि के नैसर्गिक गुणों के कारण मानसिक चिंता मन में लगी रहेगी। आप अपनीधुन में खोये रहोगे। जिस कारण जीवन साथी के साथ तनाव उत्पन हो सकता है। स्वास्थ्य को लेकर आप सचेत रहेंगे।
कुम्भ राशि
कुम्भ राशि के जातको को शनि की चढ़ती हुई साढ़ेसाती के प्रभाव से व्यर्थ की भागदौड़ लगी रहेगी। धन का उपव्यय भी हो सकता है। बहुत अधिक परिश्रम के बाद निर्वाह योग्य धन प्राप्त होगा। मानसिक चिंता एवं दुर्घटना एवं चोट आदि का भय रहेगा। क़र्ज़ और रोग भी परेशान कर सकते है।
मीन राशि
मीन राशि वाले जातको को शनि का ये गोचर विशेष फलदायी है। धन सम्बन्धी सभी प्रकार की चिंताए दूर होंगी। मित्र और परिवारजन विशेष सहयोग देंगे। लेकिन संतान की ओर से चिंता बनी रहेगी। असमय खाने पीने से स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
उपाय
शनि की साढ़ेसाती और अशुभ ढैया के प्रभाव को काम करने के लिए भारतीय ज्योतिष शास्त्र में कई तरह के उपाय सुझाये गए है। शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव को कम करने तथा शनि देव को प्रसन करने के लिए शनि ग्रह के मंत्रो का जाप एवं शनि चालीसा का पाठ विशेष फलदायी मन गया है।
शनिदेव के मंत्र
ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये शन्योरभिस्त्रवन्तु न:।
ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:।
ॐ ऐं ह्लीं श्रीशनैश्चराय नम:।
उपरोक्त किसी भी मंत्र का जाप करने से शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है। मंत्र जप के अलावा शनिवार को तेल का दान भी शुभ होता है। डकोत को शनिवार के दिन तेल का छाया दान करना भी एक सरल और उपयोगी उपाय है। आपने अधीनस्थ व्यक्ति को शनिवार के दिन पकोड़े या समोसे खिलाना भी अशुभ शनि के प्रभावों को को कम करने का सरल उपाय है। भगवान् महादेव की कृपा प्राप्ति से एवं बजरंगबली की भक्ति से शनि देव के अशुभ प्रभावों को कम किया जा सकता है। शनिदेव के शुभ प्रभावों को बढ़ाने के लिए मंत्र जाप सबसे अच्छा उपाय है। इस प्रकार सरल और प्रभावी उपायों को कर कर हम शनिदेव के अशुभ प्रभावों को कम कर सकते है और शनिदेव की कृपा प्राप्त कर के अपने जीवन को खुशियों से भर सकते हैं। निःसंदेह शनिदेव का गोचर ज्योतिष में विशेष महत्व रखता है फिर भी जातक की निजी कुण्डली का अवलोकन करने पर ही पूर्ण रूप से शुभाशुभ फल कथन किया जा सकता है।
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