anokhee chidhiya shingaee phoo shumma Motivational story
anokhee chidhiya shingaee phoo shumma Motivational story

नील ने अपनी प्रिय किताब ‘वंडर्स ऑफ साइंस’ बंद की और फिर आँखें बंद करके सोचने लगा। अभी-अभी उसने अनोखी साइंस फैंटेसी लेखिका एली मून का लिखा विचित्र वृत्तांत पढ़ा था, ‘शिंगाई फू शुम्मा’। यह शिंगाई फू शुम्मा नाम की चिड़िया का बड़ा ही दिलचस्प किस्सा था, जो आकाश में उड़ती थी तो उसका आकार बड़ी तेजी से बढ़ने लगता था, चाल एकाएक आँधी-तूफान सरीखी हो जाती थी और फिर तमाम अजूबे देखने को मिलते। और वह बोलती भी थी।

भले ही हमारी तरह न बोलती हो, पर उसके शरीर से विचित्र रेडिएशंस निकलते थे। उनसे लगता था, उसकी बात हमारे कानों तक पहुँच रही है और हमारी बात बड़ी अच्छी तरह वह सुन और समझ रही है। यहाँ तक कि मनुष्यों की तरह वह खुदर – खुदर हँसती भी थी।

एली मून के इस विचित्र वृत्तांत में से जादूगर की पोटली की तरह, मन को हैरान करने वाले किस्सों पर किस्से निकलते जा रहे थे और नील अवाक्। ‘शिंगाई फू शुम्मा…! ओह, कितना अजीब नाम है और किस्से तो उससे भी अजीब। क्या सचमुच ऐसी चिड़िया होती होगी? कल्पना करना ही मुश्किल है।’ नील ने सोचा, ‘पर एली मून का तो कहना है कि उसने ऐसी चिड़िया को वाकई देखा है, खुद अपनी आँखों से और उसके साथ सारी दुनिया की सैर करके लौटी है। उसने अपनी उन हैरतअंगेज यात्राओं का पूरा हाल भी लिखा है।’ ‘यह कैसे हो सकता है, कैसे?’ नील अब भी आँखें बंद करके उसी अद्भुत विज्ञान फंतासी की दुनिया में गोते खा रहा था, जिसका शीर्षक था, ‘शिंगाई फू शुम्मा’ । पढ़ते समय हैरानी के मारे उसके दिल की धड़कनें बढ़ गई थीं। उसे पूरी तरह यकीन नहीं हो रहा था कि सचमुच ऐसी कोई चिड़िया भी हो सकती है। लेकिन एली मून ने तो अपनी इस विचित्र विज्ञान – कथा के साथ शिंगाई फू शुम्मा चिड़िया का बड़ा-सा, सुंदर चित्र भी दिया था, जिसे उसने खुद वाटर कलर्स से बनाया था। ‘लेकिन चित्र ही क्यों? फोटो क्यों नहीं?’ नील के मन में फिर से उधेड़बुन शुरू । पर कुछ आगे चलकर एली मून ने खुद इस बारे में लिखा और वह भी कम हैरतअंगेज न था। एली मून ने लिखा कि उसने शिंगाई फू शुम्मा का फोटो लेने की बहुत कोशिश की। काफी देर तक उसने मोबाइल से उसके चित्र लिए भी। उस समय की उसकी प्रसन्नता और उत्तेजना का ठिकाना न था। पर घर आकर देखा तो उसके उत्साह पर घड़ों पानी पड़ गया। रंग-बिरंगी खूबसूरत चिड़िया शिंगाई फू के वे सारे कमाल के चित्र पता नहीं, किस जादू से उड़ चुके थे। आगे उसने पूरा किस्सा लिखा था।

असल में हुआ यह कि एली मून अपना मोबाइल मेज पर रखकर माथा पकड़े अभी इस अजूबे के बारे में सोच ही रही थी कि फोटो अचानक कहाँ चले गए। तभी उसे फिर वह अद्भुत चिड़िया शिंगाई फू शुम्मा नजर आई। और उसका ध्यान इस बात पर गया कि वह अनोखी चिड़िया हँस रही है। एली हैरान थी कि अरे, यह विचित्र चिड़िया हँस क्यों रही है? इस पर शिंगाई फू शुम्मा ने कहा, “सुनो एली मून, तुम मुझे कैमरे में कैद नहीं कर सकतीं। कोई नहीं कर सकता। हाँ, बना सको, तो मेरा एक सुंदर चित्र बनाओ। जो कुछ तुमने देखा और मेरी जो छवि तुम्हारे मन में है, उसे कागज पर उतारो।” “चित्र…? मैं…? पर मैं तो कोई चित्रकार नहीं।” एली मून कुछ और कहती, इस पर शिंगाई फू शुम्मा ने कहा,” बनाओ, तुम बना सकती हो।” कहकर वह झट पंख फड़फड़ाते हुए उड़ गई। …फुर्र! एली मून ने आगे लिखा, “और फिर आखिर मैंने उस विचित्र चिड़िया को जिस रूप में देखा और मेरे मन में उसकी जो सुंदर छवि थी, उसे कागज पर उतारने की कोशिश की। मैं कोई बहुत अच्छी चित्रकार तो नहीं हूँ। हाँ, बचपन में जरूर और बच्चों की तरह मैं भी चित्र बनाया करती थी। पर तब से तो एक लंबा अरसा हो गया। मैंने हाथ में ब्रश कभी पकड़ा ही नहीं। लेकिन चित्र तो बनाना ही था। हर हाल में। उन अनोखी चिड़िया का चित्र बनाए बगैर मैं रह ही सकती थी। और एकाएक पड़ोस के एक बच्चे के रंग और ब्रश लेकर मैंने उसी समय चित्र बनाना शुरू कर दिया। “चित्र ज्यादा अच्छा नहीं बना। पर मेरे भीतर इतनी ज्यादा बेसब्री थी कि मैंने कोई सौ चित्र बनाए होंगे।

फिर उन्हें एक-एक करके देखा, तो इस चित्र पर नजर अटक गई। मन ने कहा, सुनो एली मून, बस, यही है उस सुंदर चिड़िया का सबसे सुंदर और सजीव चित्र। और उसी को मैं अपने पाठकों के लिए पेश कर रही हूँ, ताकि वे कल्पना कर सकें कि कितनी अद्भुत और मनोहारी थी शिंगाई फ शुम्मा, जिसे मैंने बहुत नजदीक से देखा, जिससे खूब ढेर सारी बातें कीं और जिसके पंखों पर बैठकर सारी दुनिया की सैर करके लौट आई।…” “अद्भुत… सचमुच अद्भुत!” नील अभी तक शिंगाई फू शुम्मा की कल्पना में खोया हुआ था। सिर पर नीले रंग का खूबसूरत मुकुट। सात रंग के पंख, चोंच सुनहरी और आँखों में एक खास तरह की चमक, जिससे पता चलता था कि यह चिड़िया उतनी भोली नहीं है कि किसी के जाल में फँस जाए। यह मानो दुनिया के बारे में बहुत कुछ जानती है और हमारे दिलों को अंदर तक पढ़ रही है। * नील इन्हीं विचारों में गुम था और सोच रहा था, काश, मैं भी मिल पाता इस अद्भुत चिड़िया से और मशहूर लेखिका एली मून की तरह दुनिया को बता पता कि हाँ, यह झूठ नहीं। वाकई धरती पर है ऐसी चिड़िया और मैंने खुद अपनी आँखों से देखी है।” कुछ देर बाद नील ने आँखें खोलीं तो अचरज के मारे चीख पड़ने को हुआ। अरे, यह क्या? अभी-अभी जिस शिंगाई फू शुम्मा चिड़िया के बारे में उसने किताब में पढ़ा था, वह अब उसके सामने बैठी फुदक रही थी। एकदम सामने। हू-ब-हू वही सात रंग की चिड़िया। सिर पर बड़ा-सा नीला मुकुट, बड़े-बड़े सुंदर पंख और आँखों में कुछ अलग – सी चमक। शिंगाई फू शुम्मा उसके इतने पास थी कि वह चाहता तो उसे हाथ बढ़ाकर पकड़ सकता था। फिर भी उसने अपने आपको यकीन दिलाने के लिए पूछा, “तुम क्या शिंगाई फ शुम्मा चिड़िया हो?” “हाँ-हाँ, क्यों! यकीन नहीं आता?” कहकर शिंगाई फू शुम्मा चिड़िया ने खुशी के मारे अपनी पूँछ हिलाई और मुसकराने लगी। “तो क्या तुम भी किताब की तरह मुझे सात रंगों के उस लोक मिलिनारा में ले जाओगी, जहाँ सुना है कि दुनिया के सबसे बुद्धिमान और विकसित प्राणी मिंपी रहते हैं? मैंने किताब में पढ़ा है कि विज्ञान और तकनीक में वे मनुष्यों की दुनिया से हजारों साल आगे हैं और कभी – कभी धरती पर भी घूमने आते हैं। पर यहाँ के लोगों को वे ज्यादा पसंद नहीं करते।” सुनकर शिंगाई फू शुम्मा चिड़िया उदास हो गई। बोली, “तुम ठीक कह रहे हो नील। पर अफसोस, मिंपी नाम के वे बुद्धिमान प्राणी तो अब वहाँ नहीं रहते। हाँ, वह सात रंगों की दुनिया तो अब भी है और पहले जैसी ही सुंदर है। क्या तुम उसे देखना चाहोगे?” “वाह! क्यों नहीं? नेकी और पूछ-पूछ।” कहकर नील उछल पड़ा। “तो फिर बैठो मेरे पंखों पर!” शिंगाई फू शुम्मा चिड़िया बोली । “पर… तुम तो छोटी-सी हो। बहुत छोटी सी, शिंगाई फू।” नील के मुँह से निकला, “फिर मैं बैठूंगा कैसे?” हालाँकि कहते ही उसे अपनी गलती पता चल गई। एली मून ने तो कितने अच्छे ढंग से लिखा था कि शिंगाई फू शुम्मा जैसे ही आसमान में उड़ती है, उसका आकार तेजी से बढ़ता जाता है और वह किसी छोटे-मोटे हवाई जहाज सरीखी लगती है। शायद इसीलिए वह रहस्यमय चिड़िया अब मुसकरा रही थी। नील को बड़ा अचरज हुआ, शिंगाई फू शुम्मा की मुसकान ऐसी ही थी, जैसे आदमी हँसते और मुसकराते हैं। “चिंता मत करो, तुम बैठो तो सही!” रहस्यपूर्ण चिड़िया शिंगाई फू शुम्मा ने कहा। और नील के बैठते ही वह उड़ने लगी आसमान में। ऊपर, बहुत ऊपर। उसकी चाल इतनी सधी हुई थी कि लगता था, अपनी मंजिल का उसे बहुत अच्छी तरह पता है और वह तीर की तरह तेजी से आगे बढ़ती जा रही थी। आश्चर्य! जैसे-जैसे शिंगाई फू शुम्मा चिड़िया आसमान में ऊपर उठती जाती, वह बड़ी होती जाती। और होते-होते वह इतनी बड़ी हो गई कि जैसे वह चिड़िया न हो, सात रंगों का इंद्रधनुषी यान हो। नील को लगा, अरे वाह! मैं तो सचमुच सात रंग के इंद्रधनुष पर सवार होकर उड़ रहा हूँ। ऐसा तो मैं कभी सोच भी नहीं सकता था। उड़ते-उड़ते शिंगाई फू शुम्मा चिड़िया नील को एक ऐसे लोक में ले आई, जहाँ सात रंगों का अजब नजारा था। वहाँ सात रंग के सुंदर फूल खिले थे। दूर-दूर तक बर्फ से ढके पहाड़ ही पहाड़, जिनसे सतरंगा प्रकाश निकल रहा था। पेड़ों पर सात रंग के पत्ते। यहाँ तक कि वहाँ की जमीन भी सतरंगी थी। देखकर नील खुश, बहुत खुश।

वह जैसे खुशी से भरकर चीख पड़ा, “अरे वाह, मैं मिलिनारा में पहुँच गया! यह तो सचमुच सतरंगी दुनिया है। इतने अच्छे, इतने प्यारे रंग तो मैंने कहीं और देखे ही नहीं।” “हाँ नील, बहुत सुंदर है यह देश और दुनिया के सबसे बुद्धिमान प्राणियों मिंपी लोगों ने बड़े प्यार से इसे बसाया था। सतरंगे पहाड़ों, पेड़-पौधों और सतरंगी धरती वाली यह सृष्टि उनकी अनोखी तकनीक का ही कमाल है। लेजर किरणों से वे जैसा चाहें, वैसा आभास उत्पन्न कर सकते हैं। यही इन सतरंगे पहाड़ों और सतरंगी धरती का रहस्य है। ऐसे ही पर्यावरण की रक्षा के लिए उन्होंने एक अजब तरीका अपनाया। यहाँ शहर इस तरह बसाए गए कि हर शहर फूलों का शहर था। हर शहर गोलाई में बसा था और लोगों के घरों के साथ-साथ बसी थीं फूलों की घाटियाँ। जहाँ उद्योग लगाए गए, वहाँ भी चारों ओर हरियाली की कतारें। कूड़े और फालतू चीजों से बिजली पैदा करने के यंत्र बनाए गए, जिससे कहीं प्रदूषण न फैले।” चिड़िया शिंगाई फू शुम्मा बता रही थी। * सुनकर नील हैरान था। सोच रहा था, ‘अरे, धरती पर तो हम इन चीजों को अभी सपने की तरह देखते हैं। पर मिंपी लोगों ने अपनी बुद्धिमत्ता और अजब-सी धुन से इन्हें हकीकत में बदल दिया। आश्चर्य!’ फिर उसने पूछा, “प्यारी शिंगाई फू शुम्मा चिड़िया, यह तो तुमने बताया नहीं कि यहाँ जो बुद्धिमान मिंपी लोग रहते थे, वे अब कहाँ चले गए? इतने सुंदर देश मिलिनारा को उन्होंने छोड़ क्यों दिया? वे अब हैं भी या नहीं?” “हैं क्यों नहीं?” शिंगाई फू शुम्मा बोली, “पर अब वे ऊपर, और भी ऊपर चले गए हैं। एक दूसरी ही दुनिया में। वह इससे भी सुंदर दुनिया है, सुइनारा। पर वहाँ मैं तुम्हें नहीं ले जा सकती।” “क्यों शिंगाई फू? क्या मैं उन बुद्धिमान प्राणियों से मिल नहीं सकता? मैं असल में मिंपी लोगों से पूछना चाहता हूँ कि इतनी सुंदर सतरंगी दुनिया छोड़कर क्यों चले गए?” नील ने हैरान होकर पूछा। “जाना तो वे नहीं चाहते थे।” शिंगाई फू शुम्मा ने दुखी होकर कहा, “पर यहाँ लालची लोग आने लगे थे। कुछ ने यहाँ की दौलत पर कब्जा करने की कोशिश की। कुछ यहाँ के फूल – पत्तों को नोचकर अपने साथ ले गए और यहाँ प्रदूषण फैलाने लगे। कुछ ने मिलिनारा के उन बुद्धिमान प्राणियों से इतने बुरे ढंग से बातें कीं कि वे दुखी और परेशान हो गए। लूटपाट और तोड़फोड़ करने वाले अपराधी भी आने लगे। आखिर मिलिनारा के प्रधानमंत्री ने सोचा, यह स्थान हमें छोड़ना ही पड़ेगा। इसके बाद उन्होंने अपने लिए एक और सतरंगी दुनिया बसा ली। इससे भी सुंदर, जहाँ मनुष्यों का पहुँचना बहुत मुश्किल है!” शिंगाई फू शुम्मा ने बताया। “तो क्या मैं उनसे कभी नहीं मिल सकता, कभी नहीं?” नील कुछ निराश होकर बोला। “मिल क्यों नहीं सकते? जरूर मिल सकते हो, पर पहले मुझे उन लोगों से इजाजत लेनी होगी, क्योंकि वे पसंद नहीं करते कि धरती के प्राणी उनकी नई दुनिया तक पहुँचकर वहाँ भी प्रदूषण फैलाएँ या फिर तोड़-फोड़ मचाएँ, जैसा पहले कुछ लोगों ने किया था।” फिर कुछ रुककर शिंगाई फू बोली, “पर मुझे पूरा यकीन है नील, कि मिंपी लोग तुमसे जरूर मिलेंगे। वे बहुत नेक और भले लोग हैं और अपने जैसे सीधे-सादे लोगों से मिलना उन्हें अच्छा लगता है। मैं वहाँ जाकर तुम्हारे बारे में बताऊँगी, तो उन्हें बहुत खुशी होगी। हाँ, लेकिन अभी हम यहीं घूमेंगे और मिलिनारा की सुंदरता का आनंद लेंगे। क्यों नील, ठीक है न?” “ठीक।” नील हँसा, “तुम बहुत बुद्धिमान हो शिंगाई फू शुम्मा। बात को इस तरह कहा कि मुझे बुरा भी न लगे।” सुनकर शिंगाई फू भी मुसकरा दी। बहुत देर तक नील शिंगाई फू शुम्मा चिड़िया के साथ इस अनोखी सतरंगी दुनिया में घूमता रहा, घूमता रहा। मजे की बात यह थी कि सारे दिन घूमने के बाद भी उसके पैरों में जरा भी थकान न थी। उसका मन होता था कि वह बस यहीं घूमता रहे, यहाँ से कहीं न जाए। पर फिर उसे अपने मम्मी-पापा की याद आई। अपना स्कूल और स्कूल के प्यारे दोस्त याद आए। उसने शिंगाई फू शुम्मा से कहा, तो वह फिर उसे अपने पंखों पर बैठाकर धरती पर ले आई। हाँ, लौटते समय उसने नील से एक बड़ी अचरज भरी बात कही, जिसे सुनकर उसे अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ। शिंगाई फू ने जब फिर से दोहराया तो भी बड़ी मुश्किल से वह उस पर यकीन कर पाया। वरना तो वह सोच रहा था कि उसने कुछ गलत सुन लिया है। असल में शिंगाई फू शुम्मा ने बातों-बातों में झिझकते हुए बताया था कि वह असली चिड़िया नहीं, बल्कि एक यंत्र – चिड़िया है और उसे मिंपी लोगों ने एक अद्भुत अंतरिक्ष यान के रूप में काम करने के लिए निर्मित किया है। “प… पर मैं तो सोच रहा था कि तुम लाखों बरस पुरानी किसी दुर्लभ प्रजाति की चिड़िया हो, जो आज देखने को नहीं मिलती। तुम इतनी अच्छी बातें करती हो कि तुम जिंदा प्राणी नहीं हो, यह तो मैं सोच भी नहीं सकता।” नील ने अचरज से भरकर कहा। “असल में मिंपी लोगों ने अपनी अनोखी तकनीक का कमाल दिखाने के लिए मुझे गढ़ा है। मैं चिड़िया भी हूँ, रोबोट भी और और अद्भुत अंतरिक्ष यान भी। यही मेरा रहस्य है।” कहकर शिंगाई फू शुम्मा जोरों से हँसती हुई ‘बाय’ कहकर उड़ गई। लौटकर नील ने दोस्तों को उस सतरंगी दुनिया का किस्सा सुनाया, तो सबने दाँतों तले उँगली दबा ली। * रात को नील सोया तो उसे सपने में मिलिनारा के बुद्धिमान प्राणी मिंपी दिखाई दिए। वे बड़े सुंदर और स्वस्थ थे। सभी के चेहरे पर बड़ी प्रसन्न हँसी। नील ने शिकायत करते हुए कहा, “मैंने आपकी सतरंगी दुनिया देख ली। पर आप लोग उसे छोड़कर चले क्यों गए?” इस पर उनके मुखिया ने हँसते हुए कहा, “सारे बच्चे तुम्हारी ही तरह होते नील, तो हमें अपनी सतरंगी दुनिया को छोड़ने की जरूरत क्यों पड़ती? हम लड़ाई नहीं, प्यार चाहते हैं। इसीलिए हमें बस सीधे-सादे और प्यारे लोग पसंद हैं, बिल्कुल तुम्हारी तरह। खैर, अब तुमने तो हमारी सुंदर दुनिया देख ही ली! जब-जब मिलने का मन होगा, हम सपने में तुमसे मिलने आ जाया करेंगे। जल्दी ही तुम्हें भी अपने नए देश सुइनारा में बुलाएँगे।” सुनकर नील खुश हो गया। और सोते-सोते भी उसके मुख पर एक बड़ी ही भली, मीठी-मीठी सी मुसकान आ गई। सुबह नील उठा, तो उसे सिरहाने के पास एक सुंदर और रंग-बिरंगे लैटरपैड पर लिखी एक कविता की कुछ लाइनें नजर आईं। नील ने पढ़ा, सुइनारा के नन्हें बच्चों एडी और बिली ने बड़े प्यार से उसे अपने सुंदर देश में आने का आमंत्रण देते हुए लिखा था- सुइनारा, सुइनारा, सुइनारा, तुम्हें बुलाता नील, हमारा सुइनारा, सुइनारा है अंबर का एक प्यारा तारा तुम्हें बुलाता प्यार भरा यह सुइनारा…! नील ने चुपके से वह लैटरपैड अपने बस्ते में सँभालकर रख लिया। उसने सोचा था कि वह स्कूल में अपने सभी दोस्तों को इसे दिखाएगा और रात के सपने की पूरी कहानी सुनाएगा। पर स्कूल में जाकर उसने बस्ते को अच्छी तरह देखा, सुइनारा का वह लैटरपैड जाने कहाँ गायब हो गया था। नील ने सोचा, शायद बुद्धिमान मिंपी प्राणियों को यह पसंद नहीं है कि मैं उनके नए देश सुइनारा के बारे में सभी को बताऊँ। अब सपने में मिंपी लोग आएँगे, तो मैं जरूर उनसे सॉरी बोलूँगा। सोचते ही उसका मन हलका हो गया और वह मगन होकर सात रंग के अद्भुत लोक सुइनारा की सुंदर झाँकियों के बारे में सोचने लगा।