वजन घटाने से लेकर नवजात शिशु के लिए भी है वरदान मूसली
मौसम के अनुसार सर्दियों में आप इसे गर्म दूध के साथ भिगोकर खा सकते हैं और गर्मियों में इसकी स्मूदी बनाकर या दही और योगर्ट में भिगोकर भी इसे खा सकते हैं।सुबह के नाश्ते में इस से ज्यादा बेहतर विकल्प आपके पास हो ही नहीं सकता अगर आप एक सम्पूर्ण आहार की तलाश में हैं।
Muesli Benefits: आजकल सभी अपनी सेहत को लेकर सजग हो गए हैं। भागदौड़ भरी इस जिंदगी में सबकी यही कोशिश रहती है की खाना ऐसा खाया जाए जो हमें ताकत और पोषण दोनों दे। इसके लिए अब लोग कई तरह के विकल्प अपनाने लगे हैं। जिनमे आजकल सबसे ज्यादा खाया जाने वाला विकल्प है मूसली। मूसली एक तरह का साबुत अनाज है जो पोषण और ताकत से भरपूर है। मूसली एक ऐसा अनाज हैं जो हर मौसम में खाना हमारी सेहत के लिए फायदेमंद ही साबित होगा। मौसम के अनुसार सर्दियों में आप इसे गर्म दूध के साथ भिगोकर खा सकते हैं और गर्मियों में इसकी स्मूदी बनाकर या दही और योगर्ट में भिगोकर भी इसे खा सकते हैं।सुबह के नाश्ते में इस से ज्यादा बेहतर विकल्प आपके पास हो ही नहीं सकता अगर आप एक सम्पूर्ण आहार की तलाश में हैं। इसके सेवन से ज्यादा देर तक आपको भूख भी नहीं लगेगी और पेट में भारीपन भी महसूस नहीं होगा।
मूसली के साथ एक सबसे अच्छी बात यह है की आप इसे अलग अलग तरह से खा सकते हैं, जिस से आप रोज एक तरह का खाना खाने से भी बचे रहेंगे और अलग अलग तरह के स्वादिष्ट खाने का लुत्फ़ ले पाएंगे। मूसली सेहत के लिए काफी फायदेमंद भोजन है।
क्या है मूसली?

मूसली पौष्टिक आहार है। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर, विटामिन ई, प्रोटीन, बी 12, विटामिन सी, पोटैशियम, फैटी एसिड आदि पाए जाते हैं। ये एक तरह से कॉर्न फ्लेक्स, ओट्स और फ्लेक्स का मिश्रण कहा जा सकता है। साथ ही इसमें सूखा मेवा, रोल्ड ओट्स और नट्स भी मिले होते हैं। कुछ लोग इस बात को लेकर संदेह में रहते हैं की ये भी एक तरह का मीठा आहार ही है, पर आपके लिए ये जान लेना बेहद जरुरी है की इसमें बहुत ही संतुलित मात्रा में चीनी का इस्तेमाल होता है। चीनी का काम इस्तेमाल होने की वजह से ये पूरी तरह से स्वस्थ आहार विकल्प है और साथ ही वजन संतुलित रखने में मददगार भी है। मूसली एक तरह का साबुत अनाज है जिसे हर व्यक्ति अपने खाने में शामिल कर सकता है। ये हमारे मेटाबोलिज्म को मजबूत बनाये रखने में काफी मदद करता है।
मूसली के प्रकार

वैसे तो मूसली दो तरह की होती है काली और सफ़ेद, पर सफ़ेद मूसली का प्रयोग ज्यादा किया जाता है। मूसली के साथ आप स्प्राउट्स मिलाकर भी खा सकते है साथ ही इसका सेवन सूखे मेवे फल इत्यादि के साथ भी कर सकते हैं। अपने अपने स्वाद के अनुसार हर व्यक्ति इसका इस्तेमाल करता है। दूध के साथ भिगोकर खाने पर इसका स्वाद अलग ही होता है, या ये कह लें की दूध के साथ मिलकर ये और अधिक पौष्टिक आहार बन जाता है। दही के साथ भी इसका सेवन किया जाता है। कुछ लोग इसका इस्तेमाल स्मूदी बनाने में भी करते हैं।
कमाल की बात ये है की हर तरह से इसका स्वाद कुछ अलग ही मालूम होता है। फलों के साथ मिलाकर खाने में ये बच्चो को भी बहुत पसंद आता है। ये कहना गलत नहीं होगा की एक ही प्रकार के अनाज के साथ आप अलग अलग स्वाद का मज़ा ले सकते हैं। खुद भी खाएं और बच्चों को भी खिलाएं, बच्चों को इसकी स्मूदी बहुत पसंद आएगी तो एक बार जरूर बना कर बच्चों को चखाएं।
मूसली कब खाएं और कैसे?

मूसली सम्पूर्ण आहार है जिसे नाश्ते, दिन और रात के भोजन में भी आराम से खाया जा सकता है। हमेशा इस बात का ध्यान रखें सुबह का नाश्ता फाइबर युक्त होना चाहिए जिसमे संतुलित मात्रा में चीनी भी शामिल होनी चाहिए। दिन के खाने में भी मूसली का सेवन किया जा सकता है। दही के साथ इसका सेवन करने से आपका पेट काफी देर तक भरा रहेगा और इस तरह आपको कुछ और खाने की इच्छा भी नहीं होगी। हरी सब्जियों जैसे पालक मटर आदि के साथ खाना आपके शरीर को और पोषण देगा।
अगर आप थकान महसूस करते हैं और कुछ ऐसा खाना चाहते हैं जिसे खाने के बाद ना तो आपके भारीपन महसूस हो और ना ही आपका वजन तेज़ी से बड़े तो इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है मूसली को अपने आहार में शामिल कर लेना। हरी सब्जियों के साथ साथ आप चुकंदर और गाजर जैसी सब्जियों को भी मूसली में मिलाकर खा सकते हैं। रात के खाने में भी ठीक इसी तरह इसका सेवन करें और अपने शरीर को स्वस्थ बनाये रखें।
मूसली के साथ दूध

दूध अपने आप में ही सम्पूर्ण आहार माना जाता है। लेकिन जब मूसली के साथ दूध लेने की बात आती है तो बहुत से लोग इस असमंजस में रहते हैं की गरम दूध के साथ इसका सेवन करें या ठन्डे दूध के साथ, इसका साधारण सा जवाब है की आप ठन्डे या गरम किसी भी तरह के दूध के साथ इसका सेवन कर सकते हैं। दुध के साथ लेते वक़्त कुछ बातों का ध्यान रखें जैसे, फुल्ल क्रीम दूध का इस्तेमाल न करें और अतिरिक्त चीनी का भी इस्तेमाल ना करें तो ही ये आपके स्वास्थ के लिए अधिक लाभदायक होगी।
मूसली खाने के फायदे
वजन घटाए

बढ़ता वजन आजकल हर घर की समस्या बन गया हैं, इस से निजात पाने का अच्छा और स्वस्थ तरीका हैं मूसली को अपने रोज के खाने में शामिल कर लेना।मूसली में मौजूद पोषक तत्त्व और खासतौर पर घुलनशील फाइबर वजन घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसमें मौजूद प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहइड्रेट वजन काम करने के साथ साथ हमारे पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाये रखते हैं। मूसली में ओमेगा ३ फैटी एसिड काफी मात्रा में मौजूद होता हैं और यही वजन घटाने में सबसे ज्यादा सहायक साबित होता हैं। वजन घटाने के लिए आप मूसली का सेवन फलों और सब्जियों के साथ कर सकते हैं।
नाश्ते में इसे केले, नट्स,बादाम, किशमिस, फलैक्स आदि के साथ लें।
दोपहर के खाने में चिया सीड्स, योगर्ट , दही सेब आदि के साथ खाने की कोशिश करें।
मूसली एक हल्का आहार हैं पर साथ में काफी पौष्टिक भी हैं इसलिए इसका सेवन रात में भी आराम से किया जा सकता हैं, वजन घटाने के लिए इसका सेवन दूध के साथ करें इस तरह ये जल्दी आपका वजन घटाने में मदद करेगा।
डायबिटीज

टाइप 1 मधुमेह रोगियों के लिए भी एक हद तक मूसली खाना अच्छा ही माना जाता हैं। एक संतुलित मात्रा में मूसली का सेवन करने से मधुमेह रोगियों को फायदा होता हैं। इसमें मौजूद फाइबर अधिक घुलनशील होता हैं, जो हमारे खून में मौजूद शक्कर को सही मात्रा में रखता हैं, ना इसके ज्यादा बढ़ने का खतरा होता हैं और ना ही ज्यादा कम होने का। फिर भी किसी भी प्रकार का भोजन इस्तेमाल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।
कोलेस्ट्रॉल

मूसली में मौजूद घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकता हैं जिसकी वजह से आपका दिल अच्छी तरह से अपना काम कर पाता हैं। इसमें बीटा ग्लूकन भी भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं जिसका काम ही कोलेस्ट्रॉल के स्टार को बनाये रखना हैं। स्वस्थ वकती के साथ साथ दिल के मरीज भी मूसली का सेवन आराम से कर सकते हैं।
ब्रेस्टमिल्क बढ़ाए

नई माँ हर समय अपने बच्चे के लिए परेशान रहती हैं। नवजात शिशु पूरी तरह से अपनी माँ पर आश्रित होते हैं। माँ के दूध से उनका मानसिक और शारीरिक विकास जुड़ा होता हैं। ऐसे में अक्सर कुछ महिलाओं को डिलीवरी के बाद ब्रेस्टमिल्क कम आने पर या ना आने पर ये चिंता सताती रहती हैं की उनके बच्चे का पेट कैसे भरेगा। इसके लिए मूसली एक अच्छा उपाय हैं। इसके लिए उन्हें अपने आहार में सफ़ेद मूसली का इस्तेमाल करना चाहिए। इसमें फाइबर की मात्रा भरपूर रूप से पायी जाती हैं जिसकी वजह से ब्रेस्टमिल्क धीरे धीरे बढ़ने लगता हैं।
कब्ज

कब्ज एक ऐसी बीमारी बन गया हैं जिस से आजकल हर व्यक्ति जूझ रहा हैं। इसके पीछे बहुत सी वजह हैं, पानी की कमी होना, ठीक तरह से खाना ना खाना, पाचन तंत्र का कमजोर या धीमा होना, खाने में फाइबर की अतिरिक्त कमी होना आदि। इन सभी समस्याओं पर ध्यान देते हुए हमें अपने खाने में मूसली को शामिल करना चाहिए। इसमें मजूद उच्च स्टार का घुलनशील फाइबर हमारे पाचन तंत्र को मजबूती देगा और जब खाना आसानी से पचने लगेगा तो कब्ज जैसी समस्या का सवाल ही नहीं बनता। इस तरह आपके आहार में एक अच्छा और पौष्टिक अनाज भी शामिल हो जाएगा और आपको कब्ज जैसी तकलीफदेह बीमारी से राहत मिल जाएगी।
FAQ | क्या आप जानते हैं
क्या बच्चे मूसली खा सकते हैं?
मूसली खाने का सबसे सही तरीका क्या हैं?
एक दिन में मूसली का कितना सेवन किया जा सकता हैं?
क्या मूसली सूखी खायी जा सकती हैं?
क्या मूसली को खाली पेट खाना ठीक हैं?
मूसली को गर्म दूध के साथ खाएं या ठंडे दूध के साथ?
मूसली कहाँ से खरीदें?
