नहीं बरती लीची इस तरह से खाने में सावधानी तो सेहत के लिए हैं कई खतरे
खाली पेट इसके
सेवन से लीची में पाया जाने वाला टॉक्सिन आपके शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा को कम कर सकता
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Litchi Side Effects: बेशक़ फल आपकी सेहत के लिए अच्छे हैं, लेकिन लीची जैसे कुछ फल आपको खाली पेट नहीं खाने चाहिए। लीची एक छोटा ट्रॉपिकल फल है जो अपने मीठे और लच्छेदार स्वाद के लिए जाना जाता है। इसे अक्सर ताज़ा ही खाते हैं और कभी-कभी दूसरे खाने की चीज़ों, जैसे कि आइस क्रीम या लीची के जूस, में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसमें बहुत सारे विटामिन्स, मिनरल्स, और एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं जिनमें कॉपर, पोटैशियम और विटामिन सी शामिल हैं। यह आपकी त्वचा की सुरक्षा करता है, इम्यून सिस्टम को बढ़ाता है, वज़न कम करने में मदद करता है, और कैंसर को रोकता है। हालांकि इसके फ़ायदों की सीधी जांच अभी बाक़ी है, पर ऐसा माना जाता है कि आप लीची को अपनी हेल्दी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

लेकिन शोधकर्ताओं की मानें तो खाली पेट इसके सेवन से लीची में पाया जाने वाला टॉक्सिन आपके शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा को कम कर सकता है।
कच्ची लीची से हो सकती है उल्टी

क्या आपको पता है कि कच्ची लीची में हाइपोग्लाइसिन ए और मिथाइलिनसाइक्लो-प्रोपाइल ग्लाइसिन है, जिसके कारण इसके ज़्यादा सेवन से आपको उल्टी भी हो सकती है? दरअसल हाइपोग्लाइसिन ए प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला अमीनो एसिड है जिसकी वजह से उल्टी होने का डर रहता है। दूसरी तरफ लीची के बीजों में पाया जाने वाला मिथाइलिनसाइक्लो-प्रोपाइल ग्लाइसिन एक ज़हरीला मिश्रण है जो आपके शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा को अचानक से कम करता है और उल्टी, बेहोशी, तेज़ बुखार, और सुस्ती का कारण बनता है। यूँ तो ये गंभीर समस्याओं के लिए ज़िम्मेदार नहीं है, लेकिन सही समय पर एहतियात न बरतने से व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है। इसलिए भूलकर भी कच्ची लीची रोज़ खाली पेट न खाएं। ध्यान दें कि एक-दो बार ग़लती से ऐसा होने पर घबराने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन ये आपकी आदत में शुमार नहीं होना चाहिए।
फ़ूड पॉइज़निंग

लीची में पाया जाने वाला रसायन मेथाइलिनसाइक्लो-प्रोपाइल ग्लाइसिन आपके मस्तिष्क पर बुरा असर डालता है जिससे बदहज़मी, फ़ूड पॉइज़निंग, पेट दर्द, दस्त, जी मिचलाना, एसिडिटी, और पेट में सूजन जैसी स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। फल की अंदरूनी परत से ये पता नहीं लग पाता कि लीची ख़राब है या फिर वह बीज के निशान हैं। इसके छिपे हुए माइक्रोब्स के बुरे असर से बचने के लिए लीची खाने से पहले अच्छी तरह छील लें। डायरिया जैसी समस्याओं से बचने के लिए लीची का सेवन कम करें। अच्छी दुकान से ही फल खरीदें और इसे धोकर ही खाएं। अगर आपने खाने में कुछ भारी खाया है तो लीची न खाएं। एहतियात बरतने से आप अपने फल का स्वाद भी ले पाएंगे और आपका स्वास्थ्य भी बना रहेगा।
बुखार

कच्ची लीची खाली पेट खाने से तेज़ बुखार और मिर्गी के दौरे भी पड़ सकते हैं। ये बुखार जानलेवा और लाइलाज साबित हो सकता है। कई बार इससे इंटरनल ब्लीडिंग और दूसरी गंभीर समस्याएं जैसे हार्मोनल इम्बैलेंस, नकसीर, इन्फेक्शन्स होने का भी डर बना रहता है। लीची में मौजूद ज़हरीला पदार्थ एक्यूट इनसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी दिमाग़ी बुखार जैसी ख़तरनाक बीमारी को जन्म दे सकता है। अगर आपको लीची खाने के बाद गले में ख़राश, उल्टी या बेहोशी जैसा महसूस हो रहा है तो देर न करें और तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ। अगर आपने दिनभर में अत्यधिक ठंडी चीज़ें खायीं हैं, तो बुखार इसकी वजह भी हो सकता है। इसलिए अपने दिन भर की आहार सूची को अच्छे से जांच कर ही किसी फैसले पर पहुंचें। माता-पिता बच्चों को अत्यधिक लीची देने से बचें और ख़ुद भी सीमित मात्रा में ही इसका सेवन करें।
पेट दर्द

कोई भी फल चाहे कितना ही स्वादिष्ट और हैल्दी क्यों न हो, लेकिन उसका अत्यधिक सेवन आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं दे सकता है। इसी तरह लीची का अत्यधिक सेवन पेट दर्द और डायरिया जैसी समस्याओं को बढ़ावा देता है, इसलिए जितना हो सके उतना कम इसे अपने आहार सूची में शामिल करें। इस तरह की समस्या होने पर आप लीची खाने की जगह लीची का जूस पियें। ताज़ी लीची का ही चुनाव करें और उसे छील कर अच्छे से परख लें कि उसमें कोई कीड़ा न हो। अगर फिर भी इसे खाने के बाद आपको कोई परेशानी होती है तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें। अगर आपका बच्चा लीची पसंद करता है, तो कोशिश करें कि आप उसके साथ बैठकर ये फल छीलें और उसे ख़राब लीची दिखाकर समझाएं कि कैसे ये जानलेवा साबित हो सकता है।
शुगर की मात्रा कम होना

स्टडीज़ के अनुसार लीची में हाइपोग्लाइसिन ए है, जिस टॉक्सिन के कारण आपका शरीर ग्लूकोज़ नहीं बना पाता। इस वजह से यह उन छोटे बच्चों पर प्रभाव डालता है जिनके शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा पहले से ही कम है। इसलिए अगर बच्चे यह फल खाली पेट खाएं, तो इससे उनके शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा जल्दी कम होती है, जिससे लीची का उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। और तो और, इससे थकान, चक्कर आना, याददाश्त में कमी होना, और उनींदेपन जैसी कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी होती हैं। अक्सर स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी माता-पिता को सलाह देते हैं कि वह बच्चों की लीची खाने की आदत कम करें और इस फल को शाम के खाने से पहले न खिलाएं।
त्वचा सम्बन्धी समस्याएं

अगर आपको त्वचा से जुड़ी किसी भी तरह की एलर्जी है तो लीची का सेवन बंद कर दें। जिन लोगों को इस तरह की कोई समस्या नहीं है लेकिन फिर भी इस फल को खाने से उनकी त्वचा में जलन या लालपन हो रहा है तो लीची से दूरी बनाने में ही उनकी भलाई है। इतना ही नहीं बल्कि साथ-ही- साथ तुरंत त्वचा विशेषज्ञ के पास जाकर अपना इलाज करवाएं। ध्यान दें कि ज़रा सी लापरवाही लम्बे समय के लिए बहुत नुकसानदायी साबित हो सकती है, इसलिए शुरूआती लक्षणों के बाद ही एक भरोसेमंद डॉक्टर से संपर्क करें। इसके बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इस फल का सीमित सेवन करें, चाहे कोई चीज़ कितनी भी स्वास्थवर्धक क्यों ना हो उसका सेवन उतना ही करें जितने में आपको कोई नुक़सान ना उठाना पड़े, और लीची का जूस या आइस क्रीम जैसे व्यंजन भी कभी कभी ही खाएं।
