बच्चों को टिफिन में क्या दें और क्या न दें, यह अधिकतर अभिभावकों की सबसे बड़ी समस्या होती है। वैसे तो माताएं बच्चों को अपनी तरफ से हैल्दी फूड खिलाने की कोशिश करती हैं, जिसे आप बच्चे के लिए लाभदायक समझ रही हैं, वह उसके लिए हानिकारक भी हो सकता है, इसलिए बच्चों के टिफिन में इस तरह की गलतियां न करें।
साबुत फल दें, कटे हुए न दें
कई बार स्कूल भी बच्चों के माता-पिता पर टिफिन बॉक्स में फल एवं सलाद भेजने का दबाव बनाते हैं। ऐसा फलों एवं सब्जियों की न्यूट्रिशनल वैल्यू को ध्यान में रखते हुए किया जाता है, लेकिन हमें इस बात को समझना चाहिए कि फलों एवं सब्जियों को काट कर रखने और काफी देर बाद उसका सेवन करने से उसमें मौजूद पोषक तत्व ऑक्सीडाइज्ड हो जाते हैं। पोषक तत्वों के नष्ट होने के साथ ही उनमें कीटाणुओं के लगने का खतरा भी रहता है। संक्रमण से बचने के लिए कच्चे और सेमी-कुकड फूड को टिफिन में नहीं दें। इससे बेहतर होगा कि सेब, केला, आड़ू, नाशपाती, बेर, जामुन और चेरी ही टिफिन में रखें। ये फल एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं और इनसे आपके बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढऩे में मदद करते हैं।
ब्रेड सैंडविच की जगह स्टिर फ्राइड सब्जियां दें
सुबह के समय स्टिर फ्राइंग जल्दी से और आसानी से हो जाता है। यह खाना पकाते समय नष्ट होने वाले पोषक तत्वों को भी बचाकर रखता है। स्टिर फ्राइड वेजिटेबल् स में उनका रंग, संरचना और स्वाद बरकरार रहता है। लंबे समय तक पकाने और ओवर कुक करने से न्यूट्रिशनल वैल्यू खत्म हो जाती है, इसलिये शॉर्ट कुकिंग टाइम मेथड आपके बच्चे की सेहत के लिए वरदान साबित हो सकता है। तिल के तेल या जैतून के तेल,प्याज, लहसुन, नमक और कालीमिर्च का इस्तेमाल करें। हल्का सा सॉटे करें और रोस्टेड सनफ्लावर सीड्स, तिल, अलसी या कद्दू के बीजों से टॉपिंग करें। तरह-तरह के मसालों जैसे कि अजवायन, दालचीनी, जायफल, लौंग और ऑयल सीड्स का भी इस् तेमाल करें, क् योंकि ये मिनरल्स जैसे कि आयरन, कैल्शियम, फॉस् फोरस,सेलेनियम, मैग् नीशियम, जिंक का अच्छा स्रोत हैं, साथ ही इनसे खाने को पचाने में भी मदद मिलती
है।

स्प्राउट सलाद की जगह स्प्राउट पैनकेक्स या कटलेट्स दें
कच्चे अंकुरित अनाजों को खाने से खाद्य-पदार्थ जनित रोग हो सकते हैं। कच्चे प्याज एवं टमाटर से तैयार होने वाले स्प्राउट सलाद की जगह इनसे तैयार होने वाले दूसरे व् यंजनों का सेवन किया जा सकता है, जो कि तरोताजा होंगे, जैसे कि अंकुरित अनाज को उबालें। मिक्सी में पीस लें और अलग-अलग तरह के साबूत अनाज जैसे कि रागी, क् यूनोआ, ओट्स, बार्ली इत् यादि या ब्राउन राइस के साथ इसे मिलाएं और पैनकेक बनाएं। इन्हें बनाने के कई घंटों बाद भी खाया जा सकता है। इन् हें सब्जियों के साथ मिलाकर और शैलो फ्राइड कर कटलेट बनाया जा सकता है। इनमें डायटरी फाइबर मौजूद होते हैं, जिनसे कब्ज को दूर रखने में मदद मिलती है। साथ ही इनमें मौजूद मिनरल्स जैसे कि कैल्शियम, आयरन फॉस् फोरस, पोटैशियम, सेले नियम, जिंक और मैगनीशियम भी पाया जाता है, जिनसे रोग प्रतिरोधक प्रणाली को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
एयर फ्राइड, बेक्ड या स्टीम्ड ड्राइ स्नैक्स को चुनें
फ्राइड स्नैक्स जैसे कि बटाटा वड़ा, मेंदु वड़ा, ब्रेड रोल्स, पूरी इत् यादि से पेट फूलना और गैस संबंधित समस्या हो सकती है, इसलिए ऑयली और फ्राइड फूड बच्चों को कम देने की कोशिश करें। इसके अलावा, अत्यधिक उच् च तापमान पर खाने को तला जाता है, जिसे ट्रांसफैक् ट्स (बैडफैट्स) का निर्माण होता है, जो आपके बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। इसकी जगह रोस्टेड, बेक्ड, एयर फ्राइड और स्टीम्ड स्नैक्स जैसे कि रोस् टेड मखाना और कॉर्न, बेक्ड रोस्टेड आलू, स्टीम्ड मुठिया, बेक्ड खाकरा इत्यादि का सेवन करें। मैदा, सूजी और बेसन का इस्तेमाल नहीं करें, बल्कि इनकी जगह फाइबर युक्त अनाजों, दालों और सब्जियों का सेवन करें। नई रेसपीज बनाने के लिए अपनी क्रिएटिविटी का इस्तेमाल करें, जो आपके बच्चों को पसंद आएगी।
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