Ranveer Singh Daiva Mimics Controversy
Ranveer Singh Daiva Mimics Controversy

Overview: लोक आस्था और फिल्मी अंदाज़ की टकराहट

कांतारा के दैव से जुड़े मजाक के आरोपों में फंसे रणवीर सिंह अब कानूनी राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जहां एक ओर विरोध करने वाले इसे आस्था का अपमान बता रहे हैं, वहीं अभिनेता इसे गलतफहमी और अभिव्यक्ति की आज़ादी का मामला कह रहे हैं। अब अंतिम फैसला कर्नाटक हाईकोर्ट के हाथ में है, जो इस विवाद की दिशा तय करेगा।

Ranveer Singh Daiva Mimics Controversy : बॉलीवुड के एनर्जेटिक स्टार रणवीर सिंह अपने अलग-अलग अंदाज़ और बेबाक परफॉर्मेंस के लिए जाने जाते हैं, लेकिन कई बार यही अंदाज़ विवाद की वजह भी बन जाता है। कांतारा फिल्म में दिखाए गए दैव से जुड़ा एक मामला ऐसा ही बनकर सामने आया, जिसमें रणवीर सिंह पर दैव का मजाक उड़ाने के आरोप लगे। मामला इतना बढ़ गया कि अब अभिनेता को कर्नाटक हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी है।

क्या है पूरा दैव विवाद

कांतारा फिल्म में दिखाए गए दैव और बूथा कोला जैसी लोक परंपराएं कर्नाटक की गहरी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हैं। आरोप है कि रणवीर सिंह ने एक इवेंट/परफॉर्मेंस के दौरान इन दैवीय परंपराओं की नकल मजाकिया अंदाज़ में की, जिससे कुछ संगठनों और लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। इसके बाद उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई।

क्यों भड़के लोग और संगठन

स्थानीय संगठनों और परंपराओं से जुड़े लोगों का कहना है कि दैव किसी किरदार या मनोरंजन का हिस्सा नहीं, बल्कि श्रद्धा का विषय है। उनका आरोप है कि फिल्मी मंच पर इस तरह की नकल से परंपरा का मजाक उड़ाया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। इसी नाराजगी ने विवाद को और गहरा कर दिया।

रणवीर सिंह की सफाई

विवाद बढ़ने पर रणवीर सिंह की ओर से कहा गया कि उनका इरादा किसी भी समुदाय या परंपरा को ठेस पहुंचाने का नहीं था। उन्होंने इसे एक कलाकार की सहज अभिव्यक्ति बताया और कहा कि इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। बावजूद इसके, मामला शांत नहीं हुआ और कानूनी मोड़ ले लिया।

हाईकोर्ट में क्यों पहुंचा मामला

अपने खिलाफ दर्ज शिकायतों और संभावित कानूनी कार्रवाई से राहत पाने के लिए रणवीर सिंह ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई कि उनके खिलाफ दर्ज मामले को रद्द किया जाए या कम से कम उन्हें अंतरिम राहत दी जाए, क्योंकि यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा है।

आगे क्या हो सकता है

अब इस पूरे विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट की नजर है। कोर्ट यह तय करेगा कि कलाकारों की रचनात्मक आज़ादी की सीमा कहां तक है और लोक-धार्मिक परंपराओं के सम्मान को कैसे संतुलित किया जाए। इस फैसले का असर सिर्फ रणवीर सिंह पर ही नहीं, बल्कि भविष्य में इस तरह के मामलों पर भी पड़ सकता है।

मेरा नाम श्वेता गोयल है। मैंने वाणिज्य (Commerce) में स्नातक किया है और पिछले तीन वर्षों से गृहलक्ष्मी डिजिटल प्लेटफॉर्म से बतौर कंटेंट राइटर जुड़ी हूं। यहां मैं महिलाओं से जुड़े विषयों जैसे गृहस्थ जीवन, फैमिली वेलनेस, किचन से लेकर करियर...