नोट-बंदी के सबब अवाम की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही थीं। शहर के सारिफीन (ग्राहक) बैंकों में जमा अपने एकाउंट से मतलूबा (वांछित) रकम निकालने के लिए जितने परेशान थे, उससे कहीं ज्यादा दिक्कत देहात में रहने वाले ना-ख्वाँदा अफराद (अशिक्षित लोगों) के सामने थी। राम दयाल का ताल्लुक भी गाँव से […]
