Hindi Motivational Story
Hindi Motivational Story

Hindi Motivational Story: रात के सपने ने आकुल व्याकुल कर रखा है। सपने में जो कुछ भी देखा उसे भूलने की कोशिश बार बार कर रही। लेकिन सपना यादों से दूर नहीं हो पा रहा। ओह! कितना घबराया हुआ था तन्मय।  उसकी बेचैनी देख लग रहा था,वह आज भी वह उतना ही प्रेम करता हैं। भूल नहीं पाया है वह। भूले भी कैसे। मैं भी कहां उसे भूल  पाई हूं । लाख कोशिश कर लूँ। वक्त बेवक्त याद आ तो जाता ही हैं। लेकिन किस से पता करूं। जिससे पूछूँगी सब फिर  अनर्गल और बेबुनियाद बातें बनाएगें। अच्छा खासा जीवन  गर्त कर जायेंगे।

सपने को याद कर मिताली की  पीड़ा बढ़ती जा रही । तबीयत  नासाद होती जा रही हैं। बस एक झलक देखने की तमन्ना दिल में जागृत हो रही। क्या सचमुच वह अब भी उतना ही प्रेम करता हैं? तभी मोबाइल में मैसेज का टोन सोच को भंग कर देता है। ओह। सुबह सुबह अननोन नंबर से मैसेज! ये भी क्या बला है!! मैसेज पढ़ना शुरू की तो बस पढ़ती गई,  “एक बार मिल तो लेती। रोज़ पढ़ता हूँ तुम्हें। तुम्हें पढ़ कर जी लेता हूँ। तुम्हारे सोशल मीडिया के नोटिफिकेशन से मेरा मोर्निंग  गुड होता हैं।अब तुम कहां चली गई । क्या अब यहां से भी दूर जाने का इरादा है। मेरे जीने का सहारा हो तुम। सच तो यह हैं मिताली,तुमसे प्रेम करते करते तुम्हें पूजने लगा हूँ। तुममें मैं मेघा और श्री का दर्शन करता हूँ।तुम ही कहती हो जब प्रेम पूजा बन जाए तो वही संस्कार में फलित होता है। उसे ही निष्ठा और समर्पण कहा गया है। आज मैं थक हार मेसेज कर रहा हूँ। ऐसे तुम्हारा नम्बर मेरे पास हमेशा रहता हैं। लेकिन कॉल  नहीं करता । क्योंकि तुम्हें उदास कभी नहीं देखना चाहता। तुम्हें नही पता। जब भी अवसाद वाला तुम्हारा पोस्ट पढ़ता हूं तो  बेचैन हो उठता हूँ। तुमसे मिलने की चाहत बढ़ जाती हैं। लेकिन दूर चला जाता हूं। बहुत दूर। तुम्हें खुश करने की चाहत में … । एक बात सुनो अब तो लिखने भी लगा हूँ। तुम देखोगी तो कहोगी व्याकरण सुधार लो। तुम्हारे मास्टरी से तो मुझे हमेशा डर लगता आया। “

मैसेज पढ़कर मिताली किंकर्तव्यविमूढ़ सी हो गई। भावों को कागज पर सहेजने लगी। “ कसक तो मेरे अंदर भी रह गई। लेकिन  मेरा इरादा तो कभी नहीं था किसी को दुख पहुंचाना। और आज भी नहीं चाहती। किसी को मेरी वजह से दुख पहुँचे। लेकिन अब थोड़ी थोड़ी बदल चुकी हूँ। अब सबको प्रतिउत्तर देना चाहती हूं। हर उस व्यक्ति से उसी के भाषा में जबाब देना चाहती हूं। जीवन को सठम्‌ साठयम्‌ समाचरेयत्‌ के परिभाषा पर उतारना चाहती हूँ। किसी ऐसे कंधे की तलाश में रहती हूँ,जहां मन में फलित सारी उत्कंठा को उड़ेल दूं। गले लग कर धड़कन की धुन किसी के कान को सुन मेरे पीठ को हौले से थपपथपा कर नया फ्यूल भरें। मुझे मेरी खूबियां को बिना एहसान के जता जाए। कह जाए तुमसे मेरी दुनिया हैं। मैं तुम्हें प्रति उत्तर भेज सकती हूँ। परंतु मैं भेजुंगी नहीं। तुम्हारा अपना परिवार हैं। भूलवश अगर तुम्हारी पत्नी ने पढ़ ली,तो  तुम्हारे पास जो नि: स्वार्थ प्रेम हैं। तुम उसे भी खो बैठोगे। मैं यह हरगिज नहीं चाहती। तुम्हारा वह मुस्कुराता चेहरा मायूस हो जाए।  तुम्हें कैसे बताऊँ मैं भी तुमसे उतना ही प्रेम करती हूँ। प्रेम करने के लिए पास होना सुनना,कहना,देखना,स्पर्श करना ज़रूरी नहीं एक दूसरे के हदय में रहना प्रेम हैं। प्रेम में शरीरिक स्थिति नहीं होती। यह तो दिल का मामला है। इसे तो सहेजा जाता है। हमने सुना है प्रेम और भक्ति तो छुपा कर की जाती है। विद्या और दान जितना बांटोगे उतना फ़लित होता हैं। मेरे जीवन का सूत्र भी यही हैं। मैं भी तुम्हें हमेशा अपने हृदय में रखी हूँ।”

लिखते लिखते मिताली की आंखें डबडबा गई ।   जीवन के यात्रा की कसमकश ने उसके मन को  व्यथित कर दिया । वह  बेचैन हो सामने रखे अखबारों पर कलम घिंसने लगी। इतने में किसी के आने की आहट महसूस हुई । मीताली हड़बड़ा गई। हड़बड़ाट में अखबार को पलटते हुए सामने मेज पर रखा कॉफी का मग  टूट कर बिखर गया। ये मग उसका बहुत प्रिय था। वह अफसोस जताने लगी। झल्ला कर भनभनाने लगी।
  “ ओह! एक भी चीज़ संभाल कर नहीं रख पाती हूँ। तुम सच ही कहते हो बादल मैं कुछ भी मेरे वश का नहीं। बड़े प्यार से दी थी कनिका ने जन्मदिन पर हमें। तुम्हें तो  याद ही होगा बोली थी संभाल कर रखना। तुम भी उसके हाँ में हाँ मिलाए थे। “

मिताली के मासूमियत भरी झल्लाहट को देख बादल मुस्कुरा दिया। उसे अपने तरफ खींच गले में हाथ डालकर  कर कहा, “ डार्लिंग  यह  तो कनिका ने आपको इसलिए कही थी,जो आप से  कप ग्लास संभलते नहीं।  हाथों से छूट जाता हैं। ना ना… मैं नहीं कहता! ऐसा आप कहती हैं। तो भला इसमें आपकी क्या गलती।  छोड़िए जाने दीजिए। जीवन यात्रा हैं। इसमें बहुत कुछ मिलता है। बहुत छूट जाता हैं। यह तो एक कप था।  इसमें क्या घबराना। “

मिताली सहज हो गई। सच ही तो कह रहा बादल। जीवन तो यात्रा हैं।वह गुनगुनाने लगी , “बीते हुऐ लम्हों की कसक साथ तो होगी। ख्वाबों में हो चाहे मुलकात तो होगी।”