Woman with long dark hair wearing a white textured sweater, gently feeding a baby. The baby, dressed in white, sits in a gray high chair and looks up attentively at the woman as she offers a spoonful of food from a yellow bowl.
A mother smiles tenderly at her baby during a quiet and nourishing mealtime at home.

Summary:बेबी फूड गाइड: 6 महीने के बाद बच्चे के खानपान के जरूरी नियम

शिशु के छह महीने पूरे होने पर सही और पौष्टिक आहार देना बेहद जरूरी होता है। फाइबर, मौसमी फल-सब्जियां और स्थानीय भोजन से बच्चे की सेहत बेहतर होती है और वह खाने को लेकर चूजी नहीं बनता।

Kid Diet: बच्चे और मां की जिंदगी में शिशु के छह महीने पूरे कर लेना एक बहुत ही अहम चरण होता है। इस अवस्था को पूरा करने के बाद बच्चे ऊपर के आहार को जानना शुरु करते हैं। हर मां चाहती है कि उसका बच्चा पौष्टिक, स्वादिष्ट और सेहत से भरपूर चीजें खाए। वैसे भी इस समय बच्चों का खान पान उनके आने वाले जीवन के लिए बहुत अहम है। जानते हैं कि बच्चों को दूध छुड़ाने के दौरान क्या खिलाना चाहिए, जिससे उनकी सेहत बनी रहे और वे स्वाद में भी प्रयोग करने से ना चूकें।

फाइबर का रखें ख्याल

फाइबर बड़ों के साथ साथ बच्चों के लिए भी जरुरी होता है। ऐसा बहुत बार देखने में आता है कि बच्चे जब नया नया खाना शुरु करते हैं तो उन्हें पेट संबंधी काफी समस्याएं शुरु होती हैं। ऐसे में उनके खाने में फाइबर का ध्यान रखना आवश्यक है। आप रागी की इडली या पेन केक उन्हें दे सकते हैं।

फल दें, फलों के रस नहीं

An overhead shot of a vibrant fruit salad in a clear glass bowl, placed on a dark wooden table.
A colorful and refreshing bowl of mixed fruit

अक्सर लोग बच्चों को फलों के रस पीने को देते हैं। बच्चों को भी यह स्वाद से भरपूर लगते हैं। लेकिन फलों के रस नहीं बल्कि फल देना बच्चों के लिए फायदेमंद है। छोटे बच्चों के दांत नहीं होते। वे साबुत फल तो खा नहीं सकते। उन्हें फलों को स्टीम करके दें। आप सेब और चीकू को इस तरह दे सकते हैं। वहीं आप संतरे की उन्हें फांके दे सकते हैं। वो उससे खेलते रहेंगे और उसे खाते भी रहेंगे। अगर बच्चा फल इस तरह खाने से इंकार कर रहा है तो फल के रस की जगह उसकी स्मूदी बनाकर दें।

खाने में करें प्रयोग

बहुत बार देखा जाता है कुछ छोटे बच्चे दलिया और खिचड़ी तक ही सीमित रह जाते हैं। ऐसा इसलिए भी होता है कि उन्हें बार बार वही दिया जाता है। आप जितना इस समय खाने को लेकर एक्सपेरिमेंट करेंगी उन्हें खिलाएंगी उनके टेस्ट बड्स डवलप होंगे और वे खाने को लेकर चूजी नहीं रहेंगे। कोई भी नई चीज उनकी पसंदीदा चीज के साथ शामिल करें।

स्थानीय खानों को महत्व दें

A baby sitting in a blue high chair while being fed with a spoon by an adult hand.
A tender feeding moment as a baby enjoys their meal, highlighting early nutrition and caregiver bonding.

सेलिब्रेटी डाइटिशयन रुजुता दिवेकर हमेशा स्थानीय खानों को महत्व देती हैं। आप भी शिशु के खान पान में इस बात का ध्यान रखें कि वो स्थानीय खाने खाएं। आप इस तनाव में ना रहें कि मैं प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन, आयरन अपने बच्चे को दूं। आप ज्यादा से ज्यादा उन्हें मौसमी फल सब्जियां खिलाएं। बस आपको इस चीज पर ध्यान देना है कि उनका खाना हल्का ओर सुपाच्य होना चाहिए। सर्दी के मौसम में आप उन्हें खजूर, चुकंदर, आंवला दे सकती हैं। उन्हें सब्जियों के सूप दें।

तब डॉक्टर से लें सलाह

आपके बच्चे को आपसे बेहतर कोई नहीं जानता। आजकल बच्चों को एलर्जी की भी समस्या बहुत देखने को मिलती है। आप भी नोट करें कि बच्चा किसी विशेष चीज को खाकर परेशान हो रहा है तो हो सकता है कि उसे उस चीज से एलर्जी हो। इस संदर्भ में डॉक्टर से बात करें। हां, बस बच्चों को बहुत मीठा और बहुत घी वाला खाना नहीं देना है। आप डॉक्टर की सलाह के अनुसार चलें। आपका बच्चा सेहतमंद बना रहेगा।