कैसी हो योगी की दिनचर्या?
लेकिन अगर आप योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहते हैं तथा निरोगी जीवन जीना चाहते हैं, तो निम्नलिखित दिनचर्या को अपना सकते हैं-
प्रातः- 4 से 5 बजे- ब्रह्म मुहुर्त (उषा काल में उठना), प्रभु स्मरण।
प्रातः- 5 से 6 बजे- शौच, आसन, प्राणायाम, संध्या।
प्रातः- 6 से 7 बजे- आसन, प्राणायाम, संध्या
प्रातः- 7 से 8 बजे- हवन, स्वाध्याय।
प्रातः- 8 से 9 बजे- पारिवारिक कार्य।
प्रातः- 9 से 10 बजे- भोजन।
प्रातः- 10 से सांय 5 बजे तक- अपना व्यावसायिक कार्य।
सांय- 5 से 6 बजे- पारिवारिक कार्य।
सांय- 6 से 7 बजे- शौच, आसन, संध्या हवन आदि।
सांय- 7 से 8 बजे- भ्रमण, स्वाध्याय।
सांय- 8 से 9 बजे- भोजन।
सांय- 9 से 10 बजे- संगीत व्याख्यान, सत्संग, स्वाध्याय।
इच्छानुसार परोपकार के सामाजिक कार्य। दिन भर के अच्छे व बुरे कार्यों का चिन्तन करें। उसके पश्चात् तमाम विचारों, चिंताओं को अपने दिमाग से निकाल कर, निश्चित हो कर प्रभु का स्मरण करके आराम करें।
