आखिरकार एक बार फिर मौसम ने करवट ली और सर्दी दरवाजे पर दस्तक दे रही है। जी हां, नवंबर के महीने में घरों के अंदर जहां सर्दियों से बचने के उपायों पर स्वेटर, गद्दे-रजाई को लेकर लोग फिक्रमंद नजर आते हैं, वहीं उससे भी ज्यादा उनका ध्यान खाने-पीने की मनपंसद चीजों पर होता है। हो भी क्यों ना, भई गर्मी और बरसात में खाने का लुत्फ कम जो मिलता है सर्दियों में दिन की शुरुआत गरमा-गरम चाय के साथ दिन को खुशनुमा बना देती है।

यकीन मानिए, चाय के अलग-अलग फ्लेवर टेस्ट करने का यही सही वक्त है। कभी ब्लैक टी का लुत्फ तो कभी इलायची फ्लेवर का अंदाज, कभी अदरक का अनोखा हैल्दी स्वाद। जब इससे भी मन भर जाए तो गुड़ की चाय का गजब जायका जोश से भर देता है। मौसम के मूड के साथ कॉफी का मेलजोल भी कम नहीं है। मन किया तो ब्लैक कॉफी नहीं तो हॉट कॉफी से एनर्जी का मिलता है फुलडोज। दिनचर्या का आगाज इतना सुखद हो तो सोचिए आगे का जायका कैसा होगा।

ब्रेकफास्ट में ऑप्शन की कमी नहीं, ब्रेड टोस्ट से लेकर पराठों की दुनिया आपका स्वागत कर रही है। आलू, प्याज तो पुरानी बात हो जाती है, सर्दी में गोभी, पालक, बथुआ, मेथी के पराठों की वैराइटीज जुबान से हटने का नाम ही नहीं लेती। भई, पराठों से याद आया, दिल्ली 6 यानी चांदनी चौक के पराठे चखने का मौसम आ गया है। अब दिल्ली 6 की बात कर ही दी है तो एक और जायके की चर्चा भी कर दूं। चटपटी चाट… गोलगप्पे… गर्मागर्म कचौड़ी, पकौड़े आ गया ना
मुंह में पानी। गरमा-गरम चाट की चटपटी चटनी जिसे गर्मियों में खाते वक्त नाक लाल हो जाती है और पसीने छूटने लगते हैं, उसी चटनी की तलब इतनी बढ़ जाती है कि जुबान मांगे मोर। इन सबके बीच स्ट्रीट फूड वालों की चांदी हो जाती है। गर्मियों में इसे ट्राई करते वक्त खाने से पहले एक बार सोचते हैं वहीं सर्दियों में तो बेफिक्र होकर स्ट्रीट फूड का मजा लेते हैं फिर चाहे हाइजीन हो या ना हो असल बात तो जायके से होती है। अब कम से कम सर्दियों में तो कुछ खराब नहीं होता तो ऐसे में कुछ भी खिलाओ बस गरमागर्म होना चाहिए।

वैसे स्ट्रीट फूड की बात चली है तो चाइनीज़ तक भी जरूर जाएगी। भई गरमागरम चिली पोटैटो, स्पाइसी चाउमीन के साथ तीखी चटनी वाले मोमोज के क्या कहने। भले ही यह हर मौसम में मिलते हों लेकिन सर्दियों में इसका
ज़ायका सर चढ़कर बोलता है। अगर थोड़ा ज्यादा भी खा लिया तो डर नहीं कि पेट में परेशानी हो जाएगी। आखिर सर्दियां जो हैं। हां ये अलग बात है कि खाना तो ठीक है ये भी माना कि पेट भी गड़बड़ नहीं होगा लेकिन इतना जरूर है कि 3-4 महीनों की सर्दियों में वेट पर असर जरूर पड़ जाता है।

इस मौसम में नमकीन से लेकर मीठे तक हर जायके का स्वाद आप ले सकते हैं। त्योहार और शादियां तो जैसे इस मौसम में चार चांद लगाने का काम कर जाते हैं। खाने के मेन्यू में सब्जियों की लंबी कतार देखने को मिल जाती है। साल भर आलू की बादशाहत मानो इस मौसम में फीकी पड़ जाती है। हरी सब्जियों के आगे आलू की एक नहीं चलती। सर्दियां तो जैसे साग के लिए बनी हैं। सरसों, मेथी, सोया सब अपने जायके की खुशबू से लोगों का दिल जीतने में जुट जाते हैं। वहीं पूरी-कचौरी, तंदूरी रोटियां, मिस्सी और मक्के की रोटी के तो कहने ही क्या। 

सर्दी की दस्तक हो, मिठास का जिक्र ना हो, ये भला कैसे हो सकता है तो जनाब गरमा-गर्म गुलाब जामुन, जलेबियां और गर्म गाजर का हलवा जायके के लिए उतना ही जरूरी हो जाता है, जितना किसी प्रश्नपत्र में प्रश्न संख्या 1 का अनिवार्य होना। मीठे के शौकीन लोगों के लिए इनके बिना खाना पचाना भी मुश्किल नजर आता है। तो वहीं सर्दी में बिना पिघली आइसक्रीम खाने का भी अपना मजा है, ना आइसक्रीम पिघलने की झंझट ना जल्दी जल्दी खाने की जल्दी।

इस मौसम में लंच से लेकर डिनर तक लोगों की थाली फुल नजर आती है और आप्शन के आगे पेट भी खुद को फुल किए बिना मानता नहीं। तो आप भी इस सर्दी की दस्तक में पेट को दीजिए भरपूर दावत, बस अपनी सेहत का पूरापूरा ख्याल जरूर रखिए। फिर मिलेंगे अगले फूड प्वाइंट पर।