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नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-29

साँझ की ठंडी हवा अठखेलियाँ कर रही थी। आनन्द कारखाने के काम से निबटारा पाकर उस घाटी की ओर बढ़ता जा रहा था, जिसका कण-कण उसका जाना-पहचाना था। वह झील के किनारे पहुँचा, जो कभी उसके मन की गहराइयों में अपना प्रतिबिम्ब डालती थी। वह नीला जल और उसके किनारे खड़ा छोटा-सा बंगला-चुपचाप और सुनसान-सा, […]

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