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करवा चौथ-गृहलक्ष्मी की कविता

Karva Chauth Poem: चांद से मांगू आज मैं अक्षय सुहाग,लेकर पूजा की थाल सखी अपने हाथ।।करवा छलनी सिंदूर चूड़ी मेहंदी बिंदियाऔर धूप अगरबत्ती दिया और प्रसाद।।से पूजा करूं चांद मैं तेरासदा सलामत रहे सुहाग मेरा।।मैं ना मांगू आज कोई और वर ,मेरे पिया की जिंदगी है मुझे सबसे प्यारा ,उनकी खुशियां दे दो ऐ चांदफैला […]

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