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सवालों के दायरे में जिंदगी – गृहलक्ष्मी कहानियां

सुनयना कॉलेज से आई ही थी कि घर की हालत देखकर परेशान हो गई। अस्त-व्यस्त पड़ा सामान, नौकरानी के ना आने की चुगली कर रहा था। थकी मांदी सुनयना को गुस्सा तो बहुत आया। किचन में गई तो वॉश बेसिन में पड़े झूठे बर्तन जैसे उसे चिढ़ा रहे थे। इसका मतलब राधा आज भी नहीं आई थी। सुनयना के कॉलेज में सुबह जल्दी क्लासेज होती थी। दोपहर में घर आकर खाना बनाने का मूड ही नहीं होता था। गुस्से को शांत कर अब वह काम में जुट गई। फ्रीज से ब्रेड निकालकर नाश्ते से ही काम चला लिया। कॉलेज की सर्विस आसान थोड़े ही थी। लेक्चर तैयार करने के लिए स्टडी करने में ही वह थक जाती थी।

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