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जिएं जिंदगी 60 के बाद भी

जब पूरी जि़ंदगी एक स्वाभिमान और रौब के साथ जीते हुए गुजारी हो तो जीवन-संध्या में क्यों किसी पर इस तरह से निर्भर हो जाएं कि बुढ़ापा बेबसी में बदल जाए। जब तक जिएं, जि़ंदगी से भरपूर रहिए।

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